धमाके के अगले ही महीने लाल किले की रेकी करने गया था आतंकी शेख रहमान, जिहाद के नाम पर युवाओं को उकसाया
गिरफ्तार आतंकी शेख रहमान ने दिल्ली धमाके के बाद लाल किले और इंडिया गेट की रेकी की थी। पुलिस के ...और पढ़ें

HighLights
आतंकी शेख रहमान ने लाल किले और इंडिया गेट की रेकी की।
समूह ने राम मंदिर, संसद, सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की योजना बनाई।
अन्य आतंकियों ने युवाओं को कट्टरपंथी बनाया, बम बनाने की तैयारी की।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। गिरफ्तार चार आतंकियों में से एक शेख रहमान नवंबर 2025 में दिल्ली में धमाके के अगले ही माह लाल किला की रेकी करने पहुंचा था। लाल किला के साथ वह इंडिया गेट भी पहुंचा था। आशंका है कि वह कई संवेदनशील स्थानों की रेकी कर चुका है। युवाओं को आतंकी बनाने के लिए लाल किले की एक तस्वीर पोस्ट की थी, जिसमें लाल किला के ऊपर एडिटेड काला झंडा लगा था। पुलिस के मुताबिक, चारों आतंकियों के काम बंटे हुए थे।
शेख इमरान: भुवनेश्वर से पढ़ाई करने के बाद इसने सिक्योरिटी गार्ड व डिलीवरी ब्वॉय के रूप में काम किया। 2024 में इसने तारिक जमील, इसरार अहमद, जाकिर नाइक आदि के लेक्चर सुनना शुरू किया, जिससे धीरे-धीरे उसमें कट्टरपंथी विचार पनपने लगे।
सोशल मीडिया के जरिये उसकी मुलाकात मोहम्मद हम्माद व मोसैब अहमद उर्फ़ "सोनू" से हुई। सभी ने एक ग्रुप बनाया, जिसमें जिहाद, खिलाफत व "गजवा-ए-हिंद" जैसे विषयों पर चर्चाएं होती थीं। उन्होंने राम मंदिर, संसद व सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की साजिशों पर बात की।
दिसंबर में वह लाल किला व इंडिया गेट की रेकी करने दिल्ली आया था। उसने ग्रुप के सदस्यों से वादा किया कि वह ओडिशा में हथियारों की ट्रेनिंग व घुड़सवारी सहित शारीरिक प्रशिक्षण का इंतजाम करेगा। इसके लिए उसने सदस्यों से चंदा देने को कहा था।
मोसैब अहमद उर्फ सोनू: आजमगढ़ का रहने वाला है। उसने भारत व विदेश (सऊदी अरब व कतर) में वेल्डर, ऑटो मैकेनिक व ऑटो इलेक्ट्रीशियन का काम कर चुका है। फिलहाल, वह ठाणे में एक निजी आटोमोबाइल वर्कशाप में काम कर रहा था और कई ऑनलाइन ग्रुप से जुड़ा था, जहां "लश्कर-ए-महदी" और "जिहाद" से जुड़ी चर्चाएं होती थीं। उसने आतंकी मोहम्मद हम्माद की मदद की और बम बनाने के लिए एक रिमोट-कंट्रोल वाला खिलौना कार बम की तस्वीर ग्रुप में साझा की थी।
मोहम्मद हम्माद: मुंबई का रहने वाला है। जनवरी में वह एक ग्रुप से जुड़ा, जिसमें मोसैब अहमद जैसे कई सदस्य शामिल थे। इस ग्रुप में "जिहाद" और "गज़वा-ए-हिंद" पर चर्चाएं होती थीं। उसने बम बनाने के सामान के तौर पर बाल बेयरिंग, कीलें, रिमोट-कंट्रोल खिलौना कार और बक्सों की तस्वीरें एक ग्रुप में साझा की थी। उसने ये चीजें बाद में मोसैब अहमद को सौंप दीं थी। मोसैब पेशे से मैकेनिक है, इसलिए उसे बम बनाने का दिया गया।
मोहम्मद सोहेल: कटिहार का रहने वाला है और पेशे से प्लंबर है। वह डा. इसरार अहमद के लेक्चर से प्रभावित था। उसने सोशल मीडिया पर कई अकाउंट बनाए और जिहाद के नाम पर युवाओं को उकसाया। बीते मार्च में उसने अपने चैनल के फालोअर को "गजवा-ए-हिंद" के लिए हथियार और विस्फोटक जमा करने के लिए भड़काया। उसने जिहाद के नाम पर पैसे एकत्र करने के लिए बैंक अकाउंट नंबर और क्यूआर कोड भी साझा किया था।
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