जागरण संवाददाता, जम्मू : गुग्गा नवमी पर विभिन्न समुदायों ने अपने देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना की। रीति-रिवाज के साथ कुलदेवता के बकरे छोड़ने, जात्तर, पत्तल, कंजक पूजन और दोपहर बाद भंडारे शुरू हुए। इसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।

अलग-अलग नामों से पूजे जाने वाले गुग्गा पीर को जम्मू-कश्मीर में राजा मंडलीक के नाम से पूजा जाता है। उनकी जयंती पर राज्य के लगभग सभी देवस्थानों पर पूजा-अर्चना हुई। जम्मू शहर के नरवाल वाला में स्थित राजा मंडलीक के ऐतिहासिक देवस्थान में सुबह से देर शाम तक श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। सुंजवां में कालीबीर के देवस्थान पर भी बिरादरियों के सदस्यों ने बड़ी संख्या में शिरकत की। नरवाल में सुबह आठ बजे से हवन यज्ञ शुरू हुआ। 11 बजे पूर्णाहुति हुई। देवस्थान में पूजा-अर्चना के बाद देवताओं को भोग लगवाया गया। इस मौके पर राजनीतिक दलों के नेता, प्रशासनिक अधिकारी सपरिवार आशीर्वाद लेने के लिए देवस्थान पहुंचे।

सेवादार विजय शर्मा ने श्रद्धालुओं की तरफ से पूजा-अर्चना करते हुए दुआ मांगी। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक से यहां हर साल गुग्गा नवमी पर मुख्य कार्यक्रम होता है। राजा मंडलीक हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा सहित देश के अन्य राज्यों में भी विभिन्न नामों से पूजे जाते हैं। आज देश भर में गुग्गा नवमी मनाई गई। इस मौके पर सेवादार रमण शर्मा, सतीश गगंवाल, राजेश शर्मा, सुभाष कुमार, कुलबीर ¨सह, शुभम प्रजापित, शुभम शर्मा, दीपक गुप्ता, अशोक खजूरिया, रवि, साहिल, राघव, सुशील कुमार, मोनू, प्रेम कुमार वर्मा, चूनी लाल आदि ने श्रद्धालुओं की सेवा की।

उधर, सुंजवां में कालीबीर के देवस्थान पर भी देर शाम तक श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रही। बाबा कालीवीर देवस्थान में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे।

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