विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 09, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jammu Kashmir: पद्मश्री शिव निर्मोही बोले- हर वर्ष लिखूंगा पांच किताबें, प्रधानमंत्री ने किया प्रोत्साहित

By Vikas AbrolEdited By:
Published: Tue, 09 Nov 2021 07:12 PM (GMT+05:30)

पद्मश्री मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए शिव निर्मोही ने कहा कि अब किसी पुरस्कार की लालसा से नहीं लिखना ...और पढ़ें

साहित्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मानित होकर ऊधमपुर लौटे शिव निर्मोही का ऊधमपुर में भव्य स्वागत हुआ।
साहित्य क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मानित होकर ऊधमपुर लौटे शिव निर्मोही का ऊधमपुर में भव्य स्वागत हुआ।

जम्मू, जागरण संवाददाता : नई दिल्ली में सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित नागरिक अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द से शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए पद्मश्री सम्मानित होकर ऊधमपुर लौटे शिव निर्मोही का ऊधमपुर में भव्य स्वागत हुआ। खासकर साहित्यकार मित्रों से मिलने का सिलसिला दिन भर चलता रहा।

दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में उन्होंने सम्मान समारोह से जुड़ी बातें साझा करते हुए कहा कि कई साथियों से मिलना हुआ। इस दौरान प्रधान मंत्री जी को मिलने के लिए दो सौ के करीब लोग मिलने को उत्सुक थे। इस बीच प्रधानमंत्री ने उनसे सीधा पूछा कि जम्मू का क्या हाल है।मुझे इस बात को लेकर बड़ी हैरानगी हुई कि उन्होंने कैसे पहचान लिया कि मैं जम्मू से हूं। बातचीत के दौरान मैंने बताया कि आप मेरे गांव आ चुके हैं। मैंने बताया कि एक बार नारायणा अस्पताल और एक बार माता वैष्णो देवी यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में आप मेरे गांव आए थे। यह सुनकर वह मुस्कुराते हुए आगे निकल गए। शिव निर्मोही मूलता गांव पैंथल के रहने वाले हैं।

जम्मू-कश्मीर का होने के नाते बहुत से लोग यह जानना चाहते थे कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद किस तरह का बदलाव महसूस कर रहे हैं। किस तरह का साहित्य रचा जा रहा है। दिल्ली कई बार जाना हुआ लेकिन इस बार का जाना जीवन का सपना था। कभी लगता नहीं था कि मुझे भी कभी पदमश्री मिल सकता है। मुझे हमेशा यही लगता था कि शायद कविता कहानियां लिखने वाले साहित्यकारों को ही पद्मश्री मिलता है। कह सकता हूं कि चीजें बदली हैं।

पद्मश्री मिलने पर संतोष व्यक्त करते हुए शिव निर्मोही ने कहा कि अब किसी पुरस्कार की लालसा से नहीं लिखना चाहता लेकिन लिखत रहना है। मैंने अपने आप से वचन दे रखा है कि अब हर वर्ष पांच किताबें लिखू्ंगा। पिछले वर्ष भी पांच किताबें लिखी थी। इस वर्ष अभी तक तीन किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं और दो जल्द आने वाली हैं। अब तक निर्मोही की लोक संस्कृति, साहित्य, देवी देवताओं, डुग्गर दी लोक गाथाएं के लिए जम्मू-कश्मीर कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी दो बार सर्वश्रेष्ठ पुस्तक सम्मान से सम्मानित हो चुके हैं। इसके अलावा कई साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संगठन भी उन्हें सम्मानित किया हुआ है।

पद्मश्री मिलने पर वरिष्ठ साहित्यकार डोगरी संस्था की उपाध्यक्ष प्रो. वीणा गुप्ता ने कहा कि निर्मोही जी का कार्य सराहनीय है। जिस दिशा में वह काम कर रहे हैं। उससे डुग्गर इतिहास दुनिया तक पहुंच रहा है। उनके सम्मान से डोगरा इतिहास, साहित्य, कला सम्मानित हुआ है।

पद्मश्री से सम्मानित

इससे पहले जम्मू के प्रो. राम नाथ शास्त्री, पद्मा सचदेव, प्रो. निलांबर देव शर्मा, डा. जितेंद्र ऊधमपुरी, प्रो. वेद घई, बलवंत ठाकुर, नरसिंह देव जम्वाल, एसपी वर्मा को पद्मश्री सम्मान मिल चुका है।