श्रीनगर, राज्य ब्यूरो।  पुलवामा हमले की साजिश की कड़ियां जुड़ने लगी हैं। एनआइए जांच में सामने आया है कि आत्मघाती हमलावर आदिल डार ने पुलवामा के एक टिप्पर चालक के घर में वीडियो शूट किया था। इतना ही नहीं यह घर हमले से पूर्व कई जैश कमांडरों का ठिकाना रहा है और उसी घर में कई साजिशें रची गईं। ऐसे में एनआइए ने पुलवामा के हकरीपोरा निवासी टिप्पर चालक तारिक अहमद शाह व उसकी बेटी इंशा तारिक को गत मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। पिता आतंकियों को ले जाने में सहयोग करता था और बेटी ठहरने की व्यवस्था के साथ आतंकियों को सुरक्षा बलों से बचाने में मदद करती थी। इतना ही नहीं युवती 14 फरवरी 2019 तक आत्मघाती हमलावर और उसके हैंडलर से संपर्क में थी। बता दें कि पुलवामा हमले में किसी महिला की यह पहली गिरफ्तारी है। साजिश में लिप्त अब तक तीन लोग जिंदा पकड़े जा चुके हैं।

शाकिर से पूछताछ में मिले सुराग : बाप-बेटी के बारे में सुराग 28 फरवरी को पकड़े गए जैश के ओवरग्राउंड वर्कर शाकिर अहमद मागरे से पूछताछ में मिले। इसके अलावा मारे जा चुके पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद उमैर उर्फ उमर के फोन से भी कुछ सुराग मिले थे।

साजिश के खुलासे में अहम है गिरफ्तारी : श्रीनगर-जम्मू राजमार्ग पर 14 फरवरी 2019 को जैश ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमले में 40 सीआरपीएफ जवान शहीद हो गए थे। हमले की साजिश में लिप्त सभी प्रमुख आतंकी कमांडर अलग-अलग मुठभेड़ों में मारे गए थे। ऐसे में हमले की साजिश के खुलासे में जांच एजेंसी को दिक्कतें आ रही थीं। तारिक और उसकी बेटी की गिरफ्तारी को जांच में बहुत अहम माना जा रहा है। जैश के ओवरग्राउंड वर्कर शाकिर की गिरफ्तारी के बाद एनआइए के लिए यह दूसरी बड़ी कामयाबी है।

कई बार आतंकियों ने घर में ली शरण : अधिकारिक तौर पर अधिकारियों ने बाप-बेटी की गिरफ्तारी और उनसे पूछताछ की जानकारी उपलब्ध नहीं कराई है, लेकिन सूत्रों ने बताया कि तारिक के मकान में ही आत्मघाती हमलावर आदिल डार ने वीडियो शूट किया था। आदिल का यही वीडियो हमले के चंद मिनटों बाद जैश ने सोशल मीडिया पर जारी किया था। उन्होंने बताया कि तारिक के घर में वर्ष 2018 से 14 फरवरी 2019 तक जैश के आतंकियों ने करीब 15 बार शरण ली और हर बार दो से चार दिन तक जमे रहे।

अभी समीर अहमद डार बचा है : तारिक ने पूछताछ में कथित तौर पर माना है कि उसके मकान में आत्मघाती आदिल और दो पाकिस्तानी आतंकियों मोहम्मद उमैर फारूक उर्फ उमर और कामरान के अलावा समीर अहमद डार व मोहम्मद इस्माईल उर्फ इब्राहिम का ठिकाना था। इब्राहिम, आदिल, उमर और कामरान मारे जा चुके हैं। समीर अहमद डार अभी जिंदा है। जम्मू टोल पर 31 जनवरी को सुरक्षाबलों से मुठभेड़ में मारे गए तीन आतंकियों को ट्रक चालक समीर उसके पास ही पहुंचाने वाला था। ट्रक चालक समीर और जैश कमांडर समीर आपस में रिश्तेदार भी हैं।

सोशल मीडिया से संपर्क में थी इंशा : सूत्रों ने बताया कि इंशा 14 फरवरी 2019 तक आदिल और मो. उमैर के साथ सोशल मीडिया के अन्य एप्स से लगातार संपर्क में थी। एनआइए को उसके और उमर के फोन से अहम सुराग मिले। शाकिर ने भी कई अहम जानकारियां उगली हैं। आइईडी विशेषज्ञ आतंकी कमांडर मोहम्मद उमर फारूक मुठभेड़ में मारे जाने तक उससे संपर्क में था। तारिक ने कथित तौर पर कई बार आतंकियों को टिप्पर के जरिए पुलवामा में उनके ठिकानों पर पहुंचाया है।

10 दिन के रिमांड पर भेजा: पुलवामा हमले की साजिश में संलिप्तता के आरोप में पकड़े गए बाप-बेटी को एनआइए की विशेष अदालत ने मंगलवार को 10 दिन के रिमांड पर भेज दिया है। दोपहर बाद एनआइए की टीम ने इन दोनों को एनआइए की विशेष अदालत में पेश किया। विशेष जज एनआइए सुभाष चंद्र गुप्ता ने मामले और पेश किए गए तथ्यों का संज्ञान लेते हुए बाप-बेटी को दस दिन के रिमांड पर भेज दिया।

 

Posted By: Rahul Sharma

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