'सिर्फ अमरनाथ यात्रा का डर दिखा किसी को जेल नहीं भेज सकते!' हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, रद्द किया PSA ऑर्डर
जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट ने एक पीएसए हिरासत आदेश को रद्द करते हुए कहा कि अमरनाथ यात्रा की सामान्य सुरक्षा चिंताएं निवारक हिरासत का आधार नहीं हो सकतीं।
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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट का अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा पर बड़ा फैसला।
HighLights
अमरनाथ यात्रा सुरक्षा चिंता निवारक हिरासत का एकमात्र आधार नहीं हो सकती
व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए ठोस और विश्वसनीय सबूत आवश्यक हैं
हाई कोर्ट ने पीएसए हिरासत आदेश रद्द कर तत्काल रिहाई का निर्देश दिया
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाई कोर्ट की श्रीनगर पीठ ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (पीएसए) के तहत जारी एक हिरासत आदेश को रद्द करते हुए कहा है कि श्री अमरनाथ जी यात्रा से जुड़ी सामान्य सुरक्षा चिंताओं के आधार पर किसी व्यक्ति को निवारक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
इसके लिए संबंधित व्यक्ति के खिलाफ ठोस, विशिष्ट और विश्वसनीय सामग्री होना जरूरी है, जिससे राज्य की सुरक्षा के लिए संभावित खतरा साबित हो। न्यायमूर्ति एमए चौधरी ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि निवारक हिरासत एक असाधारण कानूनी उपाय है।
इसे लागू करने के लिए हालिया, प्रासंगिक और निकटवर्ती सामग्री उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे यह स्पष्ट हो कि संबंधित व्यक्ति भविष्य में राज्य की सुरक्षा के प्रतिकूल गतिविधियों में शामिल हो सकता है।
अदालत ने माना कि अमरनाथ यात्रा जैसे संवेदनशील धार्मिक आयोजन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है। हालांकि, यात्रा की संवेदनशीलता को किसी व्यक्ति के खिलाफ ठोस साक्ष्य का विकल्प नहीं बनाया जा सकता।
सामान्य सुरक्षा आशंका और किसी विशेष व्यक्ति के खिलाफ उपलब्ध विशिष्ट सामग्री में अंतर करना जरूरी है।
पुरानी सामग्री और दस्तावेज न देने पर सवाल
हाई कोर्ट ने हिरासत रिकॉर्ड की जांच के दौरान कई खामियां भी पाईं। अदालत ने कहा कि अधिकारियों ने ऐसी सामग्री पर भरोसा किया जो पर्याप्त रूप से ताजा और निकटवर्ती नहीं थी। इससे भविष्य में संबंधित व्यक्ति की गतिविधियों को लेकर उचित आशंका स्थापित नहीं होती।
अदालत ने यह भी पाया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति को आदेश के आधार में इस्तेमाल सभी दस्तावेज और सामग्री उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे उसे हिरासत के खिलाफ प्रभावी तरीके से अपनी दलील रखने के संवैधानिक अधिकार में बाधा पहुंची।
अनुच्छेद 22(5) का पालन जरूरी
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 22(5) में दिए सुरक्षा उपायों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि निवारक हिरासत से जुड़े प्रावधान महज औपचारिकताएं नहीं हैं। हिरासत के कारण और संबंधित सामग्री ऐसी भाषा में बताना जरूरी है, जिसे व्यक्ति समझ सके और जिसके आधार पर वह प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सके।
इन कमियों के चलते हाई कोर्ट ने पीएएसए के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया और संबंधित व्यक्ति को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया, बशर्ते किसी अन्य मामले में उसकी हिरासत आवश्यक न हो।
फैसला स्पष्ट करता है कि सुरक्षा संबंधी व्यापक आशंकाएं कानून में तय व्यक्तिगत और ठोस आधारों की जगह नहीं ले सकतीं।
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