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माइनस 10°C तापमान और बर्फीला तूफान, अंधेरे में डूबे लद्दाख को पावरग्रिड के जांबाजों ने कैसे दी रोशनी? देखें Video

Published: Tue, 03 Nov 2026 11:43 AM (IST)

लद्दाख में बिजली आपूर्ति बनाए रखना बेहद चुनौतीपूर्ण है, खासकर जोजिला जैसे अत्यधिक ठंडे और बर्फीले क्षेत्रों में। हाल ही ...और पढ़ें

कर्मचारियों ने बर्फीले तूफान में लद्दाख में 6 घंटे में बहाल की सप्लाई।

कर्मचारियों ने बर्फीले तूफान में लद्दाख में 6 घंटे में बहाल की सप्लाई।

HighLights

  1. लद्दाख में बिजली आपूर्ति बनाए रखना अत्यधिक चुनौतीपूर्ण कार्य।

  2. जोजिला में -10°C और बर्फीले तूफान में बिजली बहाल।

  3. पावरग्रिड टीमों ने तकनीकी खराबी को ठीक कर आपूर्ति सुनिश्चित की।

डिजिटल डेस्क, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में बिजली की आपूर्ति बनाए रखना आसान काम नहीं है। यहां बहुत अधिक ऊंचाई पर तापमान जमाव बिंदु से नीचे चला जाता है। बर्फीले तूफान के दौरान कुछ भी दिखाई नहीं देता और तेज हवाओं के कारण काम करना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे हालात में ट्रांसमिशन लाइन को चालू रखना बड़ी चुनौती है। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों के लिए लद्दाख तक बिजली पहुंचाना बेहद कठिन काम है। उन्हें देश की सबसे मुश्किल भौगोलिक और मौसम संबंधी परिस्थितियों में काम करना पड़ता है।

इन कर्मचारियों को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, यह 28 अक्टूबर को सामने आया। उस दिन जोजिला क्षेत्र में 220 केवी की नई भूमिगत केबल लाइन को चालू करते समय कुछ तकनीकी दिक्कत आ गई। इसका असर 220 केवी अलुस्तेंग-द्रास ट्रांसमिशन लाइन पर पड़ा। यह लाइन लद्दाख में बिजली पहुंचाने का एकमात्र जरिया है।

इस रुकावट के कारण पूरा क्षेत्र अंधेरे में डूब गया। यह वह समय है जब सर्दियां शुरू हो रही हैं, तापमान गिर रहा है और बिजली की मांग बढ़ रही है। इसके बाद जो हुआ, उससे पता चलता है कि श्रीनगर-लेह ट्रांसमिशन सिस्टम को चालू रखने और इस कठिन इलाके में खराबी आने पर बिजली बहाल करने के लिए पावरग्रिड के कर्मचारियों को कितनी बड़ी जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं।

माइनस 10 डिग्री में भी नहीं रुकी पावरग्रिड की टीमे

तापमान शून्य से लगभग 10 डिग्री सेल्सियस नीचे था और जोजिला में भीषण बर्फीला तूफान चल रहा था, तभी कश्मीर और लद्दाख से पावरग्रिड की टीमें हरकत में आ गईं। 29 अक्टूबर की सुबह 6:00 बजे तक, पावरग्रिड के कर्मचारी खराब मौसम और अधिक ऊंचाई वाले कठिन हालात का सामना करते हुए मौके पर पहुंच गए। इसका वीडियो भी सामने आया है यहां देखें....


अंडरग्राउंड केबल हटाकर ओवरहेड लाइन से बहाल की बिजली आपूर्ति

टीमों ने अंडरग्राउंड केबल सेक्शन को सेवा से हटा दिया और ओवरहेड हिस्से के ज़रिए ट्रांसमिशन लिंक को बहाल करने का काम किया। 29 अक्टूबर को दोपहर 12:04 बजे 220 kV अलुस्टेंग-द्रास लाइन को सफलतापूर्वक फिर से शुरू कर दिया गया, जिससे लंबे समय तक बिजली बंद रहने के बाद लद्दाख में फिर से बिजली आ गई।

यह ऑपरेशन में कश्मीर और लद्दाख की टीमों ने भी हिस्सा लिया। यह काम इस क्षेत्र में बिजली कनेक्टिविटी बनाए रखने के लिए ज़रूरी तालमेल और तकनीकी प्रयासों को दर्शाता है।

28 अक्टूबर की घटना और उसके बाद की बहाली एक बड़ी सच्चाई को सामने लाती है कि लद्दाख में बिजली ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखना न केवल इंजीनियरिंग की विशेषज्ञता की परीक्षा है, बल्कि यह धैर्य और तैयारियों की भी एक बड़ी परीक्षा है।

श्रीनगर-लेह ट्रांसमिशन सिस्टम 341 किलोमीटर लंबा

श्रीनगर-लेह ट्रांसमिशन सिस्टम 341 किलोमीटर लंबा है, जिसमें से लगभग 20 किलोमीटर का हिस्सा बेहद अहम ज़ोजिला क्षेत्र से होकर गुज़रता है। सर्दियों के दौरान इस हिस्से में बहुत बड़ी चुनौतियां आती हैं; भारी बर्फबारी, जमा देने वाली ठंड और तेज़ हवाएं यहां काम करने वाले लोगों और मशीनों, दोनों की कड़ी परीक्षा लेती हैं।

भौगोलिक चुनौतियों को समझते हुए, पावरग्रिड ने लद्दाख के द्रास और कश्मीर के गगनगीर जैसी रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर ट्रांसमिशन-लाइन कार्यालय स्थापित किए हैं।

इन कार्यालयों की मदद से, खराब मौसम और दुर्गम रास्तों के बावजूद, कर्मचारी बिना समय बर्बाद किए खराबी को ठीक करने और बहाली का काम शुरू कर सकते हैं।

शून्य से 26 डिग्री नीचे भी ठीक की थी खराबी

हाल ही में किया गया यह काम कोई इकलौता उदाहरण नहीं है। साल 2019 में, पावरग्रिड के कर्मचारियों ने ज़ोजिला इलाके में ही, शून्य से 26 डिग्री नीचे के कड़ाके की ठंड में एक ऐसी ही खराबी को ठीक किया था। इससे पता चलता है कि ट्रांसमिशन कॉरिडोर को चालू रखने के दौरान फील्ड टीमों को बार-बार कितनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

 

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