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पिता के बाद भाई भी देश पर कुर्बान, 5 बहनों का सूना हुआ मायका; जम्मू में पुलिस स्मृति दिवस पर याद कर रो पड़ा परिवार

Published: Wed, 21 Oct 2026 01:01 PM (IST)

जम्मू में पुलिस स्मृति दिवस पर बलिदानी हेड कांस्टेबल सोम नाथ शर्मा के परिवार का दर्द सामने आया। बेटी मीनाक्षी ...और पढ़ें

पति और बेटे को खोने वाली मां को संभालती बेटी।

 पति और बेटे को खोने वाली मां को संभालती बेटी।

HighLights

  1. पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद परिवार का दर्द, छलके आंसू।

  2. पिता हेड कांस्टेबल सोम नाथ 2002 बम धमाके में हुए शहीद।

  3. बेटा गगन दीप 2007 राजौरी ग्रेनेड हमले में देश पर कुर्बान।

दिनेश महाजन, जम्मू। कुछ जख्म ऐसे होते हैं, जिन्हें वक्त भी नहीं भर पाता। कुछ दर्द ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। जम्मू के गांधीनगर पुलिस स्टेडियम में पुलिस स्मृति दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में ऐसा ही भावुक दृश्य देखने को मिला। बलिदानी हेड कांस्टेबल सोम नाथ शर्मा की बेटी मीनाक्षी शर्मा अपने पिता और भाई की तस्वीरों को देखकर आंसू नहीं रोक पाईं। पास खड़ी मां मोहिनी देवी भी पति और बेटे को याद कर भावुक हो उठीं। मां को ढांढस बंधाती बेटी की आंखों से बहते आंसू परिवार के बलिदान की कहानी बयां कर रहे थे।

यह उस परिवार की कहानी है, जिसने पाकिस्तान प्रायोजित छद्म युद्ध के कारण अपने दो प्रियजनों को खो दिया। पहले पिता देश की रक्षा करते हुए बलिदान हो गए और फिर उनके नक्शेकदम पर चलते हुए इकलौते बेटे ने भी देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। पीछे रह गईं पांच बहनें और उनकी मां, जिनके जीवन में अपनों की कमी कभी पूरी नहीं हो सकती।

पिता के बाद भाई ने भी पहनी वर्दी

मीनाक्षी शर्मा ने बताया कि उनके पिता हेड कांस्टेबल सोम नाथ शर्मा वर्ष 2002 में बम धमाके में बलिदान हो गए थे। पिता को खोने का दुख परिवार के लिए बहुत बड़ा था, लेकिन उनके बेटे गगन दीप शर्मा ने हिम्मत नहीं हारी। उसने अपने पिता की वर्दी पहनी और पुलिस में कांस्टेबल बनकर देशसेवा का रास्ता चुना।

वर्ष 2007 में जिला राजौरी में हुए ग्रेनेड हमले में गगन दीप भी बलिदान हो गया। पिता की शहादत के बाद जिस बेटे से परिवार को सहारे की उम्मीद थी, वह भी देश की रक्षा करते हुए हमेशा के लिए बिछुड़ गया।

पांच बहनों का इकलौता भाई

मीनाक्षी ने भावुक होते हुए कहा कि गगन दीप पांच बहनों का इकलौता भाई था। मां-बाप के बाद भाई ही बहनों के लिए मायके का सबसे बड़ा सहारा होता है, लेकिन उनके नसीब में यह सुख भी नहीं रहा। भाई की तस्वीर देखकर मीनाक्षी की आंखों से आंसू बहने लगे। उनके लिए यह केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन यादों को फिर से जीने का पल था, जो पिता और भाई के साथ जुड़ी थीं

मीनाक्षी ने कहा कि उनके भाई ने अपनी जन्म देने वाली मां से बढ़कर भारत माता की रक्षा को प्राथमिकता दी और देश के लिए बलिदान दे दिया। उन्हें अपने पिता और भाई की शहादत पर गर्व है, लेकिन अपनों को खोने का दर्द आज भी उनके दिल में है।

कार्यक्रम में पति और बेटे को याद कर भावुक हुईं मोहिनी देवी को संभालती मीनाक्षी की आंखों में आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। यह दृश्य बता रहा था कि देश की रक्षा के लिए जवानों के बलिदान के साथ उनके परिवार भी जिंदगी भर बिछड़ने का दर्द सहते हैं।