आरएसपुरा में 200 गांवों का एकमात्र अस्पताल: डॉक्टर नदारद, 2 साल से परेशान मरीज
आरएसपुरा उपजिला अस्पताल में हड्डी रोग, ईएनटी और मनोरोग विशेषज्ञों की भारी कमी है, जिससे 200 से अधिक गांवों के ...और पढ़ें
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विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा उपजिला अस्पताल आरएसपुरा।
HighLights
आरएसपुरा अस्पताल में हड्डी, ईएनटी, मनोरोग विशेषज्ञों की भारी कमी
200 से अधिक गांवों के मरीजों को निजी इलाज पर निर्भरता
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव बड़ी चिंता का विषय
दलजीत सिंह, आरएसपुरा। भारत-पाक सीमा से सटे आरएसपुरा उपजिले का उपजिला अस्पताल लंबे समय से गंभीर विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव से जूझ रहा है।
अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ-कान-नाक-गला (ईएनटी) विशेषज्ञ के साथ-साथ मनोरोग विशेषज्ञ न होने से हजारों मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरएसपुरा उपजिला अस्पताल पर सुचेतगढ़, आरएसपुरा, अरनिया और बिश्नाह तहसीलों के करीब 200 से अधिक गांवों की आबादी निर्भर है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की गैरमौजूदगी के कारण लोगों को निजी अस्पतालों की महंगी सेवाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।
परेशान हो रहे मरीज
स्थानीय लोगों के अनुसार करीब दो वर्ष पूर्व उपजिला अस्पताल आरएसपुरा में हड्डी, ईएनटी और मनोरोग विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध थीं। उस समय प्रतिदिन औसतन 50 से 100 मरीज इन विभागों में जांच और इलाज के लिए पहुंचते थे।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि क्षेत्र में इन विशेषज्ञ सेवाओं की कितनी अधिक जरूरत है। हालांकि इन विशेषज्ञों के स्थायी पद स्वीकृत नहीं हैं, लेकिन उस समय वैकल्पिक व्यवस्था के तहत डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही थीं। बीते करीब दो वर्षों से इन सेवाओं के बंद होने के कारण मरीजों की परेशानियां बढ़ गई हैं।
इलाज के लिए जाना पड़ता है जम्मू
विशेषकर मानसिक तनाव, अवसाद, नशे की लत और सीमावर्ती क्षेत्र में रहने से जुड़े मानसिक दबाव से जूझ रहे मरीजों के लिए मनोरोग विशेषज्ञ का न होना बड़ी समस्या बना हुआ है।
ऐसे मरीजों को या तो इलाज के लिए जम्मू जाना पड़ता है या फिर निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए निजी इलाज का खर्च उठाना भी आसान नहीं है।
लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि भले ही सप्ताह में दो दिन ही सही, लेकिन हड्डी, ईएनटी और मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपजिला अस्पताल में उपलब्ध करवाई जाएं, ताकि आम और गरीब लोगों को अपने क्षेत्र में ही बेहतर उपचार मिल सके। इसके बावजूद अब तक विशेषज्ञ सेवाएं दोबारा शुरू नहीं हो सकी हैं।
किसने क्या कहा?
बिक्रम चौधरी ने कहा कि जब पहले हड्डी, ईएनटी और मनोरोग विशेषज्ञ यहां उपलब्ध थे, तब रोजाना 50 से 100 मरीज इलाज के लिए आते थे। सीमावर्ती उपजिले में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। सरकार को इस ओर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।
समाजसेवी साहिल गुप्ता ने कहा कि उपजिला अस्पताल गरीब जनता के लिए अंतिम सहारा है। विशेषज्ञ डॉक्टरों के अभाव में मरीजों को छोटी-छोटी बीमारियों के लिए भी जम्मू या निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। खासकर मनोरोग विशेषज्ञ की गैरमौजूदगी चिंता का विषय है।
स्थानीय निवासी अश्वनी चौधरी ने कहा कि पहले विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से लोगों को घर के पास ही इलाज मिल जाता था। अब मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। यदि सप्ताह में दो दिन भी इन विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध करवाई जाएं तो उपजिले के हजारों लोगों को राहत मिल सकती है।
ब्लॉक मेडिकल अधिकारी डॉ. बलविंद्र सिंह ने कहा कि उपजिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं उपलब्ध करवाने के संबंध में उच्च अधिकारियों से निवेदन किया गया है। विभाग के उच्च अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि जहां इन विशेषज्ञ सेवाओं की आवश्यकता है, वहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा उपलब्ध करवाई जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
