जम्मू, राज्य ब्यूरो। कश्मीर में आतंकवाद के चलते वहां नियंत्रण रेखा से सटे इलाकों से पलायन कर जम्मू, देश में अन्य हिस्सों में बसे कश्मीरी विस्थापितों काे 23 सालों के बाद फिर सरकारी नौकिरयों, प्रोफेशनल कालेजों के दाखिलों में एलओसी, पिछड़े इलाकों का निवासी होने का लाभ मिलेगा। 

राज्यपाल प्रशासन ने एलओसी की तर्ज पर आईबी के निवासियों को भी तीन प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने के साथ सुरक्षा कारणों से पलायन कर आए कश्मीर के दूरदराज इलाकों के कई परिवारों को मिलने वाले रेजीडेंट आफ बैकवर्ड एरिया, नियंत्रण रेखा पर बसे होने का यह लाभ बहाल कर दिया। राज्य सरकार ने इस संबंध में आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि ऐसे कश्मीरी पंडित विस्थापित चाहे देश में कहीं भी बसे हों, उन्हें सरकारी नोकरियों, प्रोफेशनल कालेजों आदि में 3 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। अलबत्ता इस आरक्षण का लाभ लेने के लिए विस्थापितों का रिलीफ कमिश्नर कार्यालय के साथ पंजीकरण होना जरूरी है।

कश्मीरी पंडितों के साथ गैर कश्मीरी हिन्दू भी होंगे हकदार

वर्ष 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के चलते बड़े पैमाने पर पलायन हुआ था। सुरक्षा कारणों से पलायन करने वालों में कश्मीरी पंडितों के साथ कई सिख, गैर कश्मीरी हिंदू व मुस्लिम परिवार भी शामिल थे। इनमें खासे ऐसे परिवार भी थे जाे पिछड़े क्षेत्रों व नियंत्रण रेखा से सटे इलाकाें में रहते थे। वर्ष 1996 के बाद इन परिवारों को नियंत्रण रेखा, पिछड़े इलाकों के निवासी होने का आरक्षण मिलना बंद हो गया था। इसके बाद विशेषतौर पर कश्मीरी पंडित यह मुद्दा जोरशोर से उठा रहे थे। राज्य में राष्ट्रपति शासन के चलते उनकी इस मांग को मान लिया गया।

पंद्रह साल से आईबी पर रहने वालाें को ही मिलेगा आरक्षण

इससे पहले राज्यपाल प्रशासन ने आईबी पर पाकिस्तानी की गोलाबारी का सामना करने वाले लोगों को भी एलओसी पर बसे लोगों की तर्ज पर यह आरक्षण देने की मांग स्वीकार की थी। लेकिन सरकार आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि आरक्षण का लाभ आईबी के सिर्फ उन परिवारों को ही मिलेगा जो पिछले पंद्रह सालों से आईबी पर ही रह रहे हों। वहां से पलायन कर अन्य जगहों पर बस गए परिवारों को इस आरक्षण का लाभ नही मिलेगा।

देश के किसी राज्य में बसे कश्मीरी विस्थापित भी आरक्षण के हकदार

वहीं दूसरी ओर कश्मीर से सुरक्षा कारणों से पलायन करने वाले परिवारों के लिए ऐसी शर्त नही है। कश्मीरी विस्थापित सुरक्षा कारणों से चाहे इस समय देश के किसी भी हिस्से में रह रहे हों, वे इस आरक्षण का लाभ लेने के हकदार हैं। इस बारे में जगटी में बसे कश्मीरी पंडितों के संगठन के प्रधान एसएल पंडिता ने जागरण को बताया कि आरबीए का लाभ बहाल करने का मुद्दा कश्मीरी पंडित पिछले कई सालों से उठा रहे थे। वर्ष 1996 तक जम्मू, अन्य जगहों पर उन्हें यह लाभ मिलता था। लेकिन बाद में समाज कल्याण विभाग ने यह लाभ देना बंद कर दिया था। यह मुद्दा राज्य, केंद्र सरकार से भी उठाया गया था। अब इस पर कार्रवाई हुई है।

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Posted By: Rahul Sharma