जम्मू, राज्य ब्यूरो। राज्य के पूर्व सैनिकों ने सीमा पार से जारी आतंकवाद में सेना के जवानों के लगातार शहीद होने से उपजे हालात में जम्मू को अलग राज्य बनाने का मुद्दा उठाकर बिगड़ रही स्थिति को संभालने की पैरवी की है।

कश्मीर में शहीद हुए चार सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित कार्यक्रम में जम्मू कश्मीर एक्स सर्विसेज लीग ने कहा कि इससे पहले कि कश्मीर के साथ रहना और मुश्किल हो जाए, जम्मू को अलग राज्य बना दिया जाए। वीरवार को जम्मू में हुए कार्यक्रम की अध्यक्षता लीग के प्रधान मेजर जनरल गोवर्धन जम्वाल कर रहे थे। इस मौके पर सेना के कई सेवानिवृत्त अधिकारी मौजूद थे।

लीग के सदस्यों ने कश्मीर के गुरेज में आतंकियों की घुसपैठ को नाकाम बनाते शहीद हुए 36 राष्ट्रीय राइफल्स के मेजर केपी कुमार राणे, राइफलमैन हमीर, राइफलमैन मंदीप रावत व गनर विक्रमजीत को श्रद्धांजलि दी। पूर्व सैनिकों ने कश्मीर में हालात बेहतर बनाने के लिए सेना के जवानों की कुर्बानियों की सराहना की।

इस दौरान कश्मीर के रफियाबाद में चार आतंकियों को मार गिराने के लिए सेना के जवानों व अधिकारियों की सराहना की गई। गोवर्धन जम्वाल ने कहा कि क्षेत्रवासियों का मानना है कि जम्मू के कश्मीर से अलग होने से यह क्षेत्र हिमाचल प्रदेश व पंजाब की तरह तरक्की करेगा।

राज्य के दोनों क्षेत्रों की सोच आपस में टकरा रही है। हालात बिगड़ रहे हैं, इसलिए केंद्र सरकार को कार्रवाई करनी चाहिए। इस समय दोनों क्षेत्र एक दूसरे से लड़ रहे हैं। एक दूसरे के हितों को नुकसान पहुंचाने की भी कोशिशें हो रही हैं।

मौजूदा हालात में बेहतर होगा कि जम्मू व कश्मीर को अलग-अलग करने के साथ लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर जन आकांक्षाओं को पूरा किया जाए।

पूर्व सैनिकों ने कहा कि हैरानी की बात है कि कश्मीरी इस समय पूरे देश में बिना किसी परेशानी के संपत्ति बना रहे हैं। दूसरी ओर जम्मू कश्मीर में कुर्बानियां देने वाले सैनिक व राज्य के हितों को समर्पित भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी चाहकर भी यहां बस नहीं सकते हैं।

Posted By: Preeti jha