अनंतनाग, पीटीआइ। करतारपुर कॉरिडोर के बाद अब ऐसी ही मांग जम्‍मू-कश्‍मीर में कश्‍मीरी पंडित भी कर रहे हैं। कश्‍मीरी पंडितों का कहना है कि जब करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण हो सकता है, तो पाकिस्‍तान अधिकृत कश्‍मीर में स्थित शारदा देवी मंदिर के लिए गलियारा क्‍यों नहीं बनाया जा सकता? इस मांग को लेकर लगभग 200 कश्‍मीरी पंडितों ने रविवार को अनंतनाग में विरोध प्रदर्शन किया।

कश्‍मीरी पंडितों की मांग है कि करतारपुर गलियारे की तर्ज पर शारदा देवी पीठ के लिए एक मार्ग पारित किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने पीओके के मार्ग को फिर से खोलने के समर्थन में नारे लगाए। शारदा पीठ एलओसी के करीब नीलम नदी के साथ लगे शारदा गांव में स्थित है। एक समय यह शिक्षा का बड़ा केंद्र था और शारदा देवी पीठ दक्षिण एशिया के 18 अत्यधिक श्रद्धेय और विश्व विख्यात मंदिरों में शामिल है।

अनंतनाग में यह विरोध प्रदर्शन विस्थापित कश्मीरी हिंदूओं की सर्वदलीय प्रवासी समन्वय समिति (एपीएमसीसी) के द्वारा किया गया। एपीएमसीसी के प्रमुख विनोद पंडित और इसके सदस्य पिछले दस वर्षों से मंदिर को फिर से खोले जाने के लिए प्रयास कर रहे हैं। वहीं एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि कश्मीर के पंडितों का एक बड़ा विश्वास है कि आजकल कश्मीर में जो भी खून या तबाही है, वो अपनी प्रमुख देवी शारदा माता की उपेक्षा के कारण है। इसलिए जल्‍द से जल्‍द इस गलियारे को निर्माण होना चाहिए।

गौरतलब है कि हाल ही में उपराष्ट्रपति एम.वेंकैया नायडू और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने पंजाब के गुरदासपुर जिले में करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के गलियारे की आधारशिला रखीं थी। इस गलियारे को लेकर एक आधारशिला पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के द्वारा भी रखी गई है।

दोनों मुल्कों के बीच परंपरागत रास्ते खोले जाएं : फारूक

श्रीनगर : नेशनल काफ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि करतारपुर गलियारे को जिस भावना से खोला गया है, उसी भावना के तहत भारत व पाकिस्तान सरकार को राज्य में अंतरराष्ट्रीय सीमा (आइबी) व नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर स्थित सभी रास्तों को खोल देना चाहिए। दोनों मुल्कों के लोगों में जितना संवाद होगा और दोस्ती होगी, उतना ही आसान दो मुल्कों के बीच लटके पड़े सभी मसलों का हल होगा। उन्होंने जम्मू कश्मीर के लिए स्वायत्तता का समर्थन करते हुए कहा कि हम पर राज्य के हितों से खिलवाड़ का आरोप लगाने वाले सज्जाद गनी लोन के पिता ही कश्मीर में बंदूक लेकर आए थे। रविवार को उत्तरी कश्मीर में जिला बारामुला के दीवान बाग में पहले एक सभा और उसके बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए डॉ. फारूक ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि मैं भारत व पाकिस्तान की हुकूमत से अपील करता हूं कि दोनों मुल्कों के बीच सभी परंपरागत रास्ते खोले जाएं। इससे सरहद के दोनों तरफ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के अलावा भारत और पाकिस्तान के बीच दोस्ती बढ़ेगी। दोनों तरफ के लोगों के बीच संवाद-संपर्क और विश्वास बहाली के अन्य कदमों से दोनों मुल्कों के बीच जो अविश्वास की भावना है, वह समाप्त हो जाएगी।

 

Posted By: Tilak Raj

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