जागरण संवाददाता, जम्मू : मचैल माता को श्राइन बोर्ड बनाने संबंधी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले एडवोकेट आदित्य शर्मा और फैज-उल-आरिफ ने मंगलवार को बताया कि कोर्ट ने राज्य सरकार को छह सप्ताह के भीतर जवाब देने के लिए कहा है। धार्मिक स्थल पर विकास के नाम पर हुई धांधलियों की जांच के लिए विशेष टीम गठित की मांग पर कोर्ट ने मंदिर प्रबंधन से खर्च की विस्तृत जानकारी देने को भी कहा है।

एडवोकेट आदित्य ने बताया कि इस साल भी दो लाख के करीब श्रद्धालुओं ने मचैल माता के दरबार में हाजिरी दी। हर साल श्रद्धालुओं की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। राज्य व देश के कोने-कोने से श्रद्धालु माता के दरबार में करोड़ों रुपये की भेंट अर्पित करते हैं। जिसकी मंदिर प्रबंधन ने कोई लेखाजोखा नहीं रखा है। सरकार ने भी इसका कोई ऑडिट या भेंट पर कोई जांच नहीं रखी है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में यात्रा का प्रबंधन सर्व शक्ति सेवक संस्था और सर्व शक्ति श्री चंडी माता मंदिर पक्का डंगा कर रहा है। दोनों दलों में मंदिर प्रबंधन अपने हाथ में लेने को लेकर विवाद चल रहा है। पिछले दिनों छड़ी यात्रा में यह बात खुलकर सामने आई और दोनों पक्षा में हाथापाई भी हुई। पुलिस में मामला भी दर्ज करवाया गया था। धार्मिक स्थल में इस प्रकार की घटना होने से हिंदुओं की आस्था आहत हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि मचैल माता मंदिर श्राइन बोर्ड के अधीन आता है तो इससे श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और लूटखसोट भी बंद होगी।

उनके इस तर्क को गंभीरता से लेते हुए डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार से छह माह के भीतर अपना पक्ष कोर्ट में रखने को कहा है। यही नहीं उन्होंने मंदिर प्रबंधन व भेंट आदि का हिसाब रखने के लिए विशेष जांच टीम गठित करने को भी कहा है। एडवाकेट आदित्य शर्मा ने उम्मीद जताई कि सरकार कोर्ट के फैसले पर जल्द अमल में लाएगी और अगले साल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पाएंगी।

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