विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

रूस में नौकरी के नाम पर जम्मू में 10.05 लाख की ठगी, टूरिस्ट वीजा पर रूस भेजा, 2 महीने तक भटकता रहा युवक

By Dinesh Mahajan Edited By: Rahul Sharma
Published: Thu, 16 Jul 2026 12:28 PM (IST)Updated: Thu, 16 Jul 2026 12:32 PM (IST)

क्राइम ब्रांच जम्मू ने रूस में नौकरी दिलाने के नाम पर 10.05 लाख रुपये की ठगी के मामले में विशाल सिंह के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है।

जम्मू में रूस नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी आरोपी पर आरोपपत्र दाखिल।

जम्मू में रूस नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख की ठगी आरोपी पर आरोपपत्र दाखिल।

HighLights

  1. रूस में नौकरी के नाम पर 10.05 लाख की ठगी।

  2. क्राइम ब्रांच जम्मू ने आरोपी विशाल सिंह पर आरोपपत्र दाखिल किया।

  3. टूरिस्ट वीजा पर रूस भेजकर युवक को दो माह भटकाया।

जागरण संवाददाता, जम्मू। स्पेशल क्राइम विंग (एससीडब्ल्यू) क्राइम ब्रांच जम्मू ने विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी के एक मामले में आरोपी के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र (चार्जशीट) दाखिल कर दिया है। आरोपित की पहचान सूर्यवंशी नगर, मुट्ठी निवासी विशाल सिंह उर्फ विशाल मन्हास के रूप में हुई है। उसके विरुद्ध मामला दर्ज है।

जांच के अनुसार आरोपित ने शिकायतकर्ता को रूस में नौकरी और वर्क वीजा दिलाने का झांसा देकर 10.05 लाख रुपये ऐंठ लिए। आरोपित के पास विदेश में भर्ती कराने का कोई अधिकृत लाइसेंस या अनुमति नहीं थी, इसके बावजूद उसने खुद को विदेश में रोजगार उपलब्ध कराने में सक्षम बताया।

जांच में सामने आया कि आरोपित ने शिकायतकर्ता के लिए वर्क वीजा की बजाय केवल टूरिस्ट ई-वीजा की व्यवस्था की और उसे पहले दुबई तथा फिर रूस भेज दिया। शिकायतकर्ता करीब दो माह तक रूस में बिना किसी रोजगार के रहा। न तो उसे नौकरी मिली और न ही आरोपी ने उसकी रकम लौटाई।

क्राइम ब्रांच ने वित्तीय लेन-देन की जांच की

शिकायतकर्ता द्वारा पैसे वापस मांगने पर आरोपी ने उसे कथित रूप से धमकियां भी दीं। क्राइम ब्रांच ने जांच के दौरान बैंक रिकार्ड, दस्तावेजी सबूतों, गवाहों के बयान और वित्तीय लेन-देन का विश्लेषण किया। जांच में पता चला कि शिकायतकर्ता के खाते से 6.84 लाख रुपये सीधे आरोपित के बैंक खातों में स्थानांतरित किए गए, जबकि आरोपी के कहने पर 49,999 रुपये मोहाली स्थित एक वीजा एजेंसी को भेजे गए।

शेष राशि नकद देने का आरोप है। आरोपित फिलहाल जमानत पर है। जांच पूरी होने के बाद उसके डिजिटल फिंगरप्रिंट लेकर उन्हें राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (एनएएफआईएस) पोर्टल पर अपलोड किया गया। मौखिक, दस्तावेजी और इलेक्ट्रानिक सबूतों के आधार पर अपराध सिद्ध पाए जाने पर क्राइम ब्रांच ने कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत कर दिया है।