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5वीं के 62% बच्चे दूसरी की किताब नहीं पढ़ पा रहे, जम्मू-कश्मीर में शिक्षा की चिंताजनक तस्वीर;8वीं में भी 40% पिछड़े

Published: Mon, 12 Oct 2026 06:15 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर में स्कूली शिक्षा की नींव कमजोर है, जहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में 5वीं कक्षा के 62% बच्चे दूसरी कक्षा की ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट ने चौंकाया। (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर में सरकारी स्कूलों की रिपोर्ट ने चौंकाया। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. ग्रामीण जम्मू-कश्मीर में 62% पाँचवीं के छात्र कमजोर।

  2. सरकारी स्कूलों में मात्र 21.8% पाँचवीं के छात्र पढ़ पाते हैं।

  3. RGICS रिपोर्ट ने शिक्षा में सुधार की आवश्यकता बताई।

सुरेंद्र सिंह, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में स्कूली शिक्षा की बुनियाद को लेकर चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले करीब 62 प्रतिशत बच्चे दूसरी कक्षा की पुस्तक भी नहीं पढ़ पाते। सरकारी स्कूलों में स्थिति और गंभीर है, जहां कक्षा पांच के केवल 21.8 प्रतिशत विद्यार्थी ही कक्षा दो स्तर का पाठ पढ़ने में सक्षम पाए गए। इसके मुकाबले प्राइवेट स्कूलों में यह आंकड़ा 60.3 प्रतिशत है। यानी दोनों के बीच सीखने के स्तर का अंतर 38.5 प्रतिशत अंक का है।

यह खुलासा राजीव गांधी इंस्टीट्यूट फार कंटेम्परेरी स्टडीज (आरजीआइसीएस) की रिपोर्ट ‘ए न्यू विजन फार जेएंडके एंड ए न्यू स्ट्रेटजिक फार रियलिसिंग दैट विजन’ में हुआ है। रिपोर्ट में शिक्षा क्षेत्र की चुनौतियों का आकलन करते हुए ग्रामीण जम्मू-कश्मीर के लिए वर्ष 2024 के शिक्षा की वार्षिक स्थिति रिपोर्ट (एएसइआर) के आंकड़ों को आधार बनाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार सरकारी स्कूलों में कक्षा पांच के बच्चों की पढ़ने की क्षमता में वर्ष 2022 के मुकाबले मामूली सुधार हुआ है। 2022 में केवल 18.1 प्रतिशत विद्यार्थी कक्षा-दो स्तर का पाठ पढ़ पा रहे थे, जो 2024 में बढ़कर 21.8 प्रतिशत हुआ। निजी स्कूलों में भी यह आंकड़ा 54.9 से बढ़कर 60.3 प्रतिशत हुआ। सुधार के बावजूद सरकारी और निजी स्कूलों के बीच का अंतर कम नहीं हुआ।

आठवीं तक पहुंचकर भी 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे पिछड़े

चिंता सिर्फ कक्षा पांच तक सीमित नहीं है। ग्रामीण जम्मू-कश्मीर में कक्षा तीन के महज 16.7 प्रतिशत विद्यार्थी कक्षा-दो स्तर का पाठ पढ़ पाए। कक्षा आठ में यह अनुपात बढ़कर 58.5 प्रतिशत हुआ, लेकिन इसका अर्थ यह भी है कि 40 प्रतिशत से अधिक बच्चे आठवीं कक्षा में पहुंचने के बाद भी कक्षा-दो स्तर के पाठ को पढ़ने की क्षमता हासिल नहीं कर पाए हैं।

आरजीआइसीएस ने इसे जम्मू-कश्मीर की व्यापक सामाजिक विकास चुनौती से जोड़ते हुए फाउंडेशनल लिटरेसी और न्यूमेरसी पर विशेष जोर देने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण समेत सामाजिक क्षेत्र में पांच वर्षों के दौरान 29,953 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव रखा गया है।

हालांकि, ये आंकड़े वर्ष 2024 के एएसइआर सर्वे पर आधारित हैं और 2026 में जम्मू-कश्मीर में कराया गया कोई नया राज्यव्यापी सर्वेक्षण नहीं हैं।