जम्मू, विकास अबरोल। जम्मू-कश्मीर की आरुषि कोतवाल के नाम से आज कौन परिचित नहीं होगा। प्रदेश के खेल जगत में यह एक ऐसा चर्चित नाम है जिसके कारनामों और प्रतिभा से प्रभावित होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला है। आरुषि कोतवाल को यह पुरस्कार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल तरीके से बाल पुरस्कार दिया गया है।

17 वर्षीय आरुषि कोतवाल चेस खेल में प्रदेश की पहली महिला मास्टर बनने वाली एकमात्र खिलाड़ी हैं। आरुषि अब तक न सिर्फ आठ बार स्टेट चैंपियन रह चुकी हैं बल्कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा से सबको कायल कर चुकी हैं। आरुषि को कामनवेल्थ चेस प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिल चुका है।

वर्ष 2016 में स्टेट अवार्ड से हो चुकी हैं सम्मानित

आरुषि कोतवाल की तमन्ना है कि वह एक दिन भारत का चेस खेल में प्रतिनिधित्व करते हुए शह और मात के खेल में वर्ल्ड चैंपियन बनकर ग्रैंड मास्टर का खिताब हासिल करने में कामयाब रहे। हालांकि पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर की तत्कालीन सरकारों की ओर से उन्हें विशेष प्रोत्साहन नहीं मिला है लेकिन परिवार और जम्मू-कश्मीर चेस एसोसिएशन द्वारा किए गए सहयोग से वह काफी खुश हैं।

2014 में मिल चुका है शेर-ए-कश्मीर अवार्ड

आरुषि के खेल से प्रभावित होकर उन्हें वर्ष 2011-12 के लिए वर्ष 2014 को शेर-ए-कश्मीर अवार्ड के लिए भी सम्मानित किया जा चुका है।

उमर अब्दुल्ला ने 50 हजर रूपये का दिया था इनाम

आरुषि को आज भी वह यादगार क्षण याद है जब पूर्ववर्ती राज्य जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उन्हें एशियन चेस प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतने पर 50 हजार रुपये की राशि देकर सम्मानित किया था।

दूसरी कक्षा में पढ़ते हुए चेस खेलना किया था शुरू

दूसरी कक्षा में पढ़ते हुए आरुषि ने चेस खेलना शुरू किया और पहली बार अंडर-7 आयुवर्ग में पहला और अंडर-9 आयुवर्ग में दूसरा स्थान हासिल किया। आरुषि ने चेस खेल की शुरुआत पहले अपने घर से शुरू की और फिर एक दिन घर के सभी सदस्यों को हराते-हराते आज देश के खिलाड़ियों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। इसी का नतीजा है कि वह अब तक कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लेकर अपनी प्रतिभा साबित कर चुकी है।

आरुषि ने नई दिल्ली में आयोजित एशियन स्कूल चेस प्रतियोगिता में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीता। इसके अलावा ताशकंद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में भी भाग लेकर राज्य और देश का नाम रोशन कर चुकी है। वर्ष 2018 के जुलाई महीने में श्रीलंका में आयोजित 14वीं एशियन स्कूल चेस प्रतियोगिता में 16 देशों से 454 खिलाड़ियों ने चार अलग-अलग आयु वर्गो के लड़कों एवं लड़कियों के वर्ग में भाग लिया था। इसमें लड़कियों के अंडर-17 आयुवर्ग में आरुषि कोतवाल अपने प्रतिद्वंद्वियों को मात देकर रजत पदक जीतने में कामयाब रहीं थी।

दो बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग नहीं ले पाई

आरुषि का कहना है कि अब तो प्रदेश में खेल नीति बन गई है लेकिन पहले खेल नहीं होने की वजह से वह दो बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने से वंचित रह गई थी।

बड़ी बहन आकृति भी हैं अंतरराष्ट्रीय चेस खिलाड़ी

आरुषि की बड़ी बहन आकृति कोतवाल भी अंतरराष्ट्रीय चेस खिलाड़ी हैं। वह दो बार अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं। हालांकि अब आकृति का अपना पूरा ध्यान पढ़ाई में है। वह भी अपनी छोटी बहन के इस उपलब्धि को लेकर काफी खुश हैं।

होनदार दो बेटियों का मां-बाप होने पर गर्व

आरुषि कोतवाल के मां-बाप अपनी बेटी के इस उपलब्धि को लेकर काफी उत्साहित हैं। पिता अनिल कोतवाल और मां सुलक्षणा का कहना है कि आज का दिन उनके जीवन का यादगार क्षण हैं। उनकी बेटियों के नाम से आज उन्हें समूचा देश पहचानता है।

आरुषि की प्रधानमंत्री से मिलने की तमन्ना

आरुषि कोतवाल को भले ही आज वर्चुअल तरीके से राष्ट्रीय बाल पुरस्कार मिला है लेकिन उनकी तमन्ना है कि जल्द उनकी प्रधानमंत्री मोदी जी से मुलाकात हो। 17 वर्षीय आरुषि ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता और बड़ी बहन आकृति को दिया है। उन्होंने कहा कि आज वह सफलता के जिस मुकाम पर हैं उसका श्रेय उनके परिजनों और चेस एसोसिएशन को जाता है। आरुषि इस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीए आनर्स की पढ़ाई कर रही हैं।

जम्मू के डीसी ने भी दी बधाई

जम्मू के डीसी अंशुल गर्ग ने भी आरुषि कोतवाल को इस उपलब्धि के लिए मुबारकबाद दी है। डीसी कार्यालय में आज वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से राष्ट्रीय बाल पुरस्कार हासिल किया।

Edited By: Vikas Abrol