2012 में की घुसपैठ, फिर जयपुर में निकाह... फर्जी पासपोर्ट से सऊदी अरब भागा लश्कर आतंकी 'खरगोश'
लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हैरिस उर्फ खरगोश फर्जी पासपोर्ट का इस्तेमाल कर सऊदी अरब भाग गया है। उसने राजस्थान निवासी ...और पढ़ें

फर्जी पासपोर्ट से सऊदी अरब भागा लश्कर आतंकी खरगोश, श्रीनगर पुलिस ने किया बड़ा खुलासा।
HighLights
लश्कर आतंकी खरगोश फर्जी पासपोर्ट से सऊदी अरब भागा
श्रीनगर पुलिस ने अंतरराज्यीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया
सिस्टम की खामियों के कारण आतंकी देश से भागने में सफल
पीटीआई, श्रीनगर। लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हैरिस उर्फ खरगोश के फर्जी पासपोर्ट के जरिए देश से फरार होकर सऊदी अरब में होने की आशंका जताई गई है। उसने सज्जाद नाम से राजस्थान का निवासी बनकर जाली पासपोर्ट बनवाया और देश छोड़ने में सफल रहा।
श्रीनगर पुलिस जो इस अंतरराज्यीय लश्कर-ए-तैयबा मॉड्यूल की जांच का नेतृत्व कर रही है, ने इस मामले की जानकारी केंद्रीय खुफिया एजेंसियों के साथ साझा की है। अधिकारियों ने कहा कि इस घटना ने सिस्टम की खामियों को उजागर किया है, जिनके कारण इस तरह के दुरुपयोग संभव हो पाते हैं।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है खरगोश
जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा इस महीने की शुरुआत में दर्ज किए गए इस मामले को अब राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपे जाने की संभावना है। संबंधित राज्यों की पुलिस को भी जानकारी साझा की गई है ताकि तत्काल कार्रवाई की जा सके और खामियों को दूर किया जा सके।
पहले जहां यह बताया जा रहा था कि हैरिस कराची का रहने वाला है। वहीं, अब खुलासा हुआ है कि वह पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा का निवासी है। कराची में उस पर आगजनी के कई मामले दर्ज थे, जिनसे बचने के लिए वह लश्कर-ए-तैयबा में शामिल हुआ। बाद में उसे 2012 में जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कराई गई।
इस वजह से नाम पड़ा खरगोश
हैरिस को खरगोश नाम इसलिए मिला क्योंकि वह तेजी से एक जगह से दूसरी जगह भागने में माहिर था और सुरक्षा एजेंसियों से बच निकलता था। जांच के अनुसार, कश्मीर घाटी में घुसने के बाद वह बांडीपोरा और श्रीनगर के विभिन्न स्थानों पर रहा और एक ओवर ग्राउंड वर्कर की बेटी से शादी की। यह निकाह जयपुर में सज्जाद नाम से किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि शादी के दस्तावेजों का इस्तेमाल भारतीय पासपोर्ट बनवाने में किया गया।
इस अंतरराज्यीय मॉड्यूल के खुलासे के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं कि पुलिस सत्यापन प्रणाली होने के बावजूद राजस्थान में उसे पासपोर्ट कैसे जारी किया गया।अधिकारियों के अनुसार यह आतंकवादी पहले इंडोनेशिया भागा और फिर 2024–25 के दौरान किसी अन्य फर्जी दस्तावेज के जरिए सऊदी अरब पहुंच गया। उसे भारत वापस लाने और खाड़ी देश से प्रत्यर्पण के प्रयास कूटनीतिक स्तर पर जारी हैं।
पुलिस ने किया था अंतरराज्यीय लश्कर-ए-तैयबा मॉड्यूल का भंडाफोड़
यह जानकारी उस समय सामने आई जब श्रीनगर पुलिस ने एक अंतरराज्यीय लश्कर-ए-तैयबा मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें पाकिस्तान का आतंकवादी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा भी शामिल है, जो 16 साल से फरार था।
अब्दुल्ला के साथ एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ खुबैब की गिरफ्तारी भी श्रीनगर पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। यह कार्रवाई छह महीने पहले फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े व्हाइट-कालर आतंकी मॉड्यूल के भंडाफोड़ के बाद हुई है।
पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने अपने और हैरिस के भारत में मूवमेंट के बारे में जानकारी दी, जिसमें राजस्थान, हरियाणा और पंजाब शामिल हैं। शादी समारोह के बाद दुल्हन के पिता को भी हिरासत में लिया गया, क्योंकि वह आतंकवादी की असली पहचान से वाकिफ था।
31 मार्च से शुरू हुए इस ऑपरेशन, जिसकी निगरानी पुलिस महानिदेशक नलिन प्रभात ने की, ने लश्कर के फंडिंग और वित्तीय नेटवर्क का भी खुलासा किया है। आतंकवादियों ने फर्जी दस्तावेजों और पहचान के जरिए जम्मू-कश्मीर के अलावा अन्य राज्यों में भी नेटवर्क खड़ा किया।
इन 5 लोगों को किया गया गिरफ्तार
गिरफ्तार पांच लोगों में श्रीनगर के मोहम्मद नकीब भट, आदिल राशिद भट और गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा शामिल हैं। इन पर आतंकवादियों को पनाह, भोजन और लॉजिस्टिक सहायता देने का आरोप है। इस नेटवर्क का खुलासा 31 मार्च को तब शुरू हुआ जब पुलिस ने पंडाच इलाके से नकीब भट को पिस्तौल और अन्य आपत्तिजनक सामग्री के साथ गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने लश्कर से जुड़ाव और हथियारों की आपूर्ति के बारे में जानकारी दी।
जांच के दौरान पुलिस ने श्रीनगर और आसपास के जंगलों में कई ठिकानों का भी भंडाफोड़ किया। गिरफ्तार दोनों पाकिस्तानी आतंकवादियों को ए प्लस श्रेणी का आतंकी बताया गया है, जो करीब 16 साल पहले भारत में घुसे थे और घाटी के विभिन्न जिलों में सक्रिय रहे।
यह कार्रवाई नवंबर 2025 में सामने आए अल फलाह मॉड्यूल के बाद हुई है, जिसमें शिक्षित पेशेवरों, खासकर डॉक्टरों को आतंकी गतिविधियों के लिए कट्टरपंथी बनाया गया था। इस मामले में एक आरोपी, अल फलाह यूनिवर्सिटी के डॉ. उमर-उन-नबी ने 10 नवंबर को लाल किले के बाहर विस्फोटकों से भरी कार चलाकर हमला किया था, जिसमें एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत हुई थी। अधिकारियों के अनुसार, उसने पहले 2016 और 2018 में भी आतंकी संगठनों में शामिल होने की कोशिश की थी।
