राजौरी, जागरण संवाददाता : दरहाल में सैन्य प्रतिष्ठान पर हमले के बाद जवाबी कार्रवाई में मारे गए दो आत्मघातियों के और भी कई साथी हैं जिन्होंने हाल ही में एक साथ नियंत्रण रेखा (एलओसी) से घुसपैठ की थी। इनकी संख्या पांच से छह बताई जा रही है। ये आतंकी जिले में ही मौजूद हैं। कई क्षेत्रों में सेना, पुलिस बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चला रही है।

सूत्रों की मानें तो करीब 10 दिन पहले सात से आठ आतंकी सरहद पार करके भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए। जो जिले के अलग अलग क्षेत्रों में फैल गए। आतंकियों की तलाश कालाकोट, थन्नामंडी, बुद्धल के कुछ क्षेत्रों में की जा रही है। आत्मघाती दस्ते में शामिल सभी आतंकी 20 से 22 साल की आयु के हैं। ये सभी पाकिस्तानी हैं। बताया जाता है कि ये वहीं आतंकी हैं जिन्हें गुलाम जम्मू कश्मीर में आतंकी प्रशिक्षण शिविरों में कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। आतंकी सभी प्रकार के हथियार चलाने में माहिर हैं।

सुरक्षित एक जगह से दूसरी तक पहुंचने के लिए आतंकियों को सीमा पार से काले कपड़े पहनाकर भेजा गया है। ताकि ये एसओजी और सेना की घातक टीम के जवान लगें। आतंकी सुरक्षा बलों को निशाना बनाने की फिराक में हैं। सूत्रों का कहना है कि कश्मीर में आतंक की कमर टूट चुकी है और अब आतंकी राजौरी व पुंछ दोनों जिलों में गतिविधियां फिर से चला सकें। पुलिस का कोई भी अधिकारी इस मसले पर खुलकर नहीं बोल रहा है।

आतंकी गतिविधियों को बढ़ा दे रहे थे : पिछले माह रियासी से लश्कर कमांडर तालिब शाह सहित एक अन्य आतंकी को ग्रामीणों ने पकड़ लिया था। ये रियासी और राजौरी-पुंछ जिलों में आतंकी गतिविधियों को बढ़ाने में लगे थे। वहीं पिछले वर्ष पुंछ के चमरेड़ जंगल में अक्टूबर में आतंकियों के हमले में सेना के पांच जवान बलिदान हुए थे। इसके बाद पुंछ के भाटाधुलियां के जंगल में तलाशी अभियान के दौरान आतंकियों ने हमला कर छह जवानों को बलिदान किया। 

Edited By: Rahul Sharma