ऊधमपुर, अमित माही : हाल ही में हुई प्री-मानसून वर्षा ने जिस तरह जम्मू-श्रीनगर हाईवे को ढाई दिनों तक के लिए बाधित किया है, उससे यह तो साफ है कि मानसून के साथ ही शुरू हो रही अमरनाथ यात्रा न तो निर्माण व अन्य एजेंसियों के लिए आसान होगी और न ही अमरनाथ यात्रियों के लिए। रामबन जिला में रामबन से बनिहाल के बीच के 45 किलोमीटर अमरनाथ यात्रियों के साथ प्रशासन, पुलिस और निर्माण एजेंसियों सहित सबके लिए सबसे ज्यादा चुनौती भरे होंगे।

ऊधमपुर में तोल्डी नाला में देवाल पुल के पास भूस्खलन प्रभावित हिस्सा भी बड़ी समस्या बन सकता है। हाल ही प्री-मानसून वर्षा के दौरान ऊधमपुर के तोल्डी नाला से लेकर बनिहाल के बीच 33 से अधिक स्थानों पर भूस्खलन हुआ। इनमें से आधा दर्जन जगहें ऐसी थी, जिनको खोलने में 30 घंटों से ज्यादा कम समय लग गया। जबकि तोल्डी नाला के पास गिरे मलबे और चट्टानों को हटाने में ढाई का वक्त लगा। वहीं निर्माण एजेंसियां और जिला प्रशासन भी इसे चुनौती तो मान रहा है और इसे निपटने में खुद को सक्षम बताते हुए स्थिति पूर्व वर्षों से कई ज्यादा बेहतर होने का दावा भी कर रहा है।

इस बार अमरनाथ यात्रा 30 जून से आरंभ हो रही है। कोरोना संकट काल की वजह से दो वर्षों तक स्थगित रहने के बाद शुरू हो रही इस यात्रा को लेकर इस बार भक्तों में जबरदस्त उत्साह है, जिसके चलते यात्रा में पहले से कई ज्यादा अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। इसे लेकर प्रदेश प्रशासन भी व्यापाक तैयारियों मे जुटा है। जिसके बाबा बर्फानी के दर्शनों को आने वाले भक्तों को किसी तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़ा। मगर इन सबके बावजूद मॉनसून अमनराथ यात्रा के सुचारू संचालन में बड़ी चुनौती साबित होगा।

इसका ट्रेलर हाल ही में हुई प्री-मानसून वर्षा के दौरान देखने को मिला है। वर्षा की वजह से जम्मू श्रीनगर हाईवे पर जगह जगह हुए भूस्खलन ने हाईवे को इस तरह से बाधित कर दिया कि दिन रात लगातार मेहनत के बावजूद खोलने में 57 घंटों का समय लगा। ऐसे में मानसून और अमरनाथ यात्रा के एक साथ शुरु होना अमरनाथ यात्रियों के साथ निर्माण एजेसियों, ऊधमपुर रामबन जिला प्रशासन, पुलिस व अन्य एजेंसियों के लिए चुनौतियों और परेशानी भरा रहने वाला साबित होगा।

हालांकि ऊधमपुर में देवाल पुल के पास खिसकी पहाड़ी एकमात्र सबसे बड़ी समस्या वाला इलाका है। हाल में इसी जगह पर भारी भूस्खलन की वजह से बंद हाईवे 57 घंटों की मेहनत के बाद खुल पाया। सबसे ज्यादा भूस्खलन, कीचड़ युक्त मलबा और पहाड़ से पत्थर गिरने वाले संभावित स्थल रामबन जिला है। यह भी ज्यादातर रामबन से बनिहाल के बीच लगभग 45 किलोमीटर यात्रा मार्ग पर है। जिस वजह से रामबन जिला में पड़ते कुल यात्रा मार्ग में से 45 किलोमीटर यात्रा मार्ग बाबा बर्फानी के भक्तों की राह को रोक कर उनको के साथ रामबन जिला प्रशासन के साथ निर्माण एजेंसियों की परेशानी का सबब भी बन सकता है।

हाल ही हुई बारिश में रामबन जिला में 30 जगहों पर भूस्खलन, पहाड़ से पत्थर, मलबा और कीचड़ युक्त मलबा आने से हाईवे बाधित हुआ, जिसमें 26 जगहों पर पत्थर और मलबा हटा कर रात तक खोल दिया गया। मगर आधा दर्जन से ज्यादा जगहों पर मलबा हटा कर उसे खोलने में 30 से 35 घंटों का वक्त लगा। अगल प्री-मानसून वर्षा के दौरान मंगलवार से बुधवार सुबह तक एक ही दिन की बारिश हाईवे का ऐसा हाल कर सकती है तो मानसून के दौरान क्या हाल होगा, इसकी कल्पना की जा सकती है। वैसे भी यात्रा के साथ ही मानसून भी शुरु हो रहा है और शुरु होने के साथ अच्छी वर्षा का पूर्वानुमान जताया जा रहा है। हाइवे के स्थिति को देखते हुए यह चुनौती, चिंता और परेशानी का विषय है।

देवाल पुल खिसक पहाड़ी भी आ सकती है नीचे : देवाल पुलि के पास हुए भारी भूस्खलन के दौरान पहाड़ी का बड़ा हिस्सा कई फीट नीचे खिसक चुका है। हालांकि फिलहाल यह चुका हुआ है। मगर यह चंद दिनों हफ्तों या महीनों में कभी भी खिसक सकता है और टिका भी रह सकता है। खिसका पहाह़ी का हिस्सा होने वाली बरसात की मात्रा, पहाड़ों के अंदर होने वाली हलचल या भूगर्भीय स्थिति पर निर्भर करेगा। यदि मॉनसून में हुई वर्षा के दौरान यह पहाड़ी खिसक कर नीचे आई, तो हाईवे एक बार फिर से कुछ घंटों से लेकर कई दिनों तक बंद हो सकता है। क्योंकि इस पहाड़ में मिट्टी कम और बड़ी चट्टानें और पत्थर अधिक हैं।

चुनौती पूर्ण तो है मगर निपटने में सक्षम और पूरी तरह तैयार है प्रशासन : रामबन के डीसी मस्सरत इसलाम ने कहा जिला में तकरीबन 66 किलोमीटर यात्रा मार्ग स्थित है। इसमें से नाशरी से लेकर रामबन तक मार्ग पूरी तरह ठीक है। रामबन से बनिहाल तक मार्ग भूस्खलन संभावित और पत्थर गिरने वाले इलाकों से गुजरता है। जिस वजह से इस हिस्से में यह चुनौती पूर्ण है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान 30 जगहों पर भूस्खलन हुआ था उसमें से अधिक इसी हिस्से में थी। इतने दिन की बारिश के बाद हाईवे बंद होना बताता है कि हाईवे की स्थिति पहले से कितनी ज्यादा बेहतर है।

मगर जिला प्रशासन अमरनाथ यात्रा के सुचारु संचालन के लिए सभी चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार है। हाल ही में हुई बारिश से जिन इलाकों में हाईवे बंद हुआ वहां पर हुई समस्या के मुताबिक निर्माण एजेंसी व अन्य एजेंसियों को सुरक्षात्मक उपाय करने को कहा गया है, जिससे की हाईवे को सुचारू रखा जा सके। जिला प्रशासन और निर्माण व अन्य एजेंसियां हाईवे को खुला रखने के लिए पूरी तरह से सक्षम और तैयार है। आपात स्थिति में अमरनाथ यात्रियों को ठहराने किए जिला में व्यापक इंतजाम किए गए हैं।

तोल्डी में खिसकी पहाड़ी से फिर भूस्खलन का खतरा : गैमन इंडिया लिमिटेड के डीजीएम ने कहा कि हाल ही में हुई वर्षा की वजह से देवाल इलाके में भारी भूस्खलन हुआ, जिससे तकरीबन 15 से 20 हजार क्यूबिक मीटर मलबा हाईवे पर गिरा। मलबा ज्यादा नहीं था, मगर इसमें मौजूद विशाल चट्टानों ने काम की रफ्तार को धीमा किया। भूस्खलन के दौरान पहाड़ी का बड़ा खिसका जरूर है। यह बरसात में नीचे आएगा या नहीं इसके बारे अभी स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता। मगर अब ढलान काफी ज्यादा बन गई है, जिससे अगल यह नीचे आता भी है तो हाइवे को शायद बाधित न कर पाए। यदि यह बाधित करेगा तो भी मशीनों से मलबा हटा कर खोल दिया जाएगा।

इस बार रामबन में 30 के करीब जगहों पर भूस्खलन जरूर हुआ, मगर ज्यादातर जगहों पर थोड़ा बहुत ही मलबा गिरा था। बैटरी चश्मा, मारोग, सीता राम पस्सी, केला मोड़ सहित आधा दर्जन भर जगहें ही ज्यादा समस्या मूलक रही है। इनका संज्ञान लेकर उसी के मुताबिक कदम उठा जा रहे हैं। वैसे भी हाईवे की स्थिति पूर्व वर्ष कों की तुलना में काफी बेहतर है। कुछ किलोमीटर के हिस्सों में ही समस्या है। मगर कंपनी हाईवे को यात्रा के दौरान खुला रखने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।

भूस्खलन प्रभावित इलाके : ऊधमपुर जिले में देवाल पुल तोल्ड़ी नाला, धर्मथल डिगी पुली। रामबन जिले में प्रभावित इलाकों में शारिका माता मंदिर, नाशरी, डलवास, पीड़ा पुल, कुंडी नाला, त्रिशूल मोड़, चंबा सेरी, अनोखी फाल, डिगडोल, गुज्जर मोड़, खूनी नाला, गांगरू, वागन, शेर बीबी, चमलवास, रामपैडी, रतनबास, कुनफर नाला, सीता राम पस्सी, मारोग, मोम पस्सी, डुग्गी पुली, कुंडी नाला, मिहाड़, कैफेटेरिया मोड़, सेरी, सलाड, शान पैलेस, टी-2, केला मोड़, बैटरी चश्मा, पंतिहाल स्टील टनल और टी-5 शामिल हैं।

Edited By: Lokesh Chandra Mishra