जागरण संवाददाता, जम्मू: कश्मीर के गांदरबल जिले के तुलमुला में स्थित माता राघेन्या (क्षीर भवानी) के दर्शन के लिए 3500 से ज्यादा कश्मीरी पंडित श्रद्धालु रविवार को जम्मू से रवाना हो गए। जम्मू के डिवीजन कमिश्नर संजीव वर्मा ने सुबह नगरोटा में श्रद्धालुओं के इस जत्थे को झंडी दिखाकर रवाना किया। जय मां राघेन्या का जयघोष करते हुए यह श्रद्धालु कड़ी सुरक्षा के बीच यात्रा के लिए आगे बढ़ गए। जम्मू से कुल 82 बसें इस यात्रा पर गई और दो बसें ऊधमपुर मार्ग से जुड़ गई, जबकि दिल्ली से आई चार बसें भी क्षीर भवानी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं को लेकर निकली हैं। ये श्रद्धालु तुलमुला में सोमवार को ज्येष्ठ अष्टमी के दिन माता क्षीर भवानी के दर्शन करेंगे। पवित्र मंदिर में पहुंच कर कश्मीरी पंडित दूध और फूल का प्रसाद चढ़ाकर सुख व समृद्धि की कामना करेंगे।

30 साल के विस्थापन के बाद कश्मीरी पंडित घर वापसी के लिए माता से प्रार्थना करेंगे। इसके बाद वे तुलमुला में लगने वाले क्षीर भवानी मेले में शरीक होंगे। यात्रा के जत्थे में रवाना होने वाले कश्मीरी पंडितों में बहुत उत्साह दिखा। घाटी जाने वालों में बच्चे और महिलाएं भी शामिल रहे। कई कश्मीरी ऐसे थे, जो विस्थापन के बाद घाटी गए ही नहीं, लेकिन मां क्षीर भवानी ने उनको कश्मीर में दर्शन के लिए बुला ही लिया। क्षीर भवानी के लिए रवाना होने से पूर्व कश्मीरी पंडितों ने नाच गाकर मां राघेन्या की अराधना की और मां के नाम के जयकारे लगाए। इस मौके पर डिवीजनल कमिश्नर जम्मू संजीव वर्मा ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं और मंगलमय यात्रा की कामना की। इस दौरान रिलीफ कमिश्नर टीके भट्ट, डिप्टी कमिश्नर रमेश कुमार आदि उपस्थित रहे। कुछ श्रद्धालु कुपवाड़ा स्थित मां क्षीर भवानी के दर्शन के लिए भी निकले हैं। तुलमुला में मां क्षीर भवानी के दर्शन के लिए दिल्ली से आई डोली भान ने कहा कि बीते तीस साल बाद वह कश्मीर फिर से जा रही हैं। उन्हें सुखद अहसास हो रहा है कि वे उस भूमि पर जा रही हैं, जहां उसने जन्म लिया।

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आज लगेगा जम्मू में मेला

1990 में कश्मीर घाटी से यहां आने वाले कश्मीरी पंडितों ने तुलमुला स्थित क्षीर भवानी मंदिर की तरह ही जम्मू के भवानी नगर में हूबहू मंदिर बनवाया। मंदिर परिसर में हर साल ज्येष्ठ अष्टमी पर मेला लगता है। माना जाता है कि ज्येष्ठ अष्टमी पर मां राघेन्या का अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन मेला लगता है। कश्मीरी पंडित इस दिन मंदिर में पहुंच कर मां राघेन्या की पूजा-अर्चना करते हैं व सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई परिवारों की मां राघेन्या कुल देवी भी हैं। यूथ आल इंडिया कश्मीरी समाज के संयोजक अजय सफाया का कहना है कि जो लोग मां के दर्शन के लिए तुलमुला नहीं जा सकते, वे जम्मू के क्षीर भवानी मंदिर में पहुंच कर पूजा-अर्चना करते हैं। क्षीर भवानी मेले के अवसर पर राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य के लोगों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि यह त्योहार एकता, भाईचारा व सद्भाव का प्रतीक है।

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क्यों कहते हैं मां क्षीर भवानी

मां राघेन्या की मां क्षीर भवानी के रूप में वादी में पूजा-अर्चना की भी अलग कथा है। कहा जाता है कि एक पुजारी ने नौका में सवार कर मां को तुलमुला पहुंचाया। श्रद्धालुओं ने मां से गुहार लगाई कि वे रोज भोग नहीं लगा पाते हैं, इसलिए कोई उपाय बताएं। तब मां ने कहा कि वे उन्हें दूध, शक्कर का भोग लगा सकते हैं। इसलिए पंडित समुदाय दूध व चावल की खीर बना कर भोग लगाते हैं। तभी से मां राघेन्या क्षीर भवानी के नाम से कश्मीर में प्रसिद्ध हुई।

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Posted By: Jagran

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