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उमर कैबिनेट में फेरबदल, 10 अक्टूबर को हो सकता है मंत्रिमंडल का विस्तार; 3 नए चेहरे होंगे शामिल

Published: Fri, 09 Oct 2026 05:23 AM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला 10 अक्टूबर के आसपास मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की तैयारी में हैं। इस विस्तार में ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला। फाइल फोटो

HighLights

  1. मंत्रिमंडल विस्तार 10 अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है।

  2. मुख्यमंत्री को क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधना होगा।

  3. कांग्रेस की मंत्रिमंडल में भूमिका भी चर्चा का विषय है।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपने मंत्रिमंडल में विस्तार के साथ फेरबदल की तैयारी में हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्रिपरिषद में यह बदलाव 10 अक्टूबर के आसपास हो सकता है। मुख्यमंत्री ने गत माह श्रीनगर में संकेत दिया था कि विधानसभा का सत्र समाप्त होने के बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा।

लेकिन जीएसटी परिषद की बैठक के सिलसिले में दिल्ली दौरे के कारण इसे आगे बढ़ाया गया। दो दिन पहले भी मुख्यमंत्री ने मंत्रिमंडल में विस्तार और फेरबदल का संकेत दिया है। वह शुक्रवार को दिल्ली से लौटने के बाद नेशनल कांफ्रेंस अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला से चर्चा कर मंत्रिमंडल विस्तार का अंतिम निर्णय ले सकते हैं।

मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर पार्टी के भीतर लंबे समय से चर्चा चल रही है। मौजूदा परिस्थितियों में मुख्यमंत्री के सामने केवल नए चेहरों को शामिल करने के बजाय क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन साधने की चुनौती भी रहेगी।

सूत्रों के मुताबिक दो से तीन मौजूदा मंत्रियों को मंत्रिपरिषद से बाहर किए जाने की संभावना पर भी विचार चल रहा है, क्योंकि नेशनल कान्फ्रेंस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ताओं के अलावा विधायक भी कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर सार्वजनिक तौर पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ सदस्य मंत्रिपरिषद में

जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के तहत केंद्र शासित प्रदेश में मंत्रिपरिषद की संख्या विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के दस प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती। 90 सदस्यीय विधानसभा के लिहाज से मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ सदस्य मंत्रिपरिषद में हो सकते हैं।

वर्तमान में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के अलावा उपमुख्यमंत्री सुरिंदर कुमार चौधरी, सकिना मसूद इट्टू, जावेद अहमद राणा, जावेद अहमद डार और सतीश शर्मा मंत्रिपरिषद में हैं।

इस लिहाज से मौजूदा सभी मंत्रियों को बरकरार रखा जाता है तो अधिकतम तीन नए मंत्री शामिल किए जा सकते हैं। यदि किसी मौजूदा मंत्री को हटाकर स्थान बनाया जाता है तो नए चेहरों की संख्या इससे अधिक भी हो सकती है, लेकिन कुल संख्या नौ से आगे नहीं जा सकती।

नेशनल कॉन्फ्रेंस के कई विधायकों के नाम चर्चा में

मंत्रिमंडल में संभावित नए चेहरों को लेकर नेशनल कांफ्रेंस के कई विधायकों के नाम चर्चा में हैं। इनमें अर्जुन सिंह राजू, डा. रामेश्वर, तनवीर सादिक, डा. बशीर, हिलाल अकबर लोन, सलमान सागर, अहसान परदेसी, नजीर गुरेजी और मुबारक गुल के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

हालांकि, इन नामों को लेकर अभी तक पार्टी या सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। मंत्रिमंडल में स्थान सीमित होने के कारण संभावित नामों को लेकर पार्टी नेतृत्व के स्तर पर व्यापक विचार-विमर्श की संभावना है। मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि जीएसटी परिषद की बैठक के बाद डा फारूक अब्दुल्ला से सलाह-मशविरा कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अक्टूबर 2024 में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में सरकार के गठन के बाद से मंत्रिपरिषद में कोई विस्तार नहीं हुआ है। मौजूदा मंत्रियों ने उसी समय शपथ ली थी और अब सरकार के गठन के करीब दो वर्ष पूरे होने जा रहे हैं।

विस्तार के पीछे मंत्रियों पर कई विभागों के अतिरिक्त प्रभार का बोझ भी एक अहम पहलू माना जा रहा है। मौजूदा सरकारी सूची के अनुसार कई मंत्रियों के पास एक से अधिक महत्वपूर्ण विभाग हैं। ऐसे में नए मंत्रियों को शामिल कर विभागों का पुनर्वितरण किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।

कांग्रेस की भूमिका भी चर्चा का विषय 

मंत्रिमंडल विस्तार के साथ सत्तारूढ़ गठबंधन में कांग्रेस की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। गत माह सत्ताधारी नेशनल कान्फ्रेंस ने प्रस्तावित मंत्रिमंडल विस्तार में कांग्रेस को शामिल करने का संकेत दिया था।

कांग्रेस ने यह कहकर मंत्रिमंडल में शामिल होने से इंकार किया था कि वह जम्मू कश्मीर को राज्य का दर्जा मिलने तक प्रदेश कैबिनेट का हिस्सा नहीं बनेगी। लेकिन कांग्रेस से जुढ़े सूत्रों का दावा है कि कांग्रेस अपने छह में से दो विधायकों को मंत्री बनाना चाहती है और कुछ अहम विभाग चाहती है,जिस पर सत्ताधारी दल सहमत नहीं है।