जम्मू-कश्मीर: कैबिनेट विस्तार के बाद उमर सरकार में कलह, मंत्री पद से चूके 11 MLA नाराज; कफन पहनकर सड़कों पर उतरे समर्थक
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस में अंतर्कलह खुलकर सामने आ गई है। नाराज विधायक प्रदर्शन ...और पढ़ें
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जम्मू-कश्मीर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला (फाइल फोटो)
HighLights
NC में उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार से अंतर्कलह
नाराज विधायक प्रदर्शन कर रहे, पार्टी छोड़ने की धमकी
फारूक अब्दुल्ला के प्रयास भी असंतोष रोकने में विफल
नवीन नवाज, श्रीनगर। नेशनल कॉन्फ्रेंस में लंबे समय से सुलग रही अंतर्कलह मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के साथ खुलकर सामने आ गई है। मंत्री पद की दौड़ में पिछड़े विधायकों की नाराजगी अब बगावत में बदलती दिख रही है।
कहीं पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी हो रही है, तो कहीं पार्टी छोड़ने और अलग रास्ता चुनने की चेतावनी दी जा रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के समर्थक सफेद कफन पहनकर प्रदर्शन कर रहे हैं और आत्मदाह की धमकी तक दे चुके हैं। हालात संभालने के लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष डा. फारूक अब्दुल्ला को खुद मैदान में उतरना पड़ा है, लेकिन उनकी मनुहार भी फिलहाल बेअसर नजर आ रही है।
पार्टी के भीतर असंतोष की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नाराज विधायकों ने फारूक अब्दुल्ला को कथित तौर पर चेताया है कि पार्टी में पहले से सांसद आगा रुहुल्ला ही नेतृत्व के लिए चुनौती बने हुए हैं, अब और भी 'आगा रुहुल्ला’ बनने को तैयार हैं। यह टिप्पणी महज नाराजगी का इजहार नहीं, बल्कि पार्टी नेतृत्व के सामने उभरती राजनीतिक संकट का संकेत भी है।
दरअसल, मुख्यमंत्री उमर ने मंगलवार को परिवहन मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाकर चार नए मंत्रियों को शामिल किया है। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के प्रविधानों के तहत 90 सदस्यीय विधानसभा वाले प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ सदस्यीय मंत्रिपरिषद हो सकती है।
ऐसे में डेढ़ दर्जन दावेदारों में से केवल चार को मौका मिलने से बाकी नेताओं की उम्मीदों पर पानी फिर गया। मंत्री पद से वंचित 11 विधायक शपथ ग्रहण समारोह से नदारद रहे, जबकि कुछ ने पहुंचकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।
पार्टी नेतृत्व और मुख्यमंत्री के करीबियों के खिलाफ नारेबाजी ने साफ कर दिया कि असंतोष केवल मंत्रिमंडल में जगह न मिलने तक सीमित नहीं है। कई वरिष्ठ नेता फैसले लेने की प्रक्रिया में अपनी अनदेखी से भी खफा हैं।
विधायकों की बढ़ रही नाराजगी
- मुबारक गुल को मनाने के लिए फारूक ने उन्हें संगठन का महासचिव बनाने की पेशकश की, लेकिन इससे भी विवाद नहीं थमा। गुल ने कहा कि उनके समर्थक संतुष्ट नहीं हैं और उनसे इस्तीफा देने को कह रहे हैं। मंगलवार से शुरू हुआ प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। समर्थकों ने कफन पहनकर नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी की और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। गुल ने चार नवंबर को अपना रुख स्पष्ट करने की बात कही है।
- पूर्व मंत्री नजीर अहमद गुरेजी को भी फारूक ने फोन कर मनाने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर सफलता नहीं मिली। गुरेजी ने भी अलग रास्ता चुनने की चेतावनी दी है।
- अब्दुल मजीद लारमी ने अपनी वरिष्ठता की अनदेखी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब उनके लिए अपने क्षेत्र में लोगों का सामना करना मुश्किल हो गया है।
- पुंछ के विधायक एजाज जान और अर्जुन सिंह राजू भी उपेक्षा से नाखुश हैं। एजाज जान ने पहाड़ी समुदाय की अनदेखी का आरोप लगाते हुए कहा कि उनके परिवार ने पार्टी के लिए लंबा संघर्ष किया, फिर भी उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।
पार्टी में उमर और उनके कुछ करीबी ही लेते हैं फैसले
उत्तरी कश्मीर के एक विधायक ने आरोप लगाया कि पार्टी में फैसले उमर और उनके कुछ करीबी ही लेते हैं। इससे वरिष्ठ नेताओं और विधायकों में उपेक्षा की भावना बढ़ी है और वे विकल्प तलाशने लगे हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस छोड़ चुके पूर्व विधायक सैयद मोहम्मद अखून ने कहा कि पार्टी में वफादारी और आंतरिक लोकतंत्र की अनदेखी के कारण उन्हें अलग होना पड़ा था। उन्होंने दावा किया कि नेतृत्व को पहले ही आगाह किया गया था कि कुछ लोगों का दबदबा बढ़ रहा है, लेकिन शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
पार्टी नेतृत्व को भी नहीं था इतने विरोध का अंदाजा
पार्टी नेतृत्व अब संगठनात्मक फेरबदल और अहम जिम्मेदारियों का भरोसा देकर असंतुष्टों को साधने में जुटा है। फारूक और वरिष्ठ नेता अब्दुल रहीम राथर कई विधायकों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन फिलहाल नाराजगी कम होने के संकेत नहीं हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार से कुछ असंतोष की आशंका थी, लेकिन विरोध इस स्तर तक पहुंच जाएगा, इसका अंदाजा नहीं था।
राजनीतिक संकट बन सकता है मंत्रिमंडल विस्तार
राजनीतिक मामलों के जानकार बिलाल बशीर ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस अब पहले जैसी मजबूत नहीं रही है। यह मंत्रिमंडल विस्तार के बाद हुए हंगामे से स्पष्ट हो गया है। बगावती सुर अपना चुके सांसद आगा रुहुल्ला पहले ही नेतृत्व के लिए असहज चुनौती बन चुके हैं। यदि असंतुष्ट विधायक भी उसी राह पर बढ़े, तो मंत्रिमंडल विस्तार उमर सरकार के लिए राजनीतिक संकट साबित हो सकता है।
