घाटी में अलग 'होमलैंड' की मांग, सड़कों पर उतरे कश्मीरी हिंदू; 'नरसंहार कानून' लागू करने की उठाई मांग
विस्थापित कश्मीरी हिंदू समाज ने जम्मू में सुरक्षित घाटी वापसी, रोजगार पैकेज और राहत राशि बढ़ाने की मांग को लेकर ...और पढ़ें
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घाटी में कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित वापसी को लेकर प्रदर्शन।
HighLights
कश्मीरी हिंदुओं ने सुरक्षित घाटी वापसी और रोजगार पैकेज की मांग की
पनुन कश्मीर ने नरसंहार मान्यता और होमलैंड के लिए ज्ञापन सौंपा
लंबित एक्स-ग्रेशिया राशि और पीएम पैकेज कर्मियों की सुरक्षा मांगी
जागरण संवाददाता, जम्मू। विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की सुरक्षित घाटी वापसी, विशेष रोजगार पैकेज की घोषणा तथा राहत राशि बढ़ाने समेत अन्य मांगों को लेकर कश्मीरी हिंदू समाज के सदस्य शुक्रवार को फिर से सड़क पर उतरे।
प्रदर्शनी मैदान के बाहर उन्होंने जोरदार प्रदर्शन किया। यूथ आल इंडिया कश्मीरी समाज के बैनर तले प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होगी, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
इस बीच पनुन कश्मीर ने कश्मीरी पंडित समुदाय के विस्थापन के लंबित मुद्दे के राजनीतिक, संवैधानिक और कानूनी समाधान की मांग को दोहराते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है।
संगठन के महासचिव कुलदीप रैना ने संगठन की ओर से प्रधानमंत्री को यह ज्ञापन सौंपा। 20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर पनुन कश्मीर के प्रदर्शन के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय को सौंपे गए ज्ञापन की कड़ी में है।
ज्ञापन में संगठन ने तीन प्रमुख मांगों को केंद्र के समक्ष रखा है। इनमें कश्मीरी हिंदुओं के नरसंहार को औपचारिक मान्यता देना, व्यापक जनसंहार कानून बनाना और घाटी में कश्मीरी हिंदू समुदाय के लिए अलग, सुरक्षित तथा संवैधानिक रूप से संरक्षित होमलैंड की स्थापना शामिल है। संगठन ने 2020 में प्रस्तावित अपने नरसंहार बिल को लागू करने की मांग भी दोहराई।
पनुन कश्मीर का कहना है कि व्यापक घरेलू कानूनी ढांचे के अभाव में कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन को मुख्यत माइग्रेशन, राहत और पुनर्वास जैसी प्रशासनिक शब्दावली तक सीमित कर दिया है। पनुन कश्मीर ने हिंसा के दौर में जले या नष्ट मकानों और संपत्तियों से संबंधित लंबित एक्स-ग्रेशिया राशि जारी करने की मांग भी की है।
संगठन का दावा है कि प्रभावित मामलों में घोषित राशि का लगभग 50 प्रतिशत ही प्रभावी रूप से भुगतान किया है और शेष राशि तीन दशक से अधिक समय से लंबित है। प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्त और वर्तमान में कश्मीर में कार्यरत कश्मीरी हिंदू कर्मियों की सुरक्षा का मुद्दा ज्ञापन में उठाया है।
पनुन कश्मीर ने सभी कर्मचारियों का तत्काल सुरक्षा आकलन कराने और उन्हें सामूहिक रूप से घाटी से बाहर स्थानांतरित करने की मांग की है।
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