जागरण संवाददाता, कठुआ : जिले के दूर दराज के गांवों में अधिकारियों के पहुंचने के बाद गांवों को विकास की सौगात मिलनी शुरू हो गई है। दरअसल, कार्यालयों से गांव में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनने के लिए शुरू किए गए बैक टू विलेज कार्यक्रम से जहां ग्रामीणों को अपनी समस्याएं रखने और उसके समाधान के लिए बेहतर मौका मिल रहा है, वहीं विकास की सौगात भी मिलने लगी है। इससे ग्रामीणों की कई समस्याओं का समाधान तेजी से होने की उम्मीद जग गई है।

मंगलवार को बनी उपमंडल के पूंड ब्लॉक के गांव द्रमण में विजि¨टग अधिकारी जम्मू कश्मीर पॉवर डेवलपमेंट कारपोरेशन के सचिव आयुक्त हिरदेश कुमार ¨सह ने कई दशकों से बिजली की व्याप्त समस्या के समाधान के लिए 2.91 करोड़ की लागत से बनने वाले 33 केवी के रिसी¨वग स्टेशन के निर्माण कार्य की नींव रखी। बिजली की समस्या के समाधान में इतनी बड़ी सौगात मिलते ही स्थानीय लोग खुशी से झूम उठे और उन्होंने आयुक्त एवं सरकार का आभार जताया। स्थानीय निवासी पूंड ब्लॉक के चेयरमैन शंकर सिंह, द्रमण की सरपंच मधुबाला हट्ट के नायब सरपंच भूपेंद्र सिंह, सुरेश कुमार आदि ने कहा कि बैक टू विलेज कार्यक्रम विकास के लिए वरदान साबित हुआ। अगर इस तरह का कार्यक्रम नहीं होता तो शायद दशकों पुरानी समस्सा का समाधान अभी भी नहीं होता।

पूर्व में आयोजित बैक टू विलेज के दौरान इस समस्या को प्रमुखता से उठाया गया था। सरकार को इस तरह के कार्यक्रम जारी रखने चाहिए, ताकि गांव में आकर अधिकारी उनकी समस्याओं को करीब से जाने और उन्हें समस्या से पेश आ रही परेशानी का भी अहसास होगा। सिर्फ बिजली की समस्या ही नहीं और भी समस्याओं के समाधान के लिए अधिकारियों ने फंड जारी करने की घोषणा की।

रिसीविंग स्टेशन के निर्माण से 15 हजार आबादी को मिलेगा लाभ

रिसीविंग स्टेशन के निर्माण से चार पंचायतों की करीब 15 हजार आबादी को लाभ मिलेगा। इसमें गांव द्रमण, कछीड़, सियारा, खड्डी, करड़ोह, चमूंड, हट्ट, माश्का, सलान आदि गांवों में लोगों को अब बिजली की आए दिन बार-बार कटौती की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। उक्त आबादी को अब निर्विघ्न बिजली आपूर्ति मिलेगी। सबसे ज्यादा लाभ क्षेत्र में होने वाली बर्फबारी के दौरान भी आपूर्ति सुचारु रहने की सुविधा मिलेगी।

बर्फबारी के कारण कई-कई दिनों तक पूंड रिसी¨वग स्टेशन से होने वाली आपूर्ति लाइन लंबी होने के कारण रिपेयर कार्यो के लिए बाधा आती थी। इससे कई-कई दिनों तक लोगों को बिना बिजली के ही रहना पड़ता था। मौसम साफ होने के बाद ही रिपेयर कार्य चलता था, अब स्थानीय गांव में ही स्टेशन बनने से नजदीक आपूर्ति लाइन होने से समस्या नहीं आएगी। वोल्टेज भी सही रहेगी।

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