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Kathua Encounter: जब आतंकियों को खदेड़ने के लिए जवानों ने ताबड़तोड़ किए 5100 राउंड फायर, डर के मारे उल्टे पांव भागे दहशतगर्द

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में सोमवार को आतंकियों (Kathua Terror Attack) ने हमला किया। इस हमले में पांच जवान बलिदान हुए थे। वारदात के दौरान सैनिकों ने बताया कि उन्होंने आतंकियों पर पांच हजार से भी ज्यादा राउंड फायर किए थे। एक जवान का हाथ पूरी तरह से घायल हो गया था। बावजूद इसके उसने आतंकियों को खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

By Jagran News Edited By: Prince Sharma Wed, 10 Jul 2024 10:30 PM (IST)
Kathua Encounter में जवानों ने अपना अदम्य साहस दिखाया (जागरण फोटो)

पीटीआई, जम्मू। बीती आठ तारीख को कठुआ में जवानों पर दहशतगर्दों ने हमला किया। उस दौरान घटनास्थल पर क्या हुआ था। इसके बारे में अधिकारियों ने घायल जवानों से बात की।

अफसरों ने बताया कि जब भारी हथियारों से लैस हमलावरों ने उनके काफिले पर घात लगाकर हमला किया तो वे हैरान रह गए, लेकिन उन्होंने तुरंत ही खुद को संभाल लिया और आतंकियों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया।

पांच हजार से ज्यादा किए फायर

22 गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने अपने घायल साथियों की रक्षा के लिए 5,100 से अधिक राउंड फायर किए और आतंकवादियों को कठुआ की जंगली पहाड़ियों में पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में हुए आतंकी हमले में पांच सैन्यकर्मी बलिदान हो गए थे, जबकि पांच जवान घायल हो गए थे। अधिकारियों ने बताया कि हमले के समय लगातार दो घंटे तक फायरिंग होती रही थी।

आतंकवादियों ने जम्मू क्षेत्र के कठुआ जिला मुख्यालय से करीब 150 किलोमीटर दूर बदनोटा गांव के पास मचेड़ी-किंडली-मल्हार पहाड़ी मार्ग पर सेना के दो वाहनों पर गोलीबारी की थी। गोलीबारी का सामना कर रहे सैनिकों ने कड़ा मुकाबला किया और आतंकियों को खदेड़ने तथा उनके खात्मे के लिए लगातार फायरिंग की।

सैनिकों से वार्ता कर रहे अधिकारी

अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद साक्ष्यों, खून से सने हेलमेट, गोलियों के खोखे और टूटी विंडस्क्रीन और पंचर टायर वाले वाहनों की जांच कर रहे हैं। इसके साथ ही घायल सैनिकों से बात कर यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि 8 जुलाई की दोपहर को क्या हुआ।

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एक अधिकारी ने बताया कि वहां तीन लोगों का एक समूह था। आतंकवादियों ने दो अलग-अलग स्थानों पर खुद को तैनात किया और वाहनों तथा सेना के जवानों को निशाना बनाया। यह हमला दोपहर करीब 3.30 बजे शुरू हुआ था।

आतंकवादियों को भागने पर होना पड़ा मजबूर

एक अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करने के बावजूद, भारतीय सेना के गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने आतंकवादियों पर 5,189 राउंड की गोलाबारी की, जिससे उन्हें घटनास्थल से भागने पर मजबूर होना पड़ा।

घायल जवानों का पठानकोट के सेना अस्पताल में इलाज चल रहा है। इनमें राइफलमैन कार्तिक सिंह भी शामिल हैं। आतंकवादियों द्वारा दागे गए ग्रेनेड के छर्रे से उनका दाहिना हाथ कई जगहों पर छिल गया था, लेकिन वे हार नहीं माने और अपने बाएं हाथ से तब तक गोलीबारी करते रहे, जब तक कि उनका हथियार जाम नहीं हो गया।

उन्होंने बताया कि सटीक और निरंतर जवाबी फायरिंग ने आतंकवादियों में दहशत पैदा कर दी जिसके बाद उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। बलिदान जवानों में में उत्तराखंड के नायब सूबेदार आनंद सिंह, हवलदार कमल सिंह, नायक विनोद सिंह, राइफलमैन अनुज नेगी और राइफलमैन आदर्श नेगी शामिल थे।

सैनिकों का नेतृत्व जूनियर कमीशन अधिकारी नायब सूबेदार आनंद सिंह ने किया। जब वे वापस लड़ रहे थे, तो 22 गढ़वाल रेजिमेंट के जवानों ने युद्ध का नारा "बद्री विशाल की जय" (भगवान बद्रीनाथ के पुत्रों की जय) लगाया और अदम्य साहस के साथ आतंकियों को खदेड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।

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