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लद्दाख में शराब पर सियासी घमासान, सोनम वांगचुक पर बरसे कारोबारी; बोले- एक तरफ धरना दूसरी ओर 'चांग' को बढ़ावा

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:50 PM (IST)

लद्दाख में शराब बिक्री और स्थानीय शराब को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विवाद गहरा गया है। शराब कारोबारियों ने ...और पढ़ें

सोनम वांगचुक पर बरसे शराब कारोबारी। फाइल फोटो

सोनम वांगचुक पर बरसे शराब कारोबारी। फाइल फोटो

HighLights

  1. व्यापारियों ने सोनम वांगचुक पर दोहरे मापदंड का आरोप लगाया।

  2. वांगचुक शराब-मुक्त लद्दाख और चांग को बढ़ावा देने की बात करते हैं।

  3. व्यापारियों ने अपनी आजीविका और वांगचुक की वाइन पर सवाल उठाए।

राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शराब की बिक्री और स्थानीय शराब को बढ़ावा देने के मुद्दे पर विवाद गहराता जा रहा है। आल लद्दाख होटल्स एंड बार्स एसोसिएशन और आल लद्दाख लिकर ट्रेडर्स एसोसिएशन ने पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर शराब के मामले में दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है।

व्यापारियों का कहना है कि एक ओर वांगचुक शराब-मुक्त लद्दाख की मांग कर रहे लोगों के साथ धरने पर बैठते हैं, वहीं दूसरी ओर स्थानीय शराब चांग को बढ़ावा देने और माइक्रोब्रुअरी को टैक्स में छूट देने की वकालत करते हैं।

गौरतलब है कि 28 अक्टूबर को सोनम वांगचुक लेह के एनडीएस मेमोरियल पार्क में शराब मुक्त लद्दाख की मांग को लेकर धरने पर बैठी महिलाओं के समर्थन में शामिल हुए थे।

इस दौरान उन्होंने लद्दाख की पारंपरिक शराब चांग को स्थानीय विरासत का हिस्सा बताते हुए इसे अपेक्षाकृत बेहतर और स्वस्थ विकल्प बताया। साथ ही उन्होंने प्रशासन से अपील की कि स्थानीय युवाओं को गेहूं से शराब बनाने वाली आधुनिक माइक्रोब्रुअरी स्थापित करने में मदद दी जाए और ऐसी इकाइयों को टैक्स में छूट दी जाए।

शराब कारोबारियों को निशाना बनाना उचित नहीं

इसके बाद लेह में आयोजित पत्रकार वार्ता में शराब कारोबारियों ने वांगचुक के रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर लद्दाख को शराब-मुक्त बनाना है, तो यह नियम सभी प्रकार की शराब पर समान रूप से लागू होना चाहिए। केवल लाइसेंस प्राप्त शराब कारोबारियों को निशाना बनाना उचित नहीं है।

व्यापारियों ने सवाल किया कि जब ड्रग्स, सिगरेट और मांस भी समाज में प्रचलित हैं, तो केवल शराब के खिलाफ ही अभियान क्यों चलाया जा रहा है? उन्होंने वांगचुक पर चुनिंदा सक्रियता दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें व्यापारियों की आजीविका के मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि शराब का कारोबार कानूनी रूप से लाइसेंस प्राप्त व्यवसाय है और इसे मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई तथा हिंदू समुदायों के लोग भी संचालित करते हैं। इसे किसी एक समुदाय के कारोबार के रूप में पेश करना गलत है।

प्रशासन ने अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

व्यापारियों ने कहा कि कई लाइसेंस धारकों ने दुकान, स्टॉक और अन्य व्यवस्थाओं पर लाखों रुपये का निवेश किया है। कुछ कारोबारियों को तो अपना व्यवसाय शुरू किए एक महीने से भी कम समय हुआ है। ऐसे में शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग से उनकी आजीविका प्रभावित होगी।

उन्होंने कहा कि यदि मांस, सिगरेट और अन्य नशीले पदार्थों पर भी समान नियम लागू किए जाते हैं, तो उन्हें पूर्ण प्रतिबंध से भी आपत्ति नहीं होगी। व्यापारियों ने सोनम वांगचुक के पैतृक गांव उले टोपो में उनके परिवार से जुड़ी सेब की वाइन उले टोपो का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने सवाल किया कि क्या इस वाइन के उत्पादन और बिक्री के लिए आवश्यक व्यावसायिक लाइसेंस लिया गया है? यदि नहीं, तो प्रशासन ने अब तक इस पर कार्रवाई क्यों नहीं की?

व्यापारियों का आरोप है कि एक तरफ लाइसेंस लेकर कारोबार करने वालों पर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर बनने वाली वाइन की बिक्री को लेकर कोई कार्रवाई नजर नहीं आती। हालांकि, वाइन के लाइसेंस और प्रशासनिक निगरानी से जुड़े इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

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