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जम्मू-कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों के लिए नए नियम लागू, स्थानीय छात्रों को 25% कोटा; नौकरी में भी हिस्सेदारी तय

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Sat, 07 Nov 2026 12:54 PM (GMT+05:30)

जम्मू-कश्मीर सरकार ने निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत दाखिलों और नौकरियों में स्थानीय युवाओं को 25% ...और पढ़ें

J&K के प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई से नौकरी तक स्थानीय युवाओं को फायदा। (AI generated)

J&K के प्राइवेट यूनिवर्सिटी में पढ़ाई से नौकरी तक स्थानीय युवाओं को फायदा। (AI generated)

HighLights

  1. निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय डोमिसाइल को 25% आरक्षण।

  2. विश्वविद्यालयों की स्थापना को समयबद्ध मंजूरी, विशेषज्ञ जांच।

  3. निगरानी हेतु नियामक प्राधिकरण, उल्लंघन पर भारी जुर्माना।

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को प्रोत्साहित करने, उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और स्थानीय युवाओं के शैक्षणिक एवं रोजगार संबंधी हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 अधिसूचित कर दिए हैं। इन नए नियमों के तहत प्रदेश में स्थापित होने वाले निजी विश्वविद्यालयों में प्रत्येक शैक्षणिक कार्यक्रम की स्वीकृत छात्र संख्या में कम से कम 25 प्रतिशत सीटें जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल धारकों के लिए आरक्षित होंगी।

इसके अलावा विश्वविद्यालयों के शिक्षण और गैर-शिक्षण पदों में भी न्यूनतम 25 प्रतिशत नियुक्तियां स्थानीय डोमिसाइल धारकों में से करना अनिवार्य होगा। नए नियामक ढांचे में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए मंजूरी प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने, विशेषज्ञ समिति से प्रस्तावों की जांच कराने और संस्थानों की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने के लिए नियामक प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान किया गया है।

उच्च शिक्षा विभाग की ओर से अधिसूचित ये नियम निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, प्रवेश प्रक्रिया, नियुक्तियों, बुनियादी ढांचे, वित्तीय प्रबंधन और शैक्षणिक संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को नियंत्रित करेंगे। सरकार का प्रयास है कि जम्मू-कश्मीर में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थान निवेश के लिए आगे आएं और प्रदेश में ही विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के अधिक विकल्प उपलब्ध हों।

प्रत्येक पाठ्यक्रम में स्थानीय विद्यार्थियों के लिए 25 प्रतिशत सीटें

नए नियमों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू निजी विश्वविद्यालयों में स्थानीय युवाओं के लिए अनिवार्य 25 प्रतिशत आरक्षण है। प्रत्येक शैक्षणिक कार्यक्रम की स्वीकृत छात्र संख्या में कम से कम एक चौथाई सीटें जम्मू-कश्मीर के डोमिसाइल धारकों के लिए निर्धारित होंगी। इसी तरह शिक्षण पदों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के स्वीकृत पदों में भी कम से कम 25 प्रतिशत अवसर स्थानीय उम्मीदवारों को देने होंगे।

आरक्षित सीटों और पदों का श्रेणीवार वितरण जम्मू-कश्मीर आरक्षण अधिनियम, 2004, आरक्षण नियम, 2005 तथा डोमिसाइल प्रमाणपत्र जारी करने संबंधी नियम, 2020 और समय-समय पर जारी सरकारी निर्देशों के अनुसार किया जाएगा।

हालांकि, निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी डोमिसाइल कोटे की सीटें या पद खाली रहने पर उन्हें अन्य पात्र उम्मीदवारों से योग्यता के आधार पर भरा जा सकेगा। आरक्षित श्रेणियों में पात्र उम्मीदवार उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में सीटों और पदों के हस्तांतरण या अनारक्षण की प्रक्रिया संबंधित नियमों के अनुसार होगी।

निजी विश्वविद्यालयों की मंजूरी के लिए 30 दिन में होगी प्रारंभिक जांच

नए नियमों में निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने के इच्छुक प्रायोजक संस्थानों के आवेदनों के निपटारे के लिए समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है। सरकार आवेदन प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उसकी प्रारंभिक जांच करेगी। इसमें संस्था की पात्रता और निर्धारित कानूनी शर्तों के अनुपालन का आकलन किया जाएगा।

यदि आवेदन में कोई कमी पाई जाती है तो संबंधित संस्था को एक समेकित कमी-पत्र जारी कर निर्धारित समय में कमियां दूर करने का अवसर दिया जाएगा। कमियां दूर नहीं करने वाले आवेदनों को आगे विचार किए बिना खारिज किया जा सकता है।

इसके बाद प्रस्तावों को अधिनियम की धारा 6 के तहत गठित विशेषज्ञ समिति के पास भेजा जाएगा। समिति प्रायोजक संस्था की पात्रता, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR), दस्तावेजों, वित्तीय क्षमता और प्रस्तावित विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे की जांच करेगी। समिति को प्रस्तावित स्थल का भौतिक निरीक्षण करने और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित विषयों के विशेषज्ञों की राय लेने का अधिकार भी होगा।

समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार सैद्धांतिक मंजूरी दे सकेगी, निर्धारित शर्तों के साथ सशर्त मंजूरी प्रदान कर सकेगी या कारणों सहित आदेश जारी कर प्रस्ताव खारिज कर सकेगी। विशेषज्ञ समिति की सिफारिशें प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर उच्च शिक्षा मंत्री को उचित निर्णय लेना होगा।

लेटर ऑफ इंटेंट मिलने पर दाखिले शुरू करने की अनुमति नहीं

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए जारी लेटर ऑफ इंटेंट (Letter of Intent) एक वर्ष तक वैध रहेगा। लिखित कारण दर्ज करते हुए इसे अधिकतम छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकता है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि लेटर ऑफ इंटेंट जारी होने मात्र से किसी संस्था को विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं मिलेगा। संबंधित संस्था निर्धारित शर्तें और आवश्यक मंजूरियां पूरी किए बिना दाखिले शुरू नहीं कर सकेगी, न ही शैक्षणिक कार्यक्रम संचालित करने या डिग्रियां प्रदान करने की हकदार होगी।

निजी विश्वविद्यालयों की निगरानी के लिए बनेगा नियामक प्राधिकरण

जम्मू-कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने के लिए निजी विश्वविद्यालय नियामक प्राधिकरण गठित करने का प्रावधान किया गया है। इसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी करेंगे, जिनका पद सरकार में आयुक्त सचिव से कम नहीं रहा हो और जिन्हें उच्च शिक्षा प्रशासन, सार्वजनिक नीति या नियामक व्यवस्था का पर्याप्त अनुभव हो।

प्राधिकरण में उच्च शिक्षा, वित्त और कानून विभागों के प्रशासनिक सचिव, सरकारी विश्वविद्यालय के एक कुलपति, दो प्रतिष्ठित शिक्षाविद और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के संयुक्त सचिव स्तर से नीचे नहीं होने वाले प्रतिनिधि को शामिल किया जाएगा। इसके अलावा राष्ट्रीय महत्व के संस्थान या प्रतिष्ठित शोध संस्थान से एक शिक्षाविद तथा उद्योग, सार्वजनिक नीति या संस्थागत प्रशासन से जुड़े प्रतिनिधि को भी स्थान मिलेगा।

प्राधिकरण का उद्देश्य निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना होगा। इसके तहत संस्थानों का निरीक्षण कर निर्धारित मानकों के अनुपालन की जांच की जा सकेगी।

नियम तोड़ने पर लाखों रुपये तक जुर्माना

नए नियमों में निजी विश्वविद्यालयों की मनमानी रोकने और जवाबदेही तय करने के लिए कड़े आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।

अधिनियम की धारा 47 का उल्लंघन कर दाखिला देने पर विद्यार्थी से वसूली गई वास्तविक फीस का दोगुना जुर्माना लगाया जाएगा। निर्धारित सीमा से अधिक फीस वसूलने पर अतिरिक्त वसूली गई राशि का तीन गुना दंड देना होगा।

अयोग्य शिक्षक की नियुक्ति पर प्रत्येक शिक्षक के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह का जुर्माना निर्धारित किया गया है। शिक्षकों की निर्धारित संख्या में कमी होने पर भी प्रति कमी 20 हजार रुपये प्रतिमाह दंड लगेगा, जो तीन महीने बाद दोगुना हो जाएगा।

परीक्षा और उचित मूल्यांकन के बिना डिग्री, डिप्लोमा या प्रमाणपत्र जारी करने पर पांच लाख रुपये का जुर्माना होगा। बुनियादी ढांचे में निर्धारित मानकों की कमी पर दो लाख रुपये प्रतिमाह तथा सरकार और नियामक प्राधिकरण की पूर्व अनुमति के बिना दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रम या विस्तार केंद्र शुरू करने पर 5.5 लाख रुपये प्रतिमाह जुर्माना लगाया जाएगा।

उमर अब्दुल्ला ने शिक्षा मंत्री शमीमा फिरदौस को दी बधाई

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर निजी विश्वविद्यालय नियम, 2026 अधिसूचित किए जाने पर शिक्षा मंत्री शमीमा फिरदौस को बधाई दी है। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा बयान में उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नए नियमों से मंजूरी प्रक्रिया सरल होगी, स्थानीय डोमिसाइल धारकों को प्रवेश और रोजगार में 25 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा तथा निजी विश्वविद्यालयों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने कहा कि नया ढांचा संस्थागत निवेश को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसरों का विस्तार करेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि इन नियमों से विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग एवं गणित (STEM), चिकित्सा, कानून, व्यवसाय अध्ययन और उदार कला जैसे विभिन्न क्षेत्रों में नए संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा। सरकार का उद्देश्य जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ प्रदेश को उच्च शिक्षा और अनुसंधान के प्रतिस्पर्धी केंद्र के रूप में विकसित करना है।

नए नियमों से जम्मू-कश्मीर में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए नियामक और प्रशासनिक ढांचा स्पष्ट होने की उम्मीद है। साथ ही स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा एवं रोजगार में निर्धारित आरक्षण और संस्थानों की जवाबदेही से जुड़े प्रावधान उच्च शिक्षा क्षेत्र में होने वाले विस्तार को प्रदेश के हितों से जोड़ने का प्रयास हैं।

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