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सर्दियों में बर्फबारी नहीं बनेगी बागवानों की राह में बाधा, चिनाब पुल पर 100 KM की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेन

Published: Sat, 17 Oct 2026 11:37 AM (IST)

कश्मीर घाटी को देश से जोड़ने वाला उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक अब पूरी तरह चालू हो गया है। चिनाब पुल के ...और पढ़ें

चिनाब पुल से बागवानों को हर मौसम में फायदा।

चिनाब पुल से बागवानों को हर मौसम में फायदा।

HighLights

  1. चिनाब पुल के साथ USBRL अब पूरी तरह चालू

  2. बर्फबारी, भूस्खलन में भी कश्मीर की कनेक्टिविटी बनी रहेगी

  3. व्यापार, पर्यटन को बढ़ावा, वंदे भारत की गति बढ़ी

डिजिटल डेस्क, जम्मू। कश्मीर घाटी को देश के बाकी हिस्सों से हर मौसम में जोड़े रखने का बरसों पुराना सपना अब पूरा हो गया है। चिनाब नदी पर बने दुनिया के सबसे ऊंचे रेल पुल के साथ उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) पूरी तरह चालू हो चुका है।

6 जून, 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (USBRL) के उद्घाटन किया गया था। अब इससे घाटी और राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के बीच सीधी कनेक्टिविटी स्थापित हो चुकी है।

इस नए रेल रूट से पीर पंजाल की दुर्गम पहाड़ियों की रुकावटें खत्म हो गई हैं। अब चाहे भारी बर्फबारी हो या भूस्खलन, कश्मीर से देश का संपर्क कभी नहीं टूटेगा। यह ट्रेन नेटवर्क कश्मीर के व्यापार, पर्यटन और स्थानीय लोगों के जीवन के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है। आज हम इस ब्रिज के फायदों के बारे में जानते हैं।

दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज

रियासी में चिनाब नदी के तल से 359 मीटर की ऊंचाई पर बना यह पुल 1,315 मीटर लंबा है। यह सिस्मिक जोन V (भूकंप क्षेत्र) में बना है और 266 किमी/घंटा की हवा और 40 किलो TNT धमाके को आसानी से झेल सकता है।

कितने करोड़ में बना है ये ब्रिज?

रिपोर्ट के अनुसार ये ब्रिज 580 करोड़ रुपये की लागत से बना है। जो भारत का पहला केबल-स्टेयड रेल ब्रिज है, जो 331 मीटर ऊंचा है और इसमें 96 केबल लगे हैं।

वंदे भारत की बढ़ी स्पीड

नए रेल ट्रैक पर श्रीनगर और जम्मू के बीच चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस की रफ्तार 70 किमी/घंटा से बढ़ाकर 100 किमी/घंटा कर दी गई है। वर्तमान में इस रूट पर रोजाना 6 मालगाड़ियां और यात्री ट्रेनें फर्राटा भर रही हैं।

सफर का समय आधा हुआ

कश्मीरी सेब को पहले सड़क से दिल्ली पहुंचने में 30-35 घंटे लगते थे, जो अब रेल से केवल 20-22 घंटे में पहुंच रहा है। वहीं मुंबई तक चेरी की डिलीवरी का समय 47 घंटे से घटकर सिर्फ 30-32 घंटे रह गया है।

हजारों टन सामान की आवाजाही

रेल सेवा शुरू होने के बाद से 20,000 टन से ज्यादा सेब देश के बाजारों में भेजे जा चुके हैं। इसके अलावा 1.5 लाख टन सीमेंट, अनाज, पेट्रोल और गाड़ियां भी रेल से घाटी पहुंच चुकी हैं।

सर्दियों में भी नहीं रुकेगा व्यापार

सर्दियों में बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो जाती थीं, लेकिन अब सेब, चेरी, सब्जियां और हस्तशिल्प (Handicraft) बिना किसी रुकावट के पूरे साल देश भर में भेजे जा सकेंगे।

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