मोदी सरकार - 2.0 के 100 दिन

जम्मू, राज्य ब्यूरो। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने पड़ोसी मुल्क के साथ अच्छे संबंधों की बहाली की गेंद पाकिस्तान के पाले में डालते हुए कहा कि इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से हमें पाकिस्तान की मानसिकता में बदलाव की कोई ज्यादा उम्मीद नहीं है। पड़ोसियों से अच्छे तरीके से व्यवहार पाकिस्तान को सीखना होगा।

उन्होंने जम्मू कश्मीर में पंचायत व निकाय चुनावों का बहिष्कार करने वाले दलों से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने और चुनावों में हिस्सा लेने की अपील की।कंप्रिहेन्सिव इंटीग्रेटेड बॉर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (सीआइबीएमएस) की पायलट योजना को देश के शहीदों को समर्पित करने के बाद राजनाथ सिंह ने कहा कि हमने पाकिस्तान के साथ हमेशा बेहतर संबंध बनाने का प्रयास किया है।

हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोटोकाल तोड़कर पाकिस्तान गए थे, लेकिन पाकिस्तान की तरफ से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया। मुझे नहीं लगता कि पाकिस्तान में इमरान खान के प्रधानमंत्री बनने से कोई ज्यादा फर्क पड़ेगा। जब तक पड़ोसी मुल्क अपनी मानसिकता नहीं बदलेगा तब तक कुछ नहीं होगा। ईश्वर करे कि उनकी मानसिकता में बदलाव आए। मुझे उम्मीद है कि पाकिस्तान के रवैये में पहले की अपेक्षा बेहतर बदलाव आएगा।

केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान की अपनी मानसिकता है। हम उसे नहीं बदल सकते। अपनी मानसिकता को बदलने के लिए पाकिस्तान को ही कदम उठाने होंगे। पड़ोसियों के साथ कैसे अच्छे तरीके से व्यवहार करना है, यह पाकिस्तान को सीखना होगा।

भीमा कोरेगाम के मुद्दे पर किसी तरह की प्रतिक्रिया से बचते हुए उन्होंने कहा कि शहरी नक्सलवाद पर हमें कई सूचनाएं मिली हैं। इस पर जल्द काबू पा लिया जाएगा। पूर्वाेत्तर की स्थिति पर लगभग काबू पा लिया गया है। नक्सलवाद पर भी काबू पाया जा रहा है। कश्मीर में भी स्थिति बेहतर हुई है।

सेना, राज्य पुलिस व अर्धसैनिकबल पूरे समन्वय के साथ आतंकवाद पर काबू पाने में जुटी हैं।जम्मू कश्मीर में निकाय और पंचायत चुनावों के नेशनल कांफ्रेंस व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा बहिष्कार किए जाने पर उन्होंने कहा कि मैं सभी से अपील करूंगा कि वह इन चुनावों में भाग लें। यह चुनाव हम सभी राजनीतिक दलों को आम लोगों से संवाद-समन्वय का अवसर प्रदान करते हैं।

गौरतलब है कि जम्मू कश्मीर में निकाय चुनाव आठ अक्टूबर और पंचायत चुनाव नवंबर में शुरू होने जा रहे हैं, लेकिन नेशनल कांफ्रेंस व पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ने इन चुनावों से दूर रहने का एलान किया है।

रेवाड़ी दुष्कर्म आरोपितों के खिलाफ होगी कार्रवाई

रेवाड़ी दुष्कर्म कांड के आरोपितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का यकीन दिलाते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मेरी हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से इस विषय में बात हुई है। उन्होंने मुझे आश्वासन दिया है कि इस मामले में उचित कार्रवाई की जाएगी। आरोपितों को कठोर दंड दिया जाएगा।

राजनाथ की अपील को नेकां-पीडीपी ने किया खारिज

गृहमंत्री राजनाथ सिंह द्वारा चुनावों का बहिष्कार करने वाली पार्टियों से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील को नेशनल कांफ्रेंस व पीडीपी ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जब राज्य प्रशासन और केंद्र सरकार ने हमारी नहीं सुनीं तो हम क्यों सुनें।

हमने चुनाव बहिष्कार का फैसला स्थानीय जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया है। केंद्र को पहले हमारे उठाए मुद्दों को हल करना चाहिए।नेशनल कांफ्रेंस के महासचिव अली मुहम्मद सागर ने कहा कि हमने हमारे संवैधानिक अधिकार अनुच्छेद के मुद्दे पर केंद्र से स्पटीकरण मांगा था, लेकिन नई दिल्ली ने हमारी मांग को अनसुना कर दिया।

हमने सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। इस पर भी कोई ध्यान नहीं दिया। यहां इस समय घेराबंदी एवं तलाशी अभियान (कासो) और ऑपरेशन ऑलआउट चल रहा है, रोज किसी न किसी के मारे जाने की खबर आती है, 35ए के मुद्दे पर केंद्र के स्टैंड को लेकर लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। ऐसे हालात में चुनाव कैसे हो सकते हैं। आखिर ऐसे हालात में चुनाव कराने के पीछे केंद्र की मंशा क्या है, यह तो पता चले। केंद्र व राज्य ने जब हमारी नहीं सुनी तो हम क्यों सुनें। पीडीपी के प्रमुख प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने कहा कि हमने मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य में चुनाव कराने केा लेकर अपनी कुछ बातें राज्यपाल और केंद्र सरकार के समक्ष रखी हैं।

35ए पर हम केंद्र से स्पष्टीकरण चाहते हैं। हमने कहा था कि यहां एक सर्वदलीय बैठक बुलाई जाई। रियासत में चुनाव लायक माहौल तैयार किया जाए। हमने स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए चुनावों से दूर रहने का एलान किया है। अब चुनाव में भाग लेने की अपील करने का क्या औचित्य है। पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के चेयरमैन हकीम मुहम्मद यासीन ने कहा कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह अपील कर रहे हें कि चुनावों में हिस्सा लो जबकि राज्यपाल प्रशासन पहले ही चुनाव का एलान कर चुका है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी अधिसूचना जारी कर चुके हैं। चुनाव कराने का फैसला हम लोगों द्वारा 35ए और सुरक्षा का मुद्दा उठाने क बावजूद लिया है। मौजूदा सुरक्षा परिदृश्य में चुनाव कराने का राज्यप्रशासन का फैसला लोकतंत्र की हत्या के समान है। 

Posted By: Preeti jha

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