किश्तवाड़ में नाबालिग की मौत और यौन शोषण मामला गरमाया, एक और शिक्षक निलंबित
जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में नाबालिग की मौत के मामले में एक और सरकारी शिक्षक अब्दुल लतीफ बांडे को निलंबित ...और पढ़ें
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एक और शिक्षक हुआ निलंबित।
HighLights
किश्तवाड़ के शिक्षक अब्दुल लतीफ बांडे निलंबित हुए
नाबालिग की मौत मामले में गिरफ्तारी के बाद कार्रवाई
मुख्य आरोपी खालिद हुसैन शेख पहले ही बर्खास्त
राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ के छात्रू में नाबालिग की मौत के मामले में स्कूल शिक्षा विभाग ने एक और सरकारी शिक्षक को निलंबित कर दिया है।
किश्तवाड़ के इंदरवल जोन स्थित मिडिल स्कूल मेहजर में तैनात शिक्षक ग्रेड-दो अब्दुल लतीफ बांडे को उनकी गिरफ्तारी के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी किश्तवाड़ ने निलंबित किया है।
बांडे को अपराध शाखा जम्मू की विशेष अपराध विंग ने गत छह अक्टूबर को गिरफ्तार किया था। यह कार्रवाई इस मामले के मुख्य आरोपी बताए जा रहे खालिद हुसैन शेख को सरकारी सेवा से बर्खास्त किए जाने के करीब एक महीने बाद हुई है।
निलंबन आदेश के अनुसार बांडे की गिरफ्तारी पुलिस स्टेशन अपराध शाखा जम्मू में दर्ज एफआइआर संख्या 27/2026 के संबंध में हुई है। आदेश में जम्मू-कश्मीर सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1956 के नियम 31 का हवाला दिया गया है।
जांच पूरी होने तक रहेगा निलंबन
इसमें कहा गया है कि सक्षम प्राधिकारी के अगले आदेश और आगे की जांच पूरी होने तक उनका निलंबन जारी रहेगा। इस मामले का मुख्य आरोपी खालिद हुसैन शेख इंदरवल जोन के सरकारी मिडिल स्कूल बुमालपोरा में कार्यवाहक प्रधानाध्यापक के रूप में तैनात था। उसे गत 21 सितंबर को बर्खास्त किया गया था।
क्या है पूरा मामला?
छात्रू क्षेत्र की नाबालिग लड़की की मौत के बाद अगस्त में यह मामला सामने आया था। इस प्रकरण में नाबालिग के कथित यौन शोषण तथा उसकी गर्भावस्था व मौत से पहले उत्पन्न चिकित्सा जटिलताओं से जुड़े आरोपों की जांच की जा रही है।
खालिद के भाई तारिक हुसैन शेख को भी मामले में शुरुआती दौर में गिरफ्तार किया गया था। मामले में पहले छात्रू पुलिस स्टेशन में एफआइआर संख्या 34/2026 दर्ज की गई थी, जिसे बाद में अपराध शाखा जम्मू को सौंप दिया गया।
जांच एजेंसियों ने चिकित्सा रिकार्ड जुटाए हैं, गवाहों के बयान दर्ज किए हैं और दस्तावेजी एवं इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों की जांच की है। जैविक नमूनों और विसरा को फोरेंसिक जांच तथा डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए सुरक्षित रखा गया है।
मामले से जुड़े घटनाक्रम के दौरान जन्मे नवजात बालक के जैविक माता-पिता की पहचान करना भी जांच का महत्वपूर्ण पहलू है।
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