लेह, अनिल गक्खड़। लद्दाख चुनाव में एक बार फिर नारी शक्ति ने साबित कर दिया कि जब राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी निभाने की बात आती है तो वह पुरुषों से न केवल कदमताल करते हुए आगे बढ़ती है बल्कि एक कदम आगे बढ़कर जिम्मेवारी का निर्वहन करती है। सोमवार को हुए लद्दाख लोकसभा क्षेत्र के मतदान में नारी शक्ति पुरुषों पर कहीं भारी पड़ी। मतदान के यह आंकड़े आधी आबादी के सियासी उदय की पूरी कहानी कहते हैं।

अंतिम आंकड़ों के अनुसार लोकसभा क्षेत्र में 71.1 फीसद कुल वोट पड़े। इस भारी मतदान का श्रेय भी महिलाओं को जाता है और वह मतदान में पुरुषों से तीन फीसद आगे रही। केवल लेह जिले की बात करें तो यहां पुरुष महिलाओं के मुकाबले पांच फीसद पीछे रह गए।

उल्लेखनीय है कि लद्दाख लोकसभा क्षेत्र में लगभग 1.74 लाख मतदाता हैं। इसमें से 87691 पुरुष और 86136 महिलाएं हैं। जनसंख्या में भले ही महिलाओं की संख्या कुछ कम दिखे पर मतदान में पुरुषों को काफी पीछे छोड़ गईं। लद्दाख सीट पर कुल 71.1 फीसद वोट पड़े। जब पुरुषों व महिलाओं के आंकड़ों को अलग-अलग पड़ताल की गई तो निकलकर आया कि 71.92 फीसद महिलाओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। वहीं पुरुष करीब तीन फीसद पीछे 68.86 फीसद पर अटक गए।

लद्दाख लोकसभा क्षेत्र में दो जिले हैं, लेह व कारगिल। पड़ताल में सामने आया कि दोनों जिलों में महिलाएं मत-प्रतिशत मामले में पुरुषों पर भारी रहीं। लेह बौद्ध बहुल क्षेत्र है और इस जिले की खूबी यह है कि यह देश के गिने-चुने जिलों में शामिल है जहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है। यहां 43558 पुरुषों के मुकाबले 43601 महिला मतदाता हैं। यहां बढ़त भले ही कम दिखे पर मतदान में पुरुषों को मीलों पीछे छोड़ देती हैं। इस जिले में कुल 62.76 फीसद वोट पड़े। वहीं महिलाओं का मतदान प्रतिशत 63.17 रहा। केवल 58.21 फीसद पुरुष ही मतदान केंद्रों तक पहुंचे।

कारगिल जिला मुस्लिम बहुल है पर यहां का मतदान भी नारी सशक्तीकरण की नई उम्मीद जगाता है। कारगिल जिले में संख्या में भले ही महिलाएं कुछ पीछे हों पर मतदान में वहां भी नारी शक्ति ही आगे रही। यहां 79.35 फीसद पुरुषों के मुकाबले 79.62 फीसद महिलाओं ने मताधिकार का इस्तेमाल किया। यहां कुल 79.49 फीसद मतदान हुआ।

नई नहीं है यह कहानी : चांद की दुनिया कहलाने वाले लेह की धरा में नारी के प्रति सम्मान साफ झलकता है। यही वजह है कि यहां महिलाएं सामाजिक तौर पर अधिक सशक्त हैं। सद्भाव और सम्मान भाव यहां की परंपरा है। लेह कालेज के प्राचार्य दशक्योंग नाम्गयाल कहते हैं कि यहां जम्मू-कश्मीर ही नहीं देश के किसी भी हिस्से से महिलाएं अधिक सशक्त हैं और जिम्मेवार भी हैं। यही वजह है वह सभी मुद्दों पर खुलकर अपनी राय भी रखती है। मतदान में भी इसका असर दिखना लाजिमी है।

पॉलीथीन प्रतिबंध में भी नारी शक्ति: लेह में पॉलीथीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। यहां के महिला संगठनों ने ही इस संबंध में आंदोलन चलाया और लोगों को जागरूक किया। महिलाएं स्वयं पॉलीथीन के इस्तेमाल के खिलाफ आईं तो इसका प्रभाव तेजी से देखने को मिला।

अभी सियासी सपना अधूरा: सियासी सजगता और जिम्मेदारी के बावजूद सियासी दल महिलाओं को चुनावी रण में उतारने से हिचकते हैं। यही वजह है कि आज तक केवल एक महिला ही लेह से संसद पहुंच पाई हैं। वह भी राज परिवार से थीं। उसके बाद सियासी दल महिलाओं को चुनाव मैदान में उतारने से परहेज ही करते रहे।

जिम्मेदारी में भी नंबर वन: मतदान के दौरान भी महिला मतदान कर्मी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करने में आगे दिखीं। चुनाव ड्यूटी के साथ सुरक्षा में भी बड़ी संख्या में महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था। लोकसभा क्षेत्र के 57 बूथ ऐसे थे जहां केवल महिला स्टाफ था। इनमें से 49 अकेले लेह जिले में थे। सबसे दुर्गम और संवेदनशील क्षेत्र में नारी शक्ति की उड़ान नई उम्मीदें जगाने वाली है। लेह की जिला निर्वाचन अधिकारी एनवी लवासा ने बताया कि महिलाओं समेत सभी चुनाव कर्मियों ने पूरी जिम्मेदारी से अपनी ड्यूटी का निर्वहन किया। यहां बता दें कि लेह जिले की कमान भी महिला अधिकारियों के पास है। जिले की डीसी और एसएसपी दोनों महिलाएं हैं।

लद्दाख लोकसभा क्षेत्र

  • कुल मतदान - 71.1 फीसद
  • पुरुष - 68.86 फीसद
  • महिला - 71.92 फीसद

लेह जिला

  • कुल मतदान - 62.76 फीसद
  • पुरुष - 58.21 फीसद
  • महिला - 63.17 फीसद

कारगिल जिला

  • कुल मतदान - 79.49 फीसद
  • पुरुष - 79.35 फीसद
  • महिला - 79.62 फीसद 

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Posted By: Rahul Sharma

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