विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

क्या लद्दाख छीन पाएगा कश्मीर से 'रेड गोल्ड' का ताज? सेब-खुबानी के बाद लेह में उगेगा दुनिया का सबसे महंगा मसाला?

Published: Sat, 03 Oct 2026 11:31 AM (IST)

लद्दाख के लेह में ईरानी केसर के बल्बों का एक महत्वाकांक्षी पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। यह पहल क्षेत्र के ...और पढ़ें

यह पायलट प्रोजेक्ट किसानों व युवाओं के लिए आय के अवसर पैदा करेगा।

यह पायलट प्रोजेक्ट किसानों व युवाओं के लिए आय के अवसर पैदा करेगा।

HighLights

  1. लेह के स्पितुक फरका में 90 हजार ईरानी केसर बल्ब रोपे गए

  2. यह पायलट प्रोजेक्ट किसानों व युवाओं के लिए आय के अवसर

  3. सफलता पर लद्दाख केसर उत्पादन में कश्मीर को चुनौती दे सकता है

डिजिटल डेस्क, जम्मू। जब भी दुनिया के सबसे महंगे मसाले यानी केसर का नाम आता है जो लिस्ट में सबसे ऊपर कश्मीर के पांपोर का नाम आता है। लेकिन अब अब लद्दाख के ठंडे, बंजर मरुस्थल में एक ऐसा ऐतिहासिक प्रयोग हुआ है, जो भारत के कृषि मानचित्र का इतिहास बदल सकता है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के मार्गदर्शन में लेह के स्पितुक फरका स्थित 4,000 वर्ग मीटर की बंजर भूमि पर 90 हजार से अधिक (800 किलोग्राम) प्रीमियम ईरानी केसर के बल्ब रोपे गए हैं।

लद्दाख की जमा देने वाली ठंड, मिट्टी और दुर्लभ पानी के बीच शुरू हुआ यह पायलट प्रोजेक्ट अगर सफल रहता है, तो ठंडे मरुस्थल की बंजर क्यारियां आने वाले दिनों में देश के युवाओं और किसानों के लिए 'सोना' उगलेंगी।

सेब और खुबानी के बाद केसर से होगी कमाई

अच्छी बात ये है कि अगर यह फसल सफल रही, तो लद्दाख के स्थानीय किसानों और युवाओं के लिए सेब और खुबानी के बाद केसर कमाई का सबसे बड़ा और प्रीमियम साधन बन जाएगा।

इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लेह में करीब तीन महीने पहले तक बंजर पड़ी भूमि के 4,000 वर्ग मीटर क्षेत्र में प्रीमियम गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के करीब 800 किलोग्राम (लगभग 90 हजार) बल्ब रोपे गए।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना के मार्गदर्शन में शुरू किए पायलट प्रोजेक्ट का उद्देश्य बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाकर किसानों और युवाओं के लिए आय के नए अवसर पैदा करना है।

पहली फसल बताएगी कितनी मिली सफलता

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार पहली कटाई के परिणाम और केसर की सुगंध-रंग तय करेंगे कि इस मॉडल को पूरे लद्दाख क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कैसे विस्तार दिया जाए।

बता दें कि यह पूरा प्रयोग अभी पायलट स्तर पर है। पहली फसल बताएगी कि लद्दाख की ऊंचाई, तापमान, मिट्टी और पानी के बीच केसर कितना फलता-फूलता है। पैदावार और गुणवत्ता अच्छी रही तो यही छोटी-सी क्यारी आगे चलकर बड़े खेतों का रास्ता खोल सकती है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगाए केसर के बल्बों से अच्छी मात्रा में केसर उत्पादन की उम्मीद है। केसर उगाने का यह प्रयोग लेह के स्पितुक फरका स्थित कमांड एरिया में किया जा रहा है।

लोगों को मिलेगा रोजगार

देश के केसर उत्पादन में जम्मू-कश्मीर की हिस्सेदारी करीब 90 प्रतिशत है। उपराज्यपाल ने ‘एक्स’ पर लिखा, मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि लद्दाख में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू करने के लिए महत्वाकांक्षी प्रयोग किया जा रहा है।

हमारा प्रयास क्षरित व बंजर भूमि को उत्पादक बनाकर किसानों के लिए नए अवसर पैदा करना है।

यह भी पढ़ें- जम्मू-कश्मीर: राजौरी में LoC पार कर भारत पहुंची PoK की महिला, जवानों ने बॉर्डर पर पकड़ा