लद्दाख की सूखती टीएसो कार झील को मिलेगा नया जीवन, उपराज्यपाल वीके सक्सेना का बड़ा ऐलान
लद्दाख की सूखती टीएसो कार झील को पुनर्जीवित करने के लिए एक परियोजना शुरू की गई है, जिसके तहत रुपशो ...और पढ़ें
-1789289814893_m.webp)
सूखी पड़ रही टीएसो कार झील को पुनर्जीवन।
HighLights
रुपशो खारनाक ग्लेशियर से टीएसो कार झील में पानी डायवर्ट होगा
प्रतिदिन 320 मिलियन लीटर पानी झील को पुनर्जीवित करेगा
परियोजना से नए वेटलैंड बनेंगे और स्थानीय आजीविका सुधरेगी
राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख के उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने सूखती जा रही प्रसिद्ध टीएसो कार झील को पुनर्जीवित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी जल प्रबंधन परियोजना शुरू की है।
परियोजना के तहत 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित रुपशो खारनाक ग्लेशियर स्ट्रीम के पानी को झील तक पहुंचाया जाएगा। इससे प्रतिदिन औसतन 320 मिलियन लीटर (132 क्यूसेक) ग्लेशियर का पानी टीएसो कार में पहुंचने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, यह पानी फिलहाल बिना उपयोग के सिंधु नदी में चला जाता है। टीएसो कार झील पिछले एक दशक में करीब 70 प्रतिशत तक सिकुड़ चुकी है। कभी लगभग 11 हजार एकड़ में फैली यह झील अब महज करीब 3,200 एकड़ में रह गई है।
झील के सिकुड़ने से यहां आने वाले प्रवासी पक्षियों और प्रसिद्ध ब्लैक-नेक्ड क्रेन की संख्या में भी भारी कमी आई है। उपराज्यपाल सक्सेना ने 10 अगस्त को टीएसो कार झील के दौरे के दौरान स्थानीय ग्रामीणों से झील की स्थिति की जानकारी ली थी।
ग्रामीणों ने बताया था कि कभी यह क्षेत्र ग्लेशियर के पानी से भरी विशाल झील और स्थानीय नमक व्यापार का प्रमुख केंद्र था लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसके तेजी से सूखने से चरागाह और पक्षियों का आवास भी प्रभावित हुआ है।
परियोजना के तहत ग्लेशियर से निकलने वाले पानी को झील तक पहुंचाने के लिए तीन प्राकृतिक गड्ढों का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहला जलाशय करीब 270 एकड़, दूसरा 24 एकड़ और तीसरा 10 एकड़ क्षेत्र में फैला है। प्रत्येक जलाशय के निकास पर तीन आरसीसी पाइपों के साथ चेक डैम बनाया जाएगा, जिससे पानी के प्रवाह और जलस्तर को नियंत्रित किया जा सके।
तीसरे जलाशय से टीएसो कार झील की दूरी महज 400 मीटर है। यहां से पानी को गुरुत्वाकर्षण के जरिए सीधे झील में पहुंचाया जाएगा। खास बात यह है कि इसके लिए नए बड़े कंक्रीट चैनल के निर्माण के बजाय कम लागत वाले साधारण मिट्टी के चैनल और प्राकृतिक ढलान का इस्तेमाल किया जा रहा है।
9 सितंबर से रुपशो खारनाक ग्लेशियर स्ट्रीम से करीब 20 क्यूसेक पानी पहले जलाशय में सफलतापूर्वक डायवर्ट किया जा रहा है।
शुरुआती चार दिनों में ही पहले जलाशय का करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र पानी से भर चुका है। पानी को ग्लेशियर से एक पुराने कंक्रीट चैनल और मिट्टी से बने मार्ग के जरिए लाया जा रहा है। बताया गया है कि यह कंक्रीट चैनल वर्ष 1995 से उपयोग में नहीं था।
तीन नए वेटलैंड भी बनेंगे
इस परियोजना से केवल टीएसो कार झील को पानी ही नहीं मिलेगा, बल्कि रास्ते में तीन नए मीठे पानी के वेटलैंड भी विकसित होंगे। इन तीनों जलाशयों में कुल करीब 1,230 मिलियन लीटर पानी जमा होने की क्षमता होगी। इन प्राकृतिक जल निकायों में ग्लेशियर से आने वाली तलछट पहले ही बैठ जाएगी, जिससे अपेक्षाकृत साफ पानी टीएसो कार झील तक पहुंचेगा।
अधिकारियों का मानना है कि नए वेटलैंड प्रवासी पक्षियों के लिए नए आवास भी तैयार करेंगे। इसके अलावा लेह-मनाली हाईवे से दिखाई देने वाले ये जलाशय भविष्य में नए पर्यटन स्थलों के रूप में भी विकसित हो सकते हैं। प्रशासन का अनुमान है कि उपलब्ध ग्लेशियर जल का पूरी तरह उपयोग करने से टीएसो कार झील को करीब एक वर्ष में उसके पुराने स्वरूप के करीब लाया जा सकता है।
यह परियोजना करीब 15 हजार फीट की ऊंचाई पर और बेहद कठोर मौसम वाले क्षेत्र में संचालित की जा रही है, जहां गर्मियों में भी तापमान कई बार 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहता है और सर्दियों में यह माइनस 20 से 30 डिग्री तक पहुंच जाता है।
पश्मीना पशुपालकों को भी मिलेगा फायदा
टीएसो कार झील के पुनर्जीवन से स्थानीय लोगों की आजीविका पर भी सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। झील के आसपास रहने वाले बड़ी संख्या में ग्रामीण पश्मीना बकरी पालन पर निर्भर हैं।
झील के सिकुड़ने के साथ चरागाह भी कम हो गए हैं, जिसके कारण कई पशुपालकों को अपने पशुओं के लिए 50 से 75 किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है।झील के पुनर्जीवन से आसपास के क्षेत्रों में फिर से घास के मैदान विकसित होने की उम्मीद है। इससे पशुपालकों को अपने गांवों के आसपास ही चरागाह उपलब्ध हो सकेंगे और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा आजीविका के नए अवसर भी पैदा होंगे।
