लद्दाख की बंजर भूमि उगलेगी 'लाल सोना', महज 30 दिन में खिले केसर के फूल; किसानों-युवाओं की आमदनी को लगेंगे पंख
लद्दाख की बंजर भूमि पर केसर की खेती का प्रयोग सफल रहा है, जहां आमतौर पर दो महीने लगने वाले फूल महज 30 दिनों में खिल गए हैं।

लद्दाख की बंजर भूमि पर केसर का सफल उत्पादन। फोटो सोशल मीडिया
HighLights
लद्दाख की बंजर भूमि पर केसर की खेती का सफल प्रयोग।
आमतौर पर दो माह के बजाय 30 दिन में खिले केसर के फूल।
यह पायलट परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख की बंजर भूमि पर कृषि की नई संभावनाओं को तलाशने के लिए शुरू किया गया केसर की खेती का प्रयोग सफल हुआ है। यहां केसर की खेती में महज 30 दिनों के भीतर फूल खिलने लगे हैं। आमतौर पर केसर की फसल में पहली बार फूल खिलने में करीब दो महीने का समय लगता है।
उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने रविवार को केसर के खेत का निरीक्षण कर पहली बार खिले फूलों को देखा। इस दौरान उन्हें बताया गया कि खेत में प्रतिदिन औसतन 20 से 25 फूल खिल रहे हैं, जबकि रविवार सुबह अकेले 72 फूल खिले। इस तेजी से हुई वृद्धि के परिणामस्वरूप महज चार दिनों में करीब 22 ग्राम शुद्ध केसर एकत्र किया जा चुका है।यह प्रयोग लगभग 4000 वर्ग मीटर भूमि पर शुरू किया है।
इसके तहत एक अक्टूबर को करीब 800 किलोग्राम (लगभग 90 हजार) उच्च गुणवत्ता वाले ईरानी केसर के कंद लगाए गए थे। यह भूमि पहले बंजर थी, जिसे प्रोजेक्ट हिम सरोवर के तहत बहाल और पुनर्जीवित किया गया है।
किसान और युवा आर्थिक रूप से होंगे आत्मनिर्भर
यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पारंपरिक कृषि गतिविधियों में विविधता लाकर किसानों और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के विजन के अनुरूप शुरू की गई है। लद्दाख प्रशासन इससे पहले उच्च मूल्य वाली फूलों की खेती, विशेषकर लिलियम और ग्लेडियोलस के बड़े स्तर पर उत्पादन के सफल प्रयोग कर चुका है।
इन प्रयासों से किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर विकसित हुए हैं। उपराज्यपाल वीके सक्सेना ने कहा कि यह उपलब्धि लद्दाख के स्थानीय पर्यावरण की क्षमता और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कृषि की अपार संभावनाओं को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि इस पायलट परियोजना की सफलता भविष्य में व्यावसायिक स्तर पर केसर उत्पादन की संभावनाओं का आधार तैयार करेगी। इससे क्षेत्र में अधिक लाभ देने वाली फसलों की खेती और कृषि आधारित उद्यमिता के नए रास्ते खुलेंगे तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
बाजार में केसर की काफी मांग
गौरतलब है कि केसर एक उच्च मूल्य वाली फसल है, जिसकी बाजार में काफी मांग है और इसकी कीमत भी अच्छी मिलती है। इससे किसानों को आय का एक अतिरिक्त और लाभकारी स्रोत मिल सकता है।
भारत में जम्मू-कश्मीर केसर उत्पादन का प्रमुख केंद्र है और देश के कुल केसर उत्पादन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत है।
ऐसे में लद्दाख में केसर की खेती को फिलहाल प्रायोगिक परियोजना के रूप में शुरू किया गया है ताकि यहां की जलवायु परिस्थितियों में इसकी उपयुक्तता और आर्थिक संभावनाओं का आकलन किया जा सके।
उपराज्यपाल ने इस पायलट परियोजना की सफलता में योगदान देने वाले कृषि विभाग के अधिकारियों और खेतों में काम करने वाले कर्मचारियों की भी सराहना की। उन्होंने उनके समर्पण, तकनीकी विशेषज्ञता और प्रयासों को इस पहल की शुरुआती सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया।
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