अब दूरबीन नहीं, सामने से देखें 'हिम तेंदुएं'; लद्दाख में पर्यटकों के लिए खुली देश की पहली स्नो लेपर्ड सफारी
लद्दाख में देश की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी शुरू हो गई है, जिससे पर्यटक हिम तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में करीब से देख सकेंगे।

लद्दाख में पर्यटकों के लिए खुली पहली स्नो लेपर्ट सफारी (फोटो- सोशल मीडिया)
HighLights
लद्दाख में देश की पहली स्नो लेपर्ड सफारी शुरू हुई
पर्यटक हिम तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों को करीब से देखेंगे
स्थानीय युवाओं को रोजगार, संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा
राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख में हिम तेंदुओं के साथ हिमालयी भूरे भालू, भेड़ियों व अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक आवास में अब पास से देखने का मौका मिलेगा। इस दिशा में लेह में देश-विदेश के पर्यटकों के लिए भारत की पहली हाई-एल्टीट्यूड स्नो लेपर्ड वाइल्डलाइफ सफारी को शुरू किया गया है।
पहले चरण में सफारी का संचालन रुमबक, शांग व उले क्षेत्रों में किया जाएगा, जिसके बाद इसका विस्तार होगा। सफारी में प्रशिक्षित स्थानीय चालक व वन्यजीव गाइड छह ओपन-बैक वाहनों में पर्यटकों को सुरक्षित ढंग से दूरदराज के इलाकों में ले जाएंगे। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बुधवार को लेह में वाइल्डलाइफ सफारी का शुभारंभ किया।
718 हिम तेंदुओं का घर
बता दें कि लद्दाख 477 हिम तेंदुओं का घर है और देशभर में हिम तेंदुओं की संख्या 718 के करीब है। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक लद्दाख में हिम तेंदुओं को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए आते हैं। उपराज्यपाल ने कहा कि लद्दाख में पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं होनी चाहिए।
स्थानीय समुदायों को भी इसका सक्रिय भागीदार बनाया जाना चाहिए। वन्यजीव संरक्षण व स्थानीय लोगों की आजीविका के बीच संतुलन कायम करना जरूरी है। स्थानीय गाइड को स्नो लेपर्ड साइटिंग से आय व महिलाओं को संरक्षण आधारित हस्तशिल्प से लाभ होना चाहिए।
बताया गया कि 20 स्थानीय युवाओं को पक्षियों की पहचान, बर्डवाचिंग और स्पाटिंग का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्हें दूरबीन भी उपलब्ध कराई जाएगी व प्रमुख पक्षी-दर्शन स्थलों पर बर्ड-वाचिंग हाइड विकसित किए जाएंगे।
रोजगार के अवसर मिलेंगे
इससे युवाओं के लिए वन्यजीव गाइड, बर्ड गाइड व नेचर इंटरप्रेटर के रूप में रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इस दौरान वाइल्ड एनिमल फेल्टिंग कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया।
इसमें तुरतुक, फोटोक्सार, सांग्रह, चुशुल व शरगोल की 50 महिलाएं शामिल हैं। इस पहल के माध्यम से पारंपरिक कौशल व स्थानीय ऊन को संरक्षण आधारित उद्यमों से जोड़ा जा रहा है। उपराज्यपाल प्रशासन ने गत पांच अगस्त को सफारी शुरू करने की गई घोषणा की थी।
लद्दाख में वन्यजीवों व जैव विविधता की समृद्धता को देखते हुए सफारी शुरू करने की पहल विशेष महत्व रखती है। लद्दाख में 340 से अधिक पक्षी प्रजातियां व करीब 1,800 संवहनी पौधों की प्रजातियां पाई जाती हैं।
आने वाले समय में सफारी के लिए अतिरिक्त मार्गों की पहचान की जा रही है। इनमें हेमिस नेशनल पार्क, चांगथांग, काराकोरम वाइल्डलाइफ सेंक्चुरी, नुब्रा, जांस्कर, शाम, कारगिल व द्रास के क्षेत्र शामिल हैं, यहां जल्द शुरू करने की योजना है।
मानव-वन्यजीव में संघर्ष को कम करने में मिलेगी मदद
उपराज्यपाल ने लद्दाख में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए पहले एआइ आधारित ह्यूमन-वाइल्डलाइफ कान्फ्लिक्ट मिटिगेशन डिवाइस का उद्घाटन किया।
इसका उद्देश्य मानव व वन्यजीवों के बीच बेहतर सह-अस्तित्व स्थापित करना तथा संघर्ष की घटनाओं को कम करने में मदद करना है। इस पहल से पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ वन्यजीव पर्यटन को जिम्मेदार, नियंत्रित और संरक्षण के अनुकूल बनाया।
