यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 15, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
Jammu Kashmir : एक माह में बन जाएंगे सीएलयू के नियम, दूसरे राज्यों के तौर-तरीकों का अध्ययन करेगा राजस्व विभाग
Jammu Kashmir Revenue Department मेहता ने निर्देश दिया कि अलग-अलग मामलों में गैर कृषि गतिविधियों के लिए दी जाने वाली ...और पढ़ें

जम्मू, राज्य ब्यूरो : प्रदेश में भूमि इस्तेमाल के परिवर्तन (चेंज आफ लैंड यूज-सीएलयू) के नियम 25 दिसंबर तक तैयार कर लिए जाएंगे। इसके लिए अन्य राज्यों के तौर-तरीकों का अध्ययन किया जाएगा। राजस्व विभाग विभिन्न संबंधित विभागों व लोगों से व्यापक चर्चा और परामर्श भी करेगा ताकि भूमि के उपयोग के परिवर्तन का एक स्थायी और जनअनुकूल माडल बनाया जा सके।
प्रदेश के मुख्य सचिव अरुण कुमार मेहता ने जम्मू कश्मीर में भूमि के इस्तेमाल के परिवर्तन की प्रक्रिया विशेष रूप से कृषि से गैर-कृषि गतिविधियों की समीक्षा की है। उन्होंने राजस्व विभाग और राजस्व बोर्ड के अधिकारियों से कहा है कि वह जम्मू कश्मीर में बदले हुए विधायिका ढांचे के मद्देनजर सबसे प्रगतिशील राज्यों द्वारा अपनाए जा रहे विभिन्न माडल का अध्ययन करने के बाद ही भूमि उपयोग परिवर्तन की मौजूदा प्रक्रिया का व्यापक मूल्यांकन और समीक्षा करें।
मेहता ने राजस्व विभाग और राजस्व बोर्ड को 25 दिसंबर तक जम्मू और कश्मीर भूमि राजस्व अधिनियम के नवीनतम प्रविधानों के अनुसार जिला उपायुक्तों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए भी कहा है। बैठक में राजस्व के वित्तीय आयुक्त, आवास और शहरी विकास, कानून, न्याय और संसदीय मामलों के विभागों के प्रशासनिक सचिवों ने भाग लिया।
देय कृषि भूमि की ऊपरी सीमा का मूल्यांकन जरूरी : मेहता ने निर्देश दिया कि अलग-अलग मामलों में गैर कृषि गतिविधियों के लिए दी जाने वाली कृषि भूमि की ऊपरी सीमा का विधिवत मूल्यांकन जरूरी है। पर्यावरणीय स्थिरता और खाद्य सुरक्षा के मुद्दों पर समझौता किए बिना समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट शब्दों में नियमों को निर्धारित किया जाना चाहिए।
