जम्मू, रोहित जंडियाल। केस एक : ऊधमपुर के रामनगर की 70 साल की कौशल्या देवी को कुछ सप्ताह पूर्व बंदरों ने काट लिया था। वह उप जिला अस्पताल में गईं, लेकिन इलाज नहीं था। किसी दवाई की दुकान में एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं थे। मजबूर होकर जम्मू के जीएमसी में आना पड़ा। यहां भी इंजेक्शन नहीं थे। एक दुकान से इंजेक्शन खरीद इलाज करवाया।

केस दो: अखनूर के चरणदास को कुत्ते ने काट लिया। वह उप जिला अस्पताल में इलाज के लिए गए, लेकिन एंटी रेबीज इंजेक्शन नहीं थे। इलाज के लिए उन्हें तीस किलोमीटर दूर जीएमसी जम्मू में आना पड़ा। यहां पर भी इंजेक्शन नहीं थे। एक दुकान से इंजेक्शन खरीदे व इलाज करवाया।

यह चंद मामले स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग की रेबीज से निपटने के लिए सरकारी की लापरवाही को साफ दर्शाते हैं। बेशक चार दिन पहले जीएमसी अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन आ गए हैं, लेकिन अन्य अस्पतालों में एंटी रेबीज इंजेक्शन व सेरम उपलब्ध नहीं है। दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को इलाज के लिए जीएमसी ही आना पड़ता है। वहीं इंजेक्शन न होने और जागरूकता न होने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोग झाड़ फूंक करते हैं। इससे मरीज अस्पतालों में पहुंच ही नहीं पाते और दम तोड़ देते हैं। डॉक्टरों के अनुसार आधे से कम लोग इलाज के लिए अस्पतालों में आते हैं।

एक लाख से अधिक कुत्ते: जम्मू और श्रीनगर शहरों में करीब एक लाख से अधिक कुत्ते हैं। इनके काटने के मामले हर साल बढ़ रहे हैं। अस्पतालों में इलाज के लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रबंध नाकाफी हैं।

राज्य में पांच साल में पचास हजार मामले सामने आए

राज्य के दो प्रमुख मेडिकल कॉलेजों से मिले आंकड़ों के अनुसार, जीएमसी अस्पताल जम्मू में पिछले पांच वर्षो में तीस हजार से अधिक मामले जानवरों के काटने के आए। इनमें से 25 हजार मरीज सिर्फ कुत्तों के काटने के हैं। शेष मरीज अन्य जानवरों के काटने के आ रहे हैं। कश्मीर में छह सालों में तीस हजार से अधिक लोगों को कुत्तों ने काटा है। अस्पतालों में आने वाले मरीजों में 70 प्रतिशत ऐसे होते हैं जिन्हें बुरी तरह से कुत्तों ने काटा होता है।

डेढ़ गुना बढ़ी इंजेक्शन की बिक्री: जम्मू संभाग में एंटी रेबीज इंजेक्शन बेचने वाले सुरेश कुमार का कहा है कि इस साल पिछले साल की अपेक्षा डेढ़ गुना अधिक इंजेक्शन बिके हैं। सात हजार के करीब इंजेक्शन अभी तक उन्होंने बेचे हैं। इंजेक्शन की लगातर कमी बनी हुई है।

रैबीज के लक्षण

  • इलाज न कराया तो कभी भी रेबीज हो सकता है। तुरंत अस्पताल पहुंचे।
  • काटने के दस दिन से लेकर छह महीनों तक सबसे अधिक खतरा रहता है।
  • मरीज को बुखार और कमजोरी महसूस हो तो डॉक्टर के पास पहुंचें।
  • रेबीज के लक्षण होने पर खाना खाने और पानी पीने में भी परेशानी आती है।
  • यह नर्वस सिस्टम को प्रभावित करता है। पैरालिसेस भी हो जाता है।

अगर कुत्ता काट ले तो यह जरूर करें

  • काटने के स्थान को साबुन से तुरंत साफ करें। इससे 80 फीसद इंफेक्शन दूर हो जाता है।
  • जख्म वाली जगह पर किसी सुई या फिर अन्य चीज का इस्तेमाल न करें।
  • तुरंत अस्पताल जाएं और वहां वैक्सीनेशन करवाएं।
  • पांच बार वैक्सीनेशन होती है। इसे जीरो, तीन, सात, 14 और 28वें दिन में बांटा गया है।
  • 24 घंटे के भीतर मरीज को सेरम भी दिया जाए।
  • सेरम देने से पहले मरीज का एलर्जी टेस्ट भी कराएं।
  • टेटनस का इंजेक्शन भी लगवाना चाहिए।
  • जो भी पीडि़त चौबीस घंटों के भीतर वैक्सीन और सेरम ले लेता है। उसमें रेबीज की आशंका नहीं रहती है। कई ऐसे मामले देखने को मिले हैं जहां लोग इलाज नहीं करवाते हैं। ऐसे लोगों को रेबीज होता है। एक बार रेबीज होने के बाद बचने की संभावना न के बराबर रहती है। इस साल जम्मू में आठ हजार मामले आए हैं। - डॉ. दिनेश कुमार, एचओडी कम्युनिटी मेडिसीन विभाग, जीएमसी जम्मू

Posted By: Rahul Sharma

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