श्रीनगर, जेएनएन: अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी की मौत के सात दिन बाद आखिरकार ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस को नया चेयरमैन मिल गया है। कट्टरवादी मर्सरत आलम भट को हुर्रियत का नया चेयरमैन बनाया गया है। हुर्रियत में इसी के साथ और भी कई बदलाव किए गए हैं। नए चेयरमैन मर्सरत आलम मुस्लिम लिग के साथ संबंधित हैं। पचास वर्षीय आलम इस समय तिहाड़ जेल में कैद हैं।

गिलानी की मौत के बाद से ही नए चेयरमैन को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। कई बड़े हुर्रियत नेता चेयरमैन का पद संभालने को लेकर तैयार नजर नहीं आ रहे थे। अलगाववादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों की सख्ती के बाद से ही हुर्रियत का बोलबाला अब कश्मीर में न के बराबर ही नजर आता है। ऐसे में यह भी आशंका जताई जा रही थी कि गिलानी की मौत के साथ ही हुर्रियत का वजूद लगभग खत्म हो जाएगा। 

लेकिन अब साल 2008 और 2010 में हुए हिंसक प्रदर्शनों के सूत्रधार कहे जाने वाले कट्टरपंथी मर्सरत आलम को हुर्रियत की कमान सौंप कर फिर से अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। आलम को 17 अप्रैल 2015 को जेल में बंद किया गया था। उनके अभी जेल से रिहा होने की उम्मीद नहीं है। यही नहीं मर्सरत आलम को बहुत से मुस्लिम संगठन भी पसंद नहीं करते हैं। वहीं हुर्रियत ने शब्बीर अहमद शाह और गुलाम अहमद गुलजार को हुर्रियत का नया वाइस चेयरमैन नियुक्त किया है।

मौलवी बशीर अहमद इरफानी पहले की तरह ही महासचिव के पद पर बने रहेंगे। हुर्रियत की सभी समितियां वाइस चेयरमैन गुलाम अहमद गुलजार के दिशानिर्देशों पर काम करेंगी। यह आंतरिम प्रबंध हुर्रियत के सविधान के अनुसार चुनाव होने तक किया गया है। हुर्रियत की ओर से दावा किया गया है कि जैसे ही हालत में सुधार होगा, चुनाव करवाया जाएगा।

Edited By: Rahul Sharma