कश्मीर के ‘रॉयल ट्री’ चिनार की सुरक्षा का होगा ऑडिट, 30 हजार पेड़ों के सर्वे के बाद शाही विरासत बचाने की चुनौती
कश्मीर प्रशासन ने 'रॉयल ट्री' चिनार की सुरक्षा के लिए ऑडिट का आदेश दिया है, ताकि तेज हवाओं से कमजोर ...और पढ़ें
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कश्मीर में चिनार के पेड़ों पर बड़ा प्रशासनिक एक्शन।
HighLights
चिनार पेड़ों की सुरक्षा के लिए ऑडिट का आदेश
कमजोर शाखाओं से जान-माल के नुकसान का खतरा
30 हजार पेड़ों का सर्वेक्षण, विरासत संरक्षण
नवीन नवाज, जम्मू। कश्मीर की पहचान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माने जाने वाले ‘रॉयल ट्री’ चिनार की सुरक्षा को लेकर प्रशासन ने कदम बढ़ाया है।
तेज हवाओं में पुराने चिनार की कमजोर शाखाएं टूटकर गिरने से जान-माल को होने वाले नुकसान की आशंका के बीच मंडलायुक्त कश्मीर अंशुल गर्ग ने घाटी में चिनार के पेड़ों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं।
सभी जिला उपायुक्तों और वन विभाग को पेड़ों की स्थिति का आकलन करने तथा खोखली, जर्जर और कमजोर शाखाओं की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया है
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब कश्मीर में चिनार के संरक्षण को लेकर गंभीरता बढ़ रही है। विभागीय जानकारी के हवाले से प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, घाटी में करीब 30 हजार चिनार के पेड़ों का सर्वे किया जा चुका है।
सर्वे के दौरान कुछ पेड़ों में बीमारी और क्षति से संबंधित चिंताएं दर्ज की गई थीं। ऐसे में सुरक्षा ऑडिट को पेड़ों की मौजूदा स्थिति का आकलन करने और संभावित खतरों की समय रहते पहचान करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चिनार की विशाल शाखाएं कई जगहों पर सड़कों, सार्वजनिक भवनों, बाजारों और रिहायशी इलाकों तक फैली हुई हैं। तेज हवाओं या खराब मौसम के दौरान कमजोर शाखाओं का टूटकर गिरना राहगीरों, वाहनों और आसपास की संपत्ति के लिए खतरा बन सकता है।
प्रशासन की कवायद का उद्देश्य ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जोखिम वाले पेड़ों की पहचान करना और जरूरत के मुताबिक समय रहते कदम उठाना है।
कानूनी पहचान भी, कश्मीर की रूह से जुड़ा रिश्ता भी
चिनार को जम्मू-कश्मीर में ‘रॉयल ट्री’ यानी शाही वृक्ष के रूप में जाना जाता है। यह केवल एक विशाल छायादार पेड़ नहीं, बल्कि घाटी की ऐतिहासिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
जम्मू-कश्मीर भूमि राजस्व अधिनियम, 1939 की धारा 36 में चिनार को विशेष प्रावधानों के तहत सूचीबद्ध किया गया है। इसके संरक्षण और कटाई से संबंधित मामलों में लागू नियमों तथा आवश्यक अनुमतियों का पालन महत्वपूर्ण है।
कश्मीर में चिनार का महत्व सरकारी दस्तावेजों या ऐतिहासिक उद्यानों तक सीमित नहीं है। गांवों के चौक, पुराने बाग, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थान लंबे समय से इन पेड़ों की छाया से जुड़े रहे हैं।
गर्मियों में इनके नीचे बैठना और शरद ऋतु में पत्तियों का लाल, नारंगी और सुनहरे रंग में बदलना घाटी के जनजीवन और प्राकृतिक सौंदर्य का हिस्सा है। कश्मीरी साहित्य, कला और हस्तशिल्प में भी चिनार की पत्ती को खास स्थान मिला है।
यही वजह है कि चिनारों की सुरक्षा का सवाल लोगों के लिए भावनात्मक महत्व भी रखता है। पुराने पेड़ों को बचाना कश्मीर की उस विरासत को सुरक्षित रखने जैसा है, जो पीढ़ियों से घाटी के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा रही है।
मुगलकाल से जुड़ी है चिनार की विरासत
कश्मीर में चिनार के पेड़ों का इतिहास सदियों पुराना है। मुगलकाल में घाटी के बागों और उद्यानों में चिनार लगाने की परंपरा को विशेष प्रोत्साहन मिला। श्रीनगर के ऐतिहासिक मुगल उद्यानों में आज भी विशाल चिनार उस दौर की बागवानी परंपरा की याद दिलाते हैं। समय के साथ ये पेड़ शाही उद्यानों से आगे बढ़कर घाटी के गांवों, कस्बों और सार्वजनिक स्थलों की पहचान बन गए।
चिनार का महत्व इसकी उम्र और आकार से भी जुड़ा है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के चत्तरगाम में मौजूद एक प्राचीन चिनार को करीब 650 वर्ष पुराना बताया जाता है। ऐसे पेड़ कश्मीर की प्राकृतिक विरासत के जीवंत उदाहरण हैं और इनके संरक्षण के लिए विशेष देखभाल की जरूरत होती है।
30 हजार पेड़ों के सर्वे के बाद अगली चुनौती
करीब 30 हजार चिनार के पेड़ों के सर्वे का आंकड़ा घाटी में इस विरासत के व्यापक महत्व को रेखांकित करता है। हालांकि, सर्वे और सुरक्षा ऑडिट का उद्देश्य अलग-अलग हो सकता है। सर्वे में पेड़ों की पहचान और उनकी स्थिति का व्यापक आकलन किया जाता है, जबकि सुरक्षा ऑडिट में उन पेड़ों और शाखाओं पर विशेष ध्यान दिया जाता है, जिनसे तत्काल खतरा पैदा हो सकता है।
चिनारों की सेहत पर उम्र, बीमारी, कीटों और आसपास की जमीन में होने वाले बदलावों का असर पड़ सकता है। इसलिए केवल कमजोर शाखाओं की पहचान ही पर्याप्त नहीं होगी। पेड़ों की जड़ों, तने, मिट्टी और समग्र स्वास्थ्य का वैज्ञानिक आकलन भी जरूरी है, ताकि संरक्षण के उपाय प्रभावी साबित हों।
एक हादसे ने पहले भी उठाया था सुरक्षा का सवाल
अप्रैल 2025 में श्रीनगर के ऐतिहासिक अमर सिंह क्लब परिसर में चिनार का एक बड़ा हिस्सा टूटकर चारदीवारी पर गिर गया था। इससे दीवार के एक बड़े हिस्से और गेटों को नुकसान पहुंचा था, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं थी। घटना के बाद क्लब प्रबंधन ने परिसर और उससे सटी सोनवार सड़क के आसपास चिनार के पेड़ों का तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराने की मांग की थी।
यह घटना बताती है कि चिनारों के संरक्षण के साथ उनकी नियमित निगरानी भी जरूरी है। खासकर उन स्थानों पर, जहां पेड़ों की शाखाएं सड़कों, इमारतों या लोगों की आवाजाही वाले क्षेत्रों के ऊपर फैली हुई हैं।
विरासत भी बचे, जान-माल भी सुरक्षित रहे
मंडलायुक्त के निर्देशों के बाद अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि सुरक्षा ऑडिट को कितनी व्यवस्थित तरीके से लागू किया जाता है।इसके लिए वैज्ञानिक जांच, सक्षम अधिकारियों की निगरानी और निर्धारित नियमों के अनुसार कार्रवाई जरूरी होगी।
कश्मीर के ‘रॉयल ट्री’ चिनार की सुरक्षा का यह अभियान केवल पेड़ों की शाखाओं की जांच तक सीमित नहीं है। इसके केंद्र में एक ओर लोगों की जान-माल की हिफाजत है, तो दूसरी ओर घाटी की सदियों पुरानी प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी।
चुनौती यही है कि चिनार की शाही पहचान और उसकी हरियाली कायम रहे, साथ ही तेज हवाओं के दौरान किसी संभावित हादसे को समय रहते रोका जा सके।
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