जम्मू, सुरेंद्र सिंह। सोनिया कौर आज छोटे पर्दे का जाना पहचाना नाम बन चुका है। सोनी और स्टार प्लस के कई धारावाहिकों में अहम भूमिका निभाने वाली सोनिया दस वर्ष पहले मुंबई में गई थी और थोड़े ही समय में उसने अपनी प्रतिभा के दम पर वहां अपनी पहचान बना ली। अपने दस वर्ष के करियर में सोनिया सोनी टीवी पर प्रसारित हो चुके धारावाहिक अनामिका में जसलीन के अलावा बड़े भैया की दुल्हनिया में रेखा निभा चुकी है। इसके अलावा सोनिया हम हैं न, में भी काम कर चुकी है। मौजूदा समय सोनिया स्टार प्लस के सबसे पंसदीदा धारावाहिक ये रिश्ते हैं प्यार के, में जसमीत का किरदार निभा रही है। सोनिया ने मुंबई का अपना सफर राहुल महाजन के साथ रियल्टी शो स्वयंभर से शुरू किया था जिसमें उसने सबको प्रभावित किया था। जम्मू जैसे छोटे शहर से निकल मायानगरी मुंबई में सोनिया की लंबी उड़ान के पीछे उनकी मां हैं जिन्होंने अपनी बेटी का हाथ पकड़ उसे मुंबई पहुंचाया था।

मां भी रह चुकी है बेस्ट एक्टरः सोनिया को एक्टिंग अपनी मां से विरासत में मिली। सोनिया की मां अमरजीत कौर भी जम्मू के रंगमंच से जुड़ी कलाकार थी जो अपने बेहतर अभिनय के लिए बेस्ट एक्टर अवार्ड भी जीत चुकी है। सोनिया का कहना है कि मां ने हमेशा ही यही चाहा कि उनकी बेटी इस क्षेत्र में नाम बनाए। मां के नक्शे कदमों पर चलते हुए मैंने स्वगर्मीय कृपाल सिंह कसाली के नाटक नच्चा गें सारी रात में काम किया। इसके साथ दीवाना मंदिर जम्मू में मंचित होने वाली रामलीला में सीता का किरदार भी निभाया। जम्मू में रहते हुए एक पंजाबी फिल्म में काम भी किया। इसके बाद राहुल महाजन के रियल्टी शो स्वयंभर के लिए चयन हुआ। उस समय मैं उन्नीस वर्ष की थी लेकिन शो में मैं प्रबल दावेदार थी। इस शो के समाप्त होने के बाद मुझे सोनी टीवी के धारावाहिक अनामिका में जसलीन के किरदार के लिए चुन लिया गया।

बहुत मुश्किल थे मुंबई में शुरूआत के दिनः जब मैं मुंबई पहुंची थी, उन दिनोंं शुरूआत के दिनों में मुझे काफी मुश्किलें पेश आई। शहर नया था। ज्यादा लोगों को जानती भी नहीं थी। टेक्नालॉजी भी आज के जैसे नहीं थी। स्टूडियो से फोटोशूट करवाने के बाद प्रोडक्शन हाऊस तक पहुंचाना मेरे लिए चुनौती थी। आज व्हाट्सएप और इंस्टाग्राम का जमाना है जिसकी मदद से आप अपने फाेटो प्रोडक्शन हाउस तक आसानी से पहुंचा सकते हो लेकिन उस समय खुद ही जाना पड़ता था। मुंबई की ट्रैफिक का भी मुझे अंदाजा नहीं रहता था। जम्मू जैसे छोटे शहर से निकल एकदम मुंबई की भागमभाग में पहुंचना किसी के लिए भी परेशानी का सबब बन सकता है। मेरे साथ भी ऐसा हो रहा था। लेकिन शुक्रगुजार हूं मैं अपनी मम्मी का, जो इस मुश्किल की घड़ी में मेरा साया बनी रही। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे ऐसी मां मिली।

दीवाली मैं जम्मू में ही मनाती हूंः मैं चाहे ही मुंबई की चकाचौंध में रह रही हूं लेकिन जम्मू मुझे कभी नहीं भूलता है। मैं वर्ष 2010 में मुंबई में आई थी लेकिन मैंने दीवाली हर बार जम्मू में ही मनाई है। साल में कम से कम एक बार दीवाली पर मैं अपने घर जरूर आती हूं। इस दौरान मैं अपना पूरा समय अपने परिवार के साथ बिताती हूं। मम्मी के हाथ के राजमां-चावल खाती हूं। मुझे खुद भी कुकिंग का शौक है। जम्मू का खाना पसंद है। मुंबई में वैसा खाना नहीं मिलता तो जम्मू में उसे जी भर खा लेती हूं। मुंबई में जब भी कोई जम्मू का मिलता है तो बहुत अच्छा लगता है। मेरे साथ जम्मू के कई कलाकार भी काम करते हैं। हम जब साथ होते हैं तो वहां डोगरी में बात करते हैं। इससे हमें घर जैसा महसूस होता है। 

Posted By: Rahul Sharma

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