श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में रावण दहन नहीं हुआ और न ही होगा। कारण, वादी के हालात से कहीं ज्यादा प्रशासनिक उदासीनता को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कश्मीर में 1989 से पूर्व दशहरा का पर्व एक बड़ा समारोह होता था। आतंकवाद के चलते कश्मीरी पंडितों के विस्थापन से कश्मीर में रावण दहन बंद हो गया था।

वर्ष 2007 में कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति ने इसे दोबारा शुरू किया था। संघर्ष समिति आतंकियों की धमकी के बावजूद कश्मीर से पलायन न करने वाले कश्मीरी पंडितों के हितों के लिए संघर्षरत संगठन का नाम है। समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने कहा कि हमने जब यहां दोबारा रावण दहन की परंपरा शुरू की थी तो उस समय बहुत से लोगों ने आशंकाएं जताई थीं। लोग पूछते थे कि इस बार कब और कैसे रावण दहन होगा।

मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें शामिल होने लगे थे। वर्ष 2007 में हमने 18 साल बाद कश्मीर में दशहरा मनाया था, लेकिन वर्ष 2008, 2010, 2014 और 2016 में कश्मीर के बिगड़े हालात के कारण रावण दहन नहीं किया था। बीते साल भी दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया गया था। इस साल भी हमने तैयारी कर रखी थी, लेकिन प्रशासनिक अनुमति नहीं मिली।

राज्यपाल से कई बार संपर्क करने का प्रयास करते हुए राजभवन में लिखित आग्रह भी भेजे। राज्यपाल से मिलकर उनसे कश्मीर में रहने वाले पंडितों के मुद्दों और दशहरा के आयोजन पर बातचीत करना चाहते थे, लेकिन राजभवन ने हमारे आग्रह पर कोई सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया।

Posted By: Preeti jha

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