जम्मू, राज्य ब्यूरो। जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद 370 समाप्त होने के 100 पूरे होने के बाद भी नागरिकता पहचान पत्र को लेकर संशय बरकरार है। अनुच्छेद 370 होने के बाद केंद्र सरकार ने स्टेट सब्जेक्ट को भी रद्द कर दिया था। यह आदेश उस समय आया था जब जम्मू कश्मीर का 31 अक्टूबर को पुनर्गठन हुआ था। केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद स्टेट सब्जेक्ट का औचित्य समाप्त हो गया।

स्टेट सब्जेक्ट एक ऐसा दस्तावेज था जो जम्मू कश्मीर के निवासियों की स्थायी नागरिकता को प्रमाणित करता था। इसकी आधार पर जम्मू कश्मीर में नौकरियों के लिए आवेदन किया जा सकता था। इसे संबधित जिलों में डिप्टी कमिश्नर के कार्यालयों, तहसीलों में बनाया जाता था। अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही जम्मू कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट के बनाने पर रोक लग गई थी। इस समय जम्मू कश्मीर में स्टेट सब्जेक्ट नहीं बनाए जा रहे है लेकिन इसकी जगह कोई अन्य दस्तावेज भी नहीं बनाया जा रहा है। डिप्टी कमिश्नर के कार्यालय भी नए नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे है। लोगों से कहा जा रहा है कि वे कुछ दिनों तक इंतजार करें क्योंकि नए दस्तावेज का फैसला सरकार को करना है।

अब नया दस्तावेज डोमाेसाइल होगा या कोई अन्य दस्तावेज, इसकाे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह किस आधार पर बनेगा। इसके लिए जम्मू कश्मीर में रहने की अवधि क्या होगी, क्या हिमाचल प्रदेश की तर्ज पर बनेगा या किसी अन्य प्रदेश की तर्ज पर या कोई भी दस्तावेज नहीं आएगा और आधार कार्ड ही माना जाएगा, इन सभी सवालों के जवाब सरकार के नीतिगत फैसले के बाद ही आएंगे। इस मामले को लेकर स्थिति का स्पष्ट होना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि आने वाले समय में नौकरियां निकलने वाली है।

चूंकि सरकार ने एक बार पूरी तरह से स्पष्ट कर दी है कि अनुच्छेद 370 को हटा कर पश्चिमी पाकिस्तान के रिफ्यूजियों के साथ इंसाफ किया है। अब सत्तर सालों से पिस रहे रिफ्यूजियों को नागरिकता का अधिकार मिल जाएगा। रिफ्यूजी भी इसी इतंजार में है कि कोई दस्तावेज सामने आए। वेस्ट पाक रिफ्यूजी एक्शन कमेटी के प्रधान लब्बा राम गांधी का कहना है कि सरकार को डोमोसाइल लाना चाहिए ताकि स्थिति साफ हो सके। हमे भी अपनी नागरिकता मिल जाए। चाहे सरकार दस साल का लाए या पंद्रह साल का, डोमोसाइल बनना चाहिए।

Posted By: Rahul Sharma

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