सांबा, संवाद सहयोगी : जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग हमेशा से बहुत संवेदशील रहा है। कई बार इस राजमार्ग पर आतंकी वारदातें भी हो चुकी हैं, लेकिन हाईवे अथारिटी इसकी हालत सुधारने पर नहीं ध्यान दे रही है। सात-आठ साल से सांबा से जम्मू तक इस राजमार्ग पर तारकोल नहीं डाला गया है। ऐसे में इस राजमार्ग पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जोकि राहगीरों के लिए कई बार जानलेवा भी साबित हो चुके हैं।

कभी सांबा के लोगों को इस राजमार्ग पर गर्व होता था, क्योंकि इसकी हालत बहुत अच्छी हुआ करती थी। हर दो-तीन साल में पूरे हाईवे पर तारकोल पड़ता था, जिससे इसमें गड्ढों का नामोनिशान नहीं होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। हालत यह है कि सांबा जिले के ग्रामीण इलाकों की बदहाल सड़कों जैसा यह राजमार्ग नजर आने लगा है। ऐसे में यहां से जाने वाले खासकर दोपहिया वाहन चालकों को हादसा होने का डर लगातार बना रहता है।

पैच वर्क से काम चला रही हाईवे अथारिटी : पिछले दिनों पांच दिन तक लगातार हुई बारिश की वजह से जम्मू से लेकर कठुआ तक पूरे राजमार्ग में कई जगह छोटे-बड़े नए गड्ढे बन गए हैं। वहीं पहले से बने गड्ढे और चौड़े हो गए हैं। जो लोग रात में सफर करते हैं, उनके लिए अब इस सड़क से सफर करना बहुत मुश्किल भरा हो गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने सड़क मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति की है। उसने गड्ढों को कहीं मिट्टी और कहीं तारकोल से भरने का काम किया है। इस पैच वर्क से सड़क का लेवल बिगड़ गया है। इससे दोपहिया वाहन चालकों को हादसों की आशंका बनी रहती है।

टोल प्लाजा खोलने पर जोर, पर लोगों की जान से खिलवाड़ : सांबा के रहने वाले सन्नी संब्याल ने बताया कि जब राष्ट्रीय बना था, तब उस पर तारकोल डाला गया था। उसके बाद सिर्फ कुछ-कुछ हिस्सों की मरम्मत ही की गई। इस बार पांच दिन की बारिश ने हाईवे अथारिटी के काम करने के तरीकों की पोल खोलकर रख दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों के पास पहले अक्सर यही बहाना होता था कि लोग टोल प्लाजा नहीं लगने देते, इस कारण नए सिरे से तारकोल नहीं डाला जाता। अब तो इनके पास जम्मू से कठुआ तक टोल प्लाजा हैं, तो फिर सड़क पर तारकोल क्यों नहीं डाला जा रहा है। टोल प्लाजा से भारी कमाई होने के बाद भी अथारिटी लोगों की जान से खिलवाड़ कर रही है। उन्होंने कहा कि हमारी भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से यही अपील है कि नए सिरे से सड़क पर तारकोल डाला जाए, ताकि स्थानीय लोगों एवं राहगीरों को आने जाने में कोई दिक्कत न हो।  

Edited By: Rahul Sharma