श्रीनगर, जेएनएन। कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सुरक्षाबलों के लिए यह साल बेहतर रहा। साल की शुरूआत से अब तक सुरक्षाबलों ने घाटी में दहशत फैला रहे 89 आतंकवादियों को ढेर किया है, जिनमें अधिकतर आतंकवादी संगठनों के शीर्ष कमांडर शामिल हैं। यही नहीं मारे गए आतंकियों में सबसे अधिक लश्कर-ए-तैयबा से थे। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार के अनुसार 89 में से 42 से अधिक आतंकी लश्कर-ए-तैयबा से थे।

घाती में सक्रिय आतंकवादियों की समीक्षा करने के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी के इस कुख्यात आतंकवादियों की सूची जारी की है जिनमें सात पुराने जबकि तीन नए आतंकी शामिल हैं। जारी की गई टॉप 10 मोस्ट वांटेड आतंकियाें की सूची में भी अधिकतर लश्कर-ए-तैयबा के ही हैं। आइजीपी कश्मीर विजय कुमार ने यह सूची जारी करते हुए कहा कि जल्द ही इन आतंकवादियों को या तो मुठभेड़ में मार गिराया जाएगा या फिर इन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। सूची में शामिल इन आतंकियों पर पुलिस ने ईनाम भी रखा है। यदि कोई इन आतंकवादियों के बारे में जानकारी देता है तो यह ईनाम की राशि उसे दी जाएगी। उसकी पहचान को गुप्त रखा जाएगा। 

सूची में शामिल सात पुराने व तीन आतंकियों के नाम: जम्मू-कश्मीर पुलिस द्वारा जारी की गई कश्मीर घाटी केे टॉप 10 मोस्ट वांटेड आतंकियों में जिन पुराने आतंकियों के नाम शामिल हैं, उनमें सलीम पारे, युसुफ कांतरू, अब्बास शेख, रियाज शतरगुंड, फारुख नली, जुबैर वानी, अशरफ मौलवी शामिल हैं। वहीं सूची में जिन तीन नए आतंकियों का शामिल किया गया है उनमें साकिब मंजूर, उमर मुश्ताक खांडे और वकील शाह शामिल हैं।

जाने किस संगठन से हैं टॉप 10 सूची में शामिल आतंकी: 

सलीम पारे: लश्कर-ए-तैयबा का कमांडर सलीम पारे हाजिन बांडीपोरा का रहने वाला है। वर्ष 2014 से आतंकी गतिविधियों में सक्रिय होने वाला सलीम पारे उर्फ बिल्ला कई आतंकी हमलों में शामिल रह चुका है। उसके खिलाफ हाजिन, गुंड गांदरबल में एक दर्जन से अधिक मामले दर्ज हैं।

युसूफ कांतरू : युसूफ कांतरू उर्फ इस्हा कांतरू जिला बारामूला के टंगमर्ग का रहने वाला है। लश्कर-ए-तैयबा का ऑपरेशनल हैड युसूफ कई युवाओं को बरगलाकर आतंकी संगठन में शामिल चुका है और पुलिस की पकड़ में आए बिना अभी भी इस अभियान मेंं जुटा हुआ है। उसे पुलिस ने ए ++ केटेगरी में रखा है।

अब्बास शेख : रामपोरा कमोह का रहने वाला कुख्यात आतंकी अब्बास शेख द रजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का मुखिया है। हालांकि टीआरएफ भी लश्कर-ए-तैयबा का ही हिस्सा माना जाता है। गत वर्ष अप्रैल में अब्बास हिजबुल मुजाहिदीन को छोड़ टीआरएफ में शामिल हुआ था। उसे हिजबुल मुजाहिदीन की नीतियां पसंद नहीं थी। दरअसल अब्बास स्थानीय पुलिस कर्मियों व लोगों को मारने के खिलाफ था। एचएम छोड़ने के बाद उसने हिजबुल मुजाहिदीन के सदस्यों को चेतावनी भी दी थी कि वे स्थानीय लोगों पर हमले बंद कर दें। यही वजह है कि अब्बास अब दोनों हिजबुल मुजाहिदीन और सुरक्षाबलों से बचता फिर रहा है।

रियाज शतरगुंड : जिला पुलवामा के काकपोरा का रहने वाला रियाज भी लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य है। उस पर भी कई हत्याओं व आतंकी हमलों के मामले दर्ज हैं। पुलिस विभाग का कहना है कि दक्षिण कश्मीर में मुख्य रूप से लश्कर-ए-तैयबा का सफाया कर दिया गया है। रियाज अहमद के अलावा अब इस क्षेत्र में संगठन का कोई भी स्थानीय शीर्ष कमांडर सक्रिय नहीं है।

फारूक भट उर्फ नली : टाॅप 10 सूची में पांचवें स्थान पर हिजबुल मुजाहिदीन का टॉप कमांडर फारूक भट उर्फ नली है। यारीपोरा कुलगाम का रहने वाले फारूक नली को पुलिस ने ए ++ श्रेणी में रखा है। नवीद बाबू की गिरफ्तारी के बाद हिजबुल मुजाहिदीन संगठन ने उसे कुलगाम व पुलवामा की जिम्मेदारी दे दी। पुलवामा मुठभेड़ में एक बार सुरक्षाबलों ने उसे घेर भी लिया था परंतु वह वहां से बच निकला। फारूक वर्ष 2015 में हिजबुल मुजाहिदीन में शामिल हुआ था। आपको यह जानकर हैरानगी होगी कि वह कश्मीर के अमीर परिवार से संबंध रखता है। उसका परिवार सेब उद्योग से जुड़े हैं।

जुबैर वानी : सूची में छठे स्थान पर हिजबुल मुजाहिदीन का कुख्यात आतंकी कमांडर जुबैर वानी शामिल है। एमफिल स्कॉलर जुबैर को साल 2018 में पाकिस्तान से लौटने के बाद हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी संगठन ने अपना चीफ ऑपरेशनल कमांडर नियुक्त कर दिया।30 वर्षीय जुबैर को भी ए ++ श्रेणी में रखा गया है। दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग देहरूना का रहने वाला जुबैर गरीब परिवार से संबंधित है।

अशरफ मोलवी : नई सूची में शामिल पुराने नामों में सबसे अंत में हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख कमांडर अशरफ मोलवी का नाम शामिल है। ए ++ श्रेणी में शामिल अशरफ भट उर्फ ​मौलवी दक्षिण कश्मीर के जिला अनंतनाग का रहने वाला है। वह दूसरी बार आतंकी बना। पहले उसने वर्ष 2000 में आतंकवाद से संबंध जोड़ा। फिर उससे किनारा कर दिया। उसके बाद वर्ष 2015 में वह हिजबुल मुजाहिदीन का सक्रिय आतंकी बन गया। मोलवी ने पाकिस्तान में हथियारों का प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उसे दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग बेल्ट में आतंकवाद को फिर से जिंदा करने का श्रेय दिया जाता है। वह जमात पृष्ठभूमि के साथ एक अनुभवी आतंकवादी है। मोलवी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है लेकिन उसने धर्म का अध्ययन किया है। उसे अन्य स्थानीय आतंकवादियों के मुकाबले इस्लामी शिक्षाओं का अधिक ज्ञान है। संगठन उसकी इसी शिक्षा का फायदा उठाकर युवाओं को आतंकवाद के रास्ते में धकेलने में मदद लेता है।

Edited By: Rahul Sharma