श्रीनगर, राज्य ब्यूरो। कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों ने आतंकियो के समूल नाश के अपने अभियान को जारी रखते हुए उनके अोवरग्राउंड वर्कर नेटवर्क को भी नेस्तनाबूद करना शुरु कर दिया है। बीते 45 दिनों में सुरक्षाबलाें ने वादी के विभिन्न हिस्सों में सक्रिय 30 ओवरग्राउंड वर्करों काे पकड़ा है। इनमें से कई सुरक्षबलों पर हमले की वारदात को अंजाम देने में भी शामिल रहे हैं। पकड़े गए ओवरग्राउंड वर्करों का संबंध लश्कर, जैश, हिज्ब, अलबदर और आइएसजेके जैसे संगठनों से है।

पहली जनवरी के बाद पकड़े गए 30 आेवरग्राउंड वर्करों में सात उत्तरी कश्मीर के बांडीपोर जिले के रहने वाले हैं जबकि सात दक्षिण कश्मीर में अवंतीपोर व उसके साथ सटे इलाकों के निवासी हैं। तीन बडगाम के, दो गांदरबल और तीन अनंतनाग से भी कपड़े गए हैं। इसके अलावा इनमें आठ श्रीनगर के भी हैं। ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में पुलिस ने जैश-ए-मोहम्मद के दो अलग-अलग माड्यूल धवस्त करते हुए उसके आठ अोवरग्राउंड वर्करों को पकड़ा है। तीन ओवरग्राउंड वर्कर गत दो फरवरी को प्रताप पार्क लाल चौक में हुए ग्रेनेड हमले की वारदात में लिप्त थे। इससे पूर्व 16 जनवरी को पुलिस ने सौरा व लाल बाजार इलाके में जैश के पांच ओवरग्राउंड वर्करों को पकड़ा था। इन्होंने हजरत बल और हबक में ग्रेनेड हमलों को अंजाम दिया था।

बांडीपोर में बीते 45 दिनों में पकड़े गए सात ओवरग्राउंड वर्करों का संबंध लश्कर व हिज्ब से है। अवंतीपोर और उसके साथ सटे पुलवामा व त्राल से सात वर्करों को पकड़ा गया। इनमें एक गत रोज ही पकड़ा गया है। इनमें पांच का सबंध जैश से है और ये सभी गत 25 जनवरी को मारे गए पाकिस्तानी आतंकी कारी यासिर के लिए काम करते थे। गांदरबल में भी लश्कर के दो ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े गए हैं। इनमें से एक आतंकवादियों के लिए मोबाइल फोन, सिम का बंदोबस्त करता था, तो दूसरा उन्हें सुरक्षित ठिकानों पर पहुंचाने व सुरक्षाबलों के शीविरों पर हमले में मदद करता था। एक ओजीडब्ल्यू ने तो आतंकी निसार डार की मुठभेड़ स्थल से बच निकलने में और श्रीनगर में एक सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने में भी मदद की। अनंतनाग में गत रोज पुलिस ने हिज्ब के तीन ओवरग्राउंड वर्करों को पकड़ा जबकि बडगाम जिले में आइएसजेके के तीन ओवरग्राउंड वर्कर बीते सप्ताह पकड़े गए हैं।

पकड़े गए ओजीडब्ल्यू से भारी मात्रा मे हथियार गोला बारुद, आतंकी साहित्य, आतंकी संगठनों के लैटरहैड, पोस्टर, पंच-सरपंचों व अन्य लोगों के लिए जारी किए गए धमकी भरे पोस्टर, धनराशि, मोबाइल फोन, पेनड्राइव, कंप्यूटर, स्कैनर, सुरक्षाबलों की वर्दियां, पाउच भी मिले हैं।

आतंकियों की आंख, नाक, कान हाेते हैं ओजीडब्ल्यू

ओवरग्राउंड वर्कर को कश्मीर में सामान्य भाषा में ओजीडब्लयू कहा जाता है। यह आतंकियों के लिए मुखबिरी का ही काम नहीं करते, बल्कि उनके लिए सुरक्षित ठिकानों का बंदोबस्त करने, उन्हें एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, हथियारों व पैसों का बंदोबस्त करने, किसी हमले के लिए टार्गेट का चुनाव करने जैसी जिम्मेदारियों को भी निभाते हैं। यह सुरक्षाबलों की गतिविधियों की खबर भी आतंकियों तक पहुंचाते हैं। ओवरग्राउंड वर्कर आतंकी संगठनों के लिए स्थानीय युवकों की भर्ती में भी अहम भूमिका निभाते हैं।

कोई भी हो सकता है ओवरग्राउंड वर्कर

ओजीडब्लयू कभी आसानी से हाथ नहीं आते। छात्र, मजदूर, दुकानदार, अध्यापक, सरकारी-गैर सरकारी कर्मी, पूर्व आतंकी, राजनीतिक संगठनोंं से नाता रखने वाले तत्व, कोई भी आतंकियाें का ओजीडब्लयू हो सकता है। इनकी गतिविधिंया तभी नजर आती हैं, जब किसी जगह यह अपना कोई निशान छोड़ जाएं, अन्यथा नहीं। इनके खिलाफ अकसर कोई पक्का सबूत नहीं मिलता। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, वादी में कई बार ऐसे ओवरग्राउंड वर्कर पकड़े गए हैं जो राजनीतिक, सामाजिक, मजहबी सगठनों से जुड़े रहे हैं या फिर सरकारी सेवा में थे। प्रत्यक्ष रुप से किसी तरह के गंभीर अपराध में लिप्त न होने के कारण कई बार यह आसानी से बच निकलते हैं।

  • ओवरग्राउंड वर्कर किसी भी आतंकी के लिए बहुत अहम होता है। उसके बिना किसी भी आतंकी का जिंदा रहना मुश्किल होता है। ओवरग्राउंड वर्कर आतंकी संगठनों के लिए एक रीड़ की हड्डी जैसा होता है। कई बार ओवरग्राउंड वर्कर ही आतंकियों का हैंडलर होता है। वही पर्दे के पीछे रहकर पाकिस्तान से अाने वाले हुक्म को आतंकियों के जरिए लागू कराता है। इसीलिए अोवरग्राउंड वर्करों के नेटवर्क को तबाह करना बहुत जरूरी है। जिस इलाके में ओवरग्राउंड वर्कर नहीं होंगे, वहां आतंकी न ठिकाना बनाते हैं न कार्रवाई करते हैं। - इम्तियाज हुसैन मीर, एसएसपी कश्मीर 

Posted By: Rahul Sharma

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