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कभी बादल फटने से तबाही, कभी किशनगंगा नदी का खौफ; कश्मीर के गुरेज-तुलैल घाटी के गांवों को बचाने के लिए बड़ा प्लान

Published: Thu, 29 Oct 2026 07:00 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर की गुरेज और तुलैल घाटियों में किशनगंगा नदी के कारण हर साल आने वाली बाढ़ से गांवों को भारी ...और पढ़ें

अब गुरेज-तुलैल के गांवों के लिए बनेगा सुरक्षा कवच। (फाइल फोटो)

अब गुरेज-तुलैल के गांवों के लिए बनेगा सुरक्षा कवच। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. गुरेज, तुलैल में किशनगंगा नदी से बाढ़ का खतरा।

  2. विधायक की मांग पर सरकार ने लिया एक्शन।

  3. ₹11 करोड़ से अधिक की बाढ़ सुरक्षा योजना।

राहुल शर्मा, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की उत्तरी सीमा, जहां हिंदुस्तान का आखिरी गांव बसता है, वहां आज भी लोग एक ही डर के साथ जीते हैं कि कहीं किशनगंगा नदी फिर से उफान पर न आ जाए। गुरेज और तुलैल घाटी के ज्यादातर गांव इसी नदी के बिल्कुल किनारे बसे हैं। बरसात आते ही नदी का पानी गांवों में घुस जाता है। घर टूट जाते हैं, जमीन बह जाती है और लोगों की सालों की कमाई एक रात में खत्म हो जाती है।

पिछले दो साल की घटनाएं खुद इस खतरे को दर्शाती हैं। यही नहीं सरकार द्वारा हाल ही में किए गए सर्वे में भी यह बात सामने आई है कि गुरेज घाटी का भूगोल ही ऐसा है कि हर गांव के साथ एक नाला जुड़ा है, जो पहाड़ों का पानी सीधा किशनगंगा में लाता है।

तुलैल के तरतई किलो गांव में इसी वर्ष जून 2026 में भारी बादल फटने से दर्जनों रिहायशी घरों को नुकसान पहुंचा और सैकड़ों एकड़ खेती की जमीन डूब गई थी। उसके अगले माह जुलाई 2026 में जेडगै गांव तुलैल और अचूरा गांव गुरेज में एक साथ बादल फटे, जिससे कई घरों और खेती की जमीन को नुकसान पहुंचा और प्रशासन को नदी किनारे से टेंट और पर्यटकों को हटाने की एडवाइजरी जारी करनी पड़ी।

जादिगाय तुलैल में बादल फटने से मची थी दहशत

इसे पिछले वर्ष मार्च 2025 में बारनोई तुलैल गांव में बर्फबारी के साथ आई अचानक बाढ़ ने 14 घरों को तबाह कर दिया था। यही नहीं 30 अगस्त 2025 को जादिगाय तुलैल में बादल फटने से पूरा गांव दहशत में आ गया था, स्थानीय नाले में अचानक पानी बढ़ गया था। प्रशासन ने माना था कि जादगै गांव जाने वाली सड़क आंशिक रूप से बह गई थी।

इतना ही नहीं, घाटी में बना 330 मेगावाट का किशनगंगा जलविद्युत प्रोजेक्ट भी खतरे को बढ़ा रहा है, जो कम से कम तीन गांवों को डुबो देगा और कई और गांवों को बाढ़ के और बड़े खतरे में डाल देगा।

सरकार ने बनाया एक्शन प्लान

गुरेज विधायक नजीर अहमद खान गुरेजी ने जोरशोर के साथ एलओसी से सटे और किशनगंगा पर बसे इन गावाें की समस्याओं को सरकार के समझ उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर जल्द ही सरकार ने बाढ़ के इस खतरे को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए तो ये गांव समाप्त हो जाएंगे।

इसी का नतीजा रहा कि सरकार ने लोगों को तुरंत राहत देने के लिए दो जगहों पर बाढ़ से बचाव के काम शुरू कर दिए गए हैं। इन पर कुल 154 लाख 24 हजार रुपये खर्च होंगे।

पहला काम तुलैल घाटी में 96 लाख 44 हजार का: गुजरान नाला, हुसनगाम मलंगाम नाले, किशनगंगा नदी, छोटा-बड्डा नाला, सरडाब, दुकरान, शेखपुरा और तुलैल में जदगै नाले के पास नदी के 3 किलोमीटर से 40 किलोमीटर के बीच करीब 1585 मीटर लंबी सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। इसमें पत्थर भरकर लोहे की जालियां लगाई जाएंगी और नदी के बहाव को सही रास्ते पर लाया जाएगा।

दूसरा काम गुरेज और बागटोर में 57 लाख 80 हजार का : पलोट नाला चोरवान, बुर्जुल्ला नाला अचूरा, बागटोर नाला और बागटोर में किशनगंगा नदी के किनारे 60 किलोमीटर से 80 किलोमीटर के बीच करीब 478 मीटर तक यही सुरक्षा काम किया जाएगा।

अब 9 करोड़ से ज्यादा का बड़ा सुरक्षा कवच बनेगा

सरकार यहीं नहीं रुकी है। आने वाले समय में बाढ़ को हमेशा के लिए रोकने के लिए एक बहुत बड़ा खाका तैयार किया गया है। किशनगंगा और उससे जुड़ने वाले सभी नालों के दोनों किनारों को पक्का करने के लिए 9.48 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना बनाई गई है। इस योजना का पूरा ब्यौरा वित्त विभाग को भेज दिया गया है।

इस बड़ी योजना में नदी के सबसे खतरनाक और कमजोर जगहों को चुना गया है। वहां पत्थर की जालियां, पानी का बहाव रोकने वाले ठोकर और पानी को रोकने वाले छोटे-छोटे बांध बनाए जाएंगे, ताकि गांव पूरी तरह सुरक्षित रह सकें।

कुल मिलाकर सरकार ने गुरेज-तुलैल के लिए 11 करोड़ 2 लाख रुपये से ज्यादा की बाढ़ सुरक्षा योजना का रास्ता खोल दिया है। यह उन गांवों के लिए बड़ी उम्मीद है जो देश की सीमा पर रहकर हर साल कुदरत के कहर से लड़ते हैं।