जम्मू, अवधेश चौहान। पुलवामा कायराना हमले के विरोध में देशभर में प्रदर्शन जारी हैं। जम्मू तो मानो उबल रहा है। गुस्सा इतना अधिक है कि प्रशासन को कर्फ्यू लगाने पर बाध्य होना पड़ा। पांच दिन से कर्फ्यू जारी है।

कश्मीर के माथे पर बदनुमा दाग बने आतंकवाद और अलगाववाद को देशभक्त जम्मू ने एक मजबूत दीवार की तरह रोके रखा। सीमा पार बैठे आतंकी सरगनाओं ने जम्मू में भी नफरत का जहर घोलने के तमाम षड्यंत्र रचे, पर डोगरों की भूमी जम्मू ने हर चाल को जवाहर टनल (जम्मू को कश्मीर से जोड़ता है) से पार नहीं करने दिया। देश भक्त जम्मू हर बार मजबूत दीवार की तरह खड़ा रहा।

पुलवामा हमले के बाद कुछ पाक परस्तों ने जम्मू में नफरत की चिंगारी को हवा देने की कोशिश की तो पूरा जम्मू उबल पड़ा। हाथों में तिरंगा ले युवाओं की टोलियां भारत मां की जयकारों से जम्मू को गुंजायमान करती रही। इस दौरान शहर में तैनात सेना के अधिकारी भी उनके जोश व देशभक्ति के कायल दिखे।

इस हमले में जम्मू ने नसीर अहमद के रूप में अपना सपूत खोया है। हमले के विरोध में जम्मू, सांबा, कठुआ, ऊधमपुर, रियासी, पुंछ, रामबन आदि कई जिलों में लोग सड़कों पर तिरंगा लेकर वंदे मातरम, भारत माता के जयघोष लगा सड़कों पर आ उतरे। उनकी मांग है कि दोषी आतंकियों सहित पाकिस्तान को सबक सिखाया जाए। हालांकि इस दौरान कुछ शरारती तत्वों की वजह से माहौल बिगड़ा। कर्फ्यू में भी जम्मू के हर मुहल्ले-गली बाजारों में लोग शहीदों के लिए तिरंगों के साथ कैंडल मार्च निकालते दिखे।

सेना-पुलिस आमने-सामने, डीआइजी ने मांगी माफी :

जम्मू में पांच दिन से कर्फ्यू है और सेना फ्लैग मार्च कर रही है। जम्मू के युवा हमले के विरोध में सड़कों पर उतर रहे हैं और भारत माता की जय और इंडियन आर्मी जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। सेना यहां के युवाओं के देशप्रेम से भलीभांति वाकिफ है। जानती है कि यहां के लोग कश्मीर की तरह पत्थर नहीं फेंकते।

यही कारण है कि कर्फ्यू में प्रदर्शन कर रहे जम्मू के युवाओं को पुलिस द्वारा लाठीचार्ज किए और पकड़े जाने पर सेना के अधिकारियों की पुलिस अफसरों से बहस हो गई। सेना के अधिकारी ने तो यहां तक कहा दिया कि अगर पुलिस ऐसा करेगी तो वह ड्यूटी नहीं देंगे। मामला गंभीर होते देख टाइगर डिवीजन के ब्रिगेडियर शरद कपूर भी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने स्थिति को शांत किया। जम्मू-कठुआ रेंज के डीआइजी विवेक गुप्ता ने सेना से इस घटना के लिए माफी भी मांगी।

 बेरहमी से पीटा पर नहीं छोड़ा तिरंगा :

जम्मू-श्रीनगर हाईवे सात दिन से बंद था। घटना 11 फरवरी की है। जम्मू में फंसे कश्मीर के यात्रियों में शामिल शरारती तत्वों ने पाकिस्तान के समर्थन नारेबाजी कर दी। यह जम्मू के साइंस कॉलेज के विद्यार्थियों को नागवार गुजरा। वे तिरंगे लेकर भारत मां की जय का जयघोष करते सामने आ गए। पुलिस ने बेरहमी से विद्यार्थियों को पीटा, लेकिन फिर भी उन्होंने तिरंगा नहीं छोड़ा।

हर मंसूबे पर पानी फेरा :  

वर्ष 1989 का जिक्र करें तो कश्मीर में आतंकवाद तेजी से पनपा। लाखों की संख्या में कश्मीरी पंडित पलायन कर जम्मू में आ गए। जम्मू के लोगों ने उन्हें हर संभव मदद कर भाईचारे की मिसाल दी। इसी दौरान जम्मू भी आतंकवाद की जकड़ में आने लगा। कई जिलों में आतंकवाद फैला, लेकिन जम्मूवासियों जिसमें हर धर्म के लोग थे, ने आतंकवाद व अलगाववाद का मुकाबला कर दुश्मनों के मंसूबों पर पानी फेर दिया। जम्मू संभाग में 10 जिले हैं। हर जिले के लोग देशभक्ति से लबरेज हैं। इनके लिए देश पहले है। यही कारण एक ही राज्य होने के बावजूद आज तक आतंकवाद जड़ें नहीं जमा पाया है। जम्मू संभाग में करीब 80 हजार जवान हैं, जो सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, एसएसबी और पुलिस में सेवाएं दे रहे हैं।

जम्मू के जज्बे को सलाम...

परमवीर चक्र विजेता कैप्टन (सेेवानिवृत्त) बाना सिंह ने कहा कि इस घटना को लेकर कोई राजनीति करने की जरूरत नहीं। देश उन जवानों के साथ खड़ा है, जिन्होंने बलिदान दिया है। जम्मू के लोगों की देशभक्ति और एकजुटता को मैं सलाम करता हूं। समय आ गया है कि लोगों के इस जज्बे को समझा जाए। इसे आगे भी बनाए रखने की जरूरत है।

Posted By: Preeti jha

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