यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Kashmiri Potter Girl: कश्मीर की पारंपरिक कला को जीवंत करने में जुटी साइमा शफी
Kashmiri Potter Girl यह सच है कि कश्मीर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कोई इंस्टीट्यूट नहीं है। उसे उम्मीद ...और पढ़ें

जम्मू, राज्य ब्यूरो: जम्मू-कश्मीर के लोक निर्माण विभाग में सिविल इंजीनियर साइमा शफी की पहचान कश्मीर घाटी में कराल करूर, पोटर गर्ल के नाम से बन रही है। वह मिट्टी के बर्तन बनाकर सदियों पुरानी विरासत को कश्मीर की रसोइयों में वापिस ला रही है।
बेंगलुरु शैली को जोड़ कर मिट्टी के बर्तन बनाने का हुनर सीख चुकी साइमा ने तनाव से भागने के लिए इसकी शुरुआत की थी। दक्षिण कश्मीर के गांव में तैनात साइमा कहती है कि बचपन में ही वह मिट्टी के खिलौने बनाने में दिलचस्पी रखती थी। मैं कुछ अलग करना चाहती थी। बचपन में मैं मिट्टी के खिलौने बनाया करती थी। मुझे इस रास्ते पर आगे बढ़ने में काफी मुश्किलें आई। बर्तन बनाने के लिए आधुनिक उपकरणों की जरूरत थी जिसके लिए धनराशि चाहिए थी। इसमें बिजली से चलने वाला पहिया, गैस की भट्ठी, आदि कश्मीर में मौजूद नहीं थे। उपकरण आनलाइन मंगवाने के लिए निर्भर थी।

मैने सभी उपकरण इकट्ठा करने के प्रयास किए और वो भी तब जब कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट की स्पीड टू जी थी। कश्मीर में सिर्फ टेराकोटा मिट्टी के उपलब्ध होने का मुद्दा बन गया क्योंकि इसे माइक्रोवेब में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। हालांकि हरियाणा में स्टोनवेयर मिट्टी है जो मिट्टी के बर्तन बनाने वाले पहिया पर अच्छी तरह से प्रयोग हो जाती है। इससे बनाए गए बर्तन माइक्रोवेब में भी इस्तेमाल हो सकते है। मिट्टी के बर्तन बनाने में माहिर लोग कश्मीर में नहीं है।
साइमा ने कहा कि जब उसने इसकी तलाश की तो पता चला कि बेंगलुरु में ऐसे हुनरमंद अध्यापक है जो मिट्टी के बर्तन बनाना सिखा सकते हैं। मैने वहां कोर्स किया और इंस्टीट्यूट के लाेग इसलिए उत्सुक थे कि कश्मीर की एक सिविल इंजीनियर मिट्टी के बर्तन बनाना सीखने आई है। वहां पर मैने देखा कि छह साल से लेकर सत्तर साल तक की महिलाएं बर्तन बनाना सीख रही थी। वहां पर लड़कियां अपने शौक के लिए नहीं सीख रही थी बल्कि उद्यमी बनना चाहती थी।
यह सच है कि कश्मीर में मिट्टी के बर्तन बनाने वाला कोई इंस्टीट्यूट नहीं है। उसे उम्मीद है कि एक दिन वह अपना इंस्टीट्यूट बनाएगी जिसमें सारी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साइमा कश्मीर में मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को प्रोत्साहित करने में जुटी हुई है।
