जम्मू, रोहित जंडियाल। स्वास्थ्य विभाग की एम्बुलेंस बिना इंश्योरेंस के मरीजों को अस्पतालों तक पहुंचा रही हैं। जम्मू संभाग में सौ से अधिक ऐसी एंबुलेंस हैं, जिनका इंश्योरेंस तो दूर वाहन नंबर भी नहीं है। ये सिर्फ चेसिस नंबर से ही दौड़ रही हैं। पुलिस और ट्रैफिक विभाग बेशक ट्रैफिक नियमों को सख्ती से लागू कर हर दिन सैकड़ों लोगों का चालान कर रहा हो, लेकिन आश्चर्यजनक तथ्य है कि यहां पर चलने वाली अधिकांश एम्बुलेंसों का इंश्योरेंस ही नहीं है। 15 से 20 फीसद एम्बुलेंस बिना नंबर के चल रही हैं। कुछ ऐसी भी हैं, जिनकी हालत खस्ता है और यह 20 से 30 साल पुरानी हैं। इन्हें चला रहे ड्राइवर और क्लीनर भी इस पर चिंता जता चुके हैं।

जम्मू संभाग में इस समय साढ़े छह सौ से अधिक एम्बुलेंस दौड़ रही हैं। इनमें सौ से अधिक में वर्षों से नंबर ही नहीं लगे हैं। यह सिर्फ चेसिस नंबर से ही दौड़ रही हैं। स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू से लेकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और खंड ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी तक के कार्यालयों में बिना नंबर के एम्बुलेंस अटैच हैं।

स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू में ही हर समय ऐसी कई एम्बुलेंस लगी रहती हैं। नियमों के अनुसार बिना नंबर के अधिकतम तीन महीने से अधिक गाड़ी नहीं चला सकते हैं, लेकिन यहां पर कई ऐसी एम्बुलेंस हैं जिन पर नंबर कभी लगाए ही नहीं गए। स्वास्थ्य विभाग समेत चिकित्सा शिक्षा विभाग का हाल भी ऐसा ही है। उनमें भी कई एम्बुलेंस ऐसी हैं, जहां नंबर नहीं लगाए गए हैं।

10 फीसद का इंश्योरेंस भी नहीं: जम्मू संभाग में चल रही एम्बुलेंसों में से 10 फीसद का भी इंश्योरेंस नहीं है। सिर्फ उन्हीं गाड़ियों और एम्बुलेंसों का इंश्योरेंस हैं जो अधिकारियों के साथ चलती हैं। इस कारण अगर कोई भी एम्बुलेंस दुर्घटनाग्रस्त हो जाती है तो इसका पूरा खर्च स्वास्थ्य विभाग को ही उठाना पड़ता है। कई बार इन्हें चला रहे ड्राइवर का वेतन तक रोक दिया जाता है। जबकि नियमों के अनुसार गाडिय़ों का इंश्योरेंस न होने के कारण पांच हजार से अधिक का जुर्माना करने का प्रावधान है।

फंड के अभाव में कई एम्बुलेंसों का नहीं हुआ इंश्योरेंस

ट्रैफिक विभाग ने कुछ दिन पहले बिना नंबर के चल रही एक एम्बुलेंस को जब्त किया था। इसके बाद अधिकारियों के बीच में पडऩे पर इसे छोड़ा गया। इसका न तो नंबर था और न ही इंश्योरेंस था। स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर डॉ. समीर मट्टू से तो बात नहीं हो सकी, लेकिन एक अधिकारी ने बताया कि फंड के अभाव में कई एम्बुलेंसों का इंश्योरेंस नहीं हुआ।

कई बार अधिकारियों को लिखा गया

स्टेट हेल्थ ट्रांसपोर्ट आर्गनाइजेशन में ड्राइवर और क्लीनर यूनियन के प्रधान जितेंद्र सिंह का कहना है कि एम्बुलेंस के नंबर और इंश्योरेंस न होने का मुद्दा कई बार विभाग के अधिकारियों के समक्ष उठाया गया, लेकिन इसका समाधान नहीं हो सका। कई बार दुर्घटना होने पर ड्राइवर को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है और उनका वेतन रोक दिया जाता है।

स्वास्थ्य विभाग ने किया है आवेदन 

जम्मू के आरटीओ धनंतर सिंह का कहना है कि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग ने एम्बुलेंसों में नंबर लगाने के लिए आवेदन किया है। पूरी प्रक्रिया के बाद ही अब नंबर लगाए जाएंगे।

Posted By: Rahul Sharma

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