जम्मू, अवधेश चौहान। कठुआ के रसाना हत्याकांड मामले की जांच में आरोपितों के वकीलों को पूरे दस्तावेज नहीं मिलने का मामला भी तूल पकड़ने लगा है। मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच ने अभी तक आरोपितों के खिलाफ मिले दस्तावेज न तो उनके वकीलों को सौंपे हैं और न ही उन्हें आरोपितों से मिलने दिया है।

वैसे हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान एडवोकेट जनरल जहांगीर इकबाल ने यह सुनिश्चित किया कि आरोपितों को उनके वकीलों से मिलने दिया जाएगा।गौरतलब है कि 9 अप्रैल को चार्जशीट दाखिल करने के दौरान अदालत ने आरोपितों को चालान की कापी नहीं सौंपने पर क्राइम ब्रांच को कड़ी फटकार लगाई थी।

क्राइम ब्रांच किस तरह बचाव पक्ष के वकीलों को चार्जशीट देने में आनाकानी करती रही इसका अंदाजा नौ अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान देखने को मिला। कानूनी तौर पर देखा जाए तो सीआरपीसी की धारा 173 के तहत यह प्रावधान है कि पहले आरोपितों को चार्जशीट की कापी उपलब्ध होनी चाहिए, लेकिन कठुआ में सेशन जज संजीव गुप्ता की अदालत में जब सभी आरोपित कोर्ट में पेश हुए तो न ही उनके पास चार्जशीट की कापी थी और न ही उनके वकील के पास।

आरोपित हेड कांस्टेबल तिलक राज के वकील असीम साहनी ने अदालत से कहा कि आरोपितों को क्राइम ब्रांच ने कापी मुहैया नहीं करवाई है। इस पर अदालत ने आदेश पारित किया कि 17 अप्रैल को चालान की कापी बचाव पक्ष को दे दी जाए, ताकि उनके वकील आरोपितों की पैरवी के लिए वकालतनामा दायर कर सकें। बचाव पक्ष के वकील साहनी का कहना है कि 16 अप्रैल को उन्हें 400 पन्ने की जो चार्जशीट उपलब्ध करवाई गई वह अधूरी है। इसमें गवाहों की कोई सूची नहीं है। इतना ही नहीं, इस अधूरे चालान में कुछ पन्ने भी गायब हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अदालत को भी ऐसा ही आरोप पत्र दिया गया है।

अगर ऐसा है तो अदालत को भी गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। इस अधूरे चालान के पेज भी उलटे-सीधे लगे हुए हैं। साहनी का कहना है कि उन्हें अपने मुवक्किल तिलक राज से भी कठुआ जेल में मिलने नहीं दिया गया। जेल सुप¨रटेंडेंट ने कहा कि आरोपितों से न मिलने देने के लिए पीछे से आदेश हैं। अगर मिलना ही है तो सलाखों के पीछे से मिल लें, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश हैं कि वकीलों को उनके मुवक्किलों से आमने-सामने बैठकर बात करने का मौका दिया जाए।

साहनी ने जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट में एक अर्जी भी दायर की, जिसमें उन्होंने अपने मुवक्किल से न मिलने देने की जेल नियमावली का जिक्र उठाया। याचिका पर गौर करने के बाद जस्टिस आलोक आराध्य ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि बचाव पक्ष के वकीलों को उनके मुवक्किलों से मिलने दिया जाए। 

Posted By: Preeti jha

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