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जम्मू-कश्मीर: स्मार्ट शहर के दावों की हकीकत, कागजों में तैर रहे 10 करोड़ रुपये; जमीन पर डूब रही जिंदगी

Published: Sat, 17 Oct 2026 11:02 AM (IST)

जम्मू में स्मार्ट सिटी के दावों के बावजूद, वजीर लेन और दुर्गा नगर में भारी बारिश से जलभराव हुआ। 10 ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर: स्मार्ट शहर के दावों की हकीकत (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर: स्मार्ट शहर के दावों की हकीकत (फाइल फोटो)

HighLights

  1. स्मार्ट सिटी जम्मू में जलभराव से लोगों को भारी नुकसान।

  2. 10 करोड़ रुपये के बावजूद नाला जीर्णोद्धार का काम ठप।

  3. संकरे नालों और प्रशासनिक सुस्ती से बढ़ी जलभराव समस्या।

स्मार्ट शहर के दावों की हकीकत... कागजों में तैर रहे 10 करोड़ रुपये, जमीन पर डूब रही जिंदगी
नगर निगम की सुस्ती की सुस्ती के बीच रविवार को हुई मूसलधार बारिश ने एक बार फिर दर्जनों परिवारों की जिंदगी भर की कमाई पर फेरा पानी
:::नंबर गेम:::
41 नंबर वार्ड की वजीर लेन, 40 के दुर्गा नगर की गलियों में विकास की जगह बहता है नाले का गंदा पानी
2 और नालों को मुख्य नाले में जोड़ने से पेश आई समस्या, संकरी जगह होने पानी वापस मुड़ गया बस्तियों में
2 वार्ड में रहने वाले लोगों में गुस्सा, बोले-यह नहीं कोई प्राकृतक आपदा, प्रशासन की ओर से लाई गई है तबाही
:::आसमानी आफत-3 :::
जागरण संवाददाता, जम्मू : शहर को स्मार्ट बनाने के दावों की जमीनी हकीकत देखनी हो तो वार्ड 41 की वजीर लेन और वार्ड 40 के दुर्गा नगर चले आइए। यहां की गलियों में विकास नहीं, बल्कि नाले का गंदा पानी बहता है। विगत रविवार को आसमान से बरसी आफत ने एक बार फिर दर्जनों परिवारों की जिंदगी भर की कमाई पर पानी फेर दिया। घरों में घुसा कई-कई फुट कीचड़ भरा पानी सामान को बहाने के साथ प्रशासनिक संवेदनहीनता के उस खोखलेपन को भी उजागर कर गया, जो हर साल महज आश्वासनों का मरहम लगाकर गायब हो जाता है।
स्थानीय लोगों का गुस्सा इस बात पर है कि यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि प्रशासन की लाई हुई तबाही है। क्षेत्र से गुजरने वाले मुख्य नाले की चौड़ाई और गहराई पहले से ही नाकाफी थी। उस पर अद्भुत इंजीनियरिंग का नमूना पेश करते हुए पीछे से दो और नालों का रुख इसी संकरे नाले की तरफ मोड़ दिया गया। आगे जाकर मंदिर के पास नाला और संकरा हो जाता है। नतीजा यह हुआ कि पानी आगे बढ़ने के बजाय वापस बस्तियों में घुस गया।

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10 करोड़ की मंजूरी, फिर भी सुस्त चाल
हैरानी की बात यह है कि इस नाले के जीर्णोद्धार और चौड़ीकरण के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि मंजूर हो चुकी है। बावजूद इसके जमीनी स्तर पर एक ईंट तक नहीं हिली। फाइलों में दौड़ती मंजूरी लोगों के आंसुओं को पोंछने में नाकाम साबित हुई है। हर बरसात में बर्बाद होना इन दोनों वार्डों के बाशिंदों की नियति बन गई है। स्थानीय लोगों की सीधी मांग है कि नाले को चौड़ा और गहरा करने के साथ ही किनारों को सड़क की सतह से पर्याप्त ऊंचा उठाया जाए, ताकि पानी ओवरफ्लो होकर रिहायशी इलाकों में घुसे।
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रविवार की सुबह हमारे लिए किसी खौफनाक मंजर से कम नहीं थी। देखते ही देखते गंदा पानी कमरों में घुस गया। सोफा, फ्रिज, राशन, सब तैर रहा था। मेहनत की कमाई से एक-एक चीज जोड़ी थी। चंद घंटों में सब कबाड़ बन गया। प्रशासन सिर्फ तमाशा देखता है।
-अशोक सिंह, स्थानीय निवासी


हर बारिश में हमारे दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं। जब पीछे से दो और नालों का पानी इधर मोड़ा गया, तभी हमने चेताया था कि यह संकरा नाला इतना दबाव नहीं झेल पाएगा। मंदिर के पास जाकर नाला नाली बन जाता है। हमारी चेतावनी को फाइलों के नीचे दबा दिया गया, जिसका खामियाजा आज हम भुगत रहे हैं।
-राकेश शर्मा, स्थानीय निवासी

10 करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं। काम जमीनी स्तर पर कब पूरा होगा? क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है? बच्चे रात-रात भर जागकर बाल्टियों से गंदा पानी बाहर फेंकते रहे, इस जिल्लत का जिम्मेदार कौन है? कभी यह नाला दर्जनों मीटर चौड़ा था। सरकारी अनदेखी के चलते यह संकरा हो गया है।
-संजीव गुप्ता, स्थानीय निवासी

अब तो बारिश के नाम से ही खौफ है। बुजुर्गों और बीमारों को उठाकर सुरक्षित छतों पर पहुंचाना पड़ा। जब तक नाले को गहरा कर किनारों की दीवारें ऊंची नहीं होंगी, तब तक कभी चैन से नहीं सो पाएंगे। नाले की मुख्य पुली को भी ऊंचा करने की जरूरत है। दावे करने के बजाय जमीन पर काम दिखना चाहिए।
-अशोक सिंह, स्थानीय निवासी
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वजीर लेन से नीचे नाले का काम जारी है। ऊपर के हिस्से में भी काम शुरू किया था, लेकिन बारिश से सब खराब हो गया। दोबारा काम शुरू किया जा रहा है। नाले की सुरक्षा दीवार समेत अन्य संबंधित कार्य किए जाएंगे। फिर जलभराव की समस्या नहीं रहेगी। अपितु नालों की भी अपनी एक क्षमता रहती है। ज्यादा बारिश होने पर कोई कुछ नहीं कर सकता। बेशक नालों की चौड़ाई पहले जैसी नहीं रही। जो है, उसी में काम होगा।
-अश्विनी खजूरिया, एक्सइएन, यूइइडी